क्लस्टर बम, व्हाइट फॉस्फोरस बम, स्टेल्थ बॉम्बर और AI सिस्टम... वो नए हथियार जिनका ईरान वॉर में हो रहा इस्तेमाल

ईरान युद्ध में अमेरिका-इजरायल ने स्टेल्थ बॉम्बर (बी2 स्पिरिट), AI बेस्ड टारगेट सेलेक्शन सिस्टम, कम लागत वाले सुसाइड ड्रोन और सफेद फॉस्फोरस बम का इस्तेमाल किया. ईरान ने क्लस्टर वॉरहेड वाले बैलिस्टिक मिसाइल दागे. ये नए हथियार युद्ध को तेज, सटीक और घातक बना रहे हैं, लेकिन नागरिकों पर खतरा बहुत बढ़ गया है.

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ईरान की जंग में अमेरिका-इजरायल और ईरान की तरफ से कई तरह के नए हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. (Photo: ITG) ईरान की जंग में अमेरिका-इजरायल और ईरान की तरफ से कई तरह के नए हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:07 PM IST

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक के युद्धों से अलग कई नए और एडवांस हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. यह युद्ध ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नाम से चल रहा है जिसमें दोनों तरफ से आधुनिक तकनीक का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है. 

अमेरिका और इजरायल ने स्टेल्थ बॉम्बर, एआई सिस्टम, कम लागत वाले सुसाइड ड्रोन और अन्य हथियारों का पहली बार बड़े पैमाने पर उपयोग किया है. ईरान ने भी क्लस्टर वॉरहेड वाले बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य हथियारों से जवाब दिया है.  

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स्टेल्थ बॉम्बर – बी2 स्पिरिट

अमेरिका ने बी2 बॉम्बर का इस्तेमाल ईरान के भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर किया. यह विमान एक अरब डॉलर से ज्यादा कीमत का है. रडार से बचने में माहिर है. इसमें 907 kg के भारी बम गिराए जो कंक्रीट को भेदकर अंदर विस्फोट करते हैं. ये बॉम्बर अमेरिका से उड़ान भरकर ईरान पहुंचे और सटीक हमले किए. यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर स्टेल्थ बॉम्बर का इस्तेमाल किसी युद्ध में हुआ है.

एआई बेस्ड सिस्टम – टारगेट सेलेक्शन 

यह युद्ध एआई का सबसे बड़ा परीक्षण बन गया है. अमेरिका ने एंथ्रोपिक के क्लॉड एआई मॉडल और पलेंटिर के मेवेन स्मार्ट सिस्टम का उपयोग किया. ये सिस्टम ड्रोन फुटेज, दूरसंचार डेटा और अन्य जानकारी से सेकेंडों में टारगेट चुनते हैं. हमले की योजना बनाते हैं.

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इससे किल चेन बहुत छोटी हो गई है यानी टारगेट ढूंढने से हमला करने तक का समय बहुत कम हो गया. पहले 24 घंटों में ही 1000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले हुए. इजरायल ने भी गाजा में इस्तेमाल किए गए हब्सोरा जैसे एआई सिस्टम को ईरान पर आजमाया. एआई से हमले तेज और सटीक हुए लेकिन इसमें मानवीय नियंत्रण कम होने की चिंता भी बढ़ी है.

कम लागत वाले सुसाइड ड्रोन 

अमेरिका ने पहली बार एलयूसीएएस (लो-कॉस्ट अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम) ड्रोन का युद्ध में इस्तेमाल किया. ये ड्रोन ईरान के शाहेद ड्रोन की नकल पर बने हैं. सस्ते हैं. ये एक बार इस्तेमाल होने वाले आत्मघाती ड्रोन हैं जो लक्ष्य पर जाकर विस्फोट करते हैं. पेंटागन ने कहा कि ये ड्रोन ईरानी मॉडल की तरह हैं लेकिन अमेरिकी तकनीक से और  बेहतर हो गए हैं. ये ड्रोन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे हैं. युद्ध को सस्ता बनाने में मदद कर रहे हैं.

क्लस्टर बम और क्लस्टर वॉरहेड

ईरान ने इजरायल पर क्लस्टर वॉरहेड वाले बैलिस्टिक मिसाइल दागे जैसे खोर्रमशहर-4 या खैबर. ये मिसाइल हवा में खुलकर दर्जनों छोटे बम बिखेरते हैं जो बड़े इलाके को निशाना बनाते हैं. तेल अवीव जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में इनका इस्तेमाल हुआ जिससे नागरिकों को खतरा बढ़ा. इजरायल ने कहा कि ईरान रोजाना क्लस्टर बम इस्तेमाल कर रहा है. क्लस्टर बम अंतरराष्ट्रीय कानून में विवादास्पद हैं क्योंकि ये छोटे बम जमीन पर बिखरकर लंबे समय तक खतरा पैदा करते हैं.

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सफेद फॉस्फोरस बम

इजरायल पर आरोप लगा कि उसने लेबनान में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया जो ह्यूमन राइट्स वॉच ने सत्यापित किया है. ईरान युद्ध में इजरायल के F-16 विमान पर एक खास JDAM बम देखा गया जिसमें सफेद फॉस्फोरस हो सकता है. सफेद फॉस्फोरस जलाने वाला हथियार है जो 1500 डिग्री तक जलता है. गंभीर जलन पैदा करता है. इसे धुआं बनाने या लक्ष्य चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन घनी आबादी में इसका प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाता है.

अन्य एडवांस हथियार

अमेरिका ने टोमाहॉक क्रूज मिसाइल, F-35 और F-22 फाइटर जेट, HIMARS रॉकेट सिस्टम, प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का भी इस्तेमाल किया. इजरायल ने रैम्पेज और ब्लू स्पैरो जैसे हवाई लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल दागे. ये हथियार युद्ध को तेज और घातक बना रहे हैं.

यह युद्ध न सिर्फ पारंपरिक हथियारों का बल्कि एआई, स्टेल्थ और सस्ते ड्रोन का भी परीक्षण है. दोनों तरफ हजारों लक्ष्य नष्ट हुए लेकिन नागरिकों पर असर बहुत बड़ा है. स्थिति अभी बदल रही है. नए हथियारों का इस्तेमाल जारी है.

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