ईरानी हमलों से तंग UAE भारत से खरीदेगा ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर!

भारत और UAE ब्रह्मोस मिसाइल व आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर शुरुआती चर्चा कर रहे हैं. यह सौदा UAE की सुरक्षा मजबूत करेगा और भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाई देगा.

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इंडियन एयरफोर्स के सुखोई-30एमकेआई से लॉन्च होती ब्रह्मोस मिसाइल. (Photo:ITG) इंडियन एयरफोर्स के सुखोई-30एमकेआई से लॉन्च होती ब्रह्मोस मिसाइल. (Photo:ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:10 PM IST

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच भारतीय स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के निर्यात पर शुरुआती चर्चा चल रही है. सूत्रों के अनुसार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी आकाशतीर एयर डिफेंस कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं.

यह वार्ता शुरुआती चरण में है, लेकिन दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाई दे सकता है. खाड़ी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा. जब से अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया तो ईरान यूएई के सार्वजनिक और मिलिट्री बेस पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए.

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ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस ने साथ मिलकर विकसित की है. यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो 2.8 से 3 मैक स्पीड (ध्वनि की गति से तीन गुना) से उड़ सकती है. इसकी खासियत यह है कि इसे जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है. 

ब्रह्मोस दुश्मन के जहाजों, किलों और महत्वपूर्ण ठिकानों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम है. इसकी रेंज 290 से 450 किलोमीटर तक है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है. अगर यूएई के साथ डील होती है तो यह भारत के लिए ब्रह्मोस का पहला बड़ा खाड़ी देश निर्यात होगा. हालांकि क्योंकि यह संयुक्त विकास है, इसलिए निर्यात के लिए रूस की मंजूरी जरूरी होगी.

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आकाशतीर: स्वदेशी एयर डिफेंस का आधुनिक कमांड सिस्टम

आकाशतीर भारत का स्वदेशी एयर डिफेंस कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम है. यह दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोनों पर नजर रखने, उन्हें ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने के लिए विभिन्न हथियारों को एक साथ ज्वाइंट करता है.

यह सिस्टम रडार, सेंसर और कम्युनिकेशन नेटवर्क को जोड़कर रीयल-टाइम जानकारी देता है. आकाशतीर नेटवर्क सेंट्रीक वॉरफेयर का हिस्सा है, जिसमें एक सिस्टम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को नियंत्रित करता है. यूएई की दिलचस्पी इस सिस्टम में इसलिए है क्योंकि यह आधुनिक खतरों जैसे ड्रोन स्वार्म और क्रूज मिसाइल हमलों से निपटने में बेहद प्रभावी है.

यूएई की सुरक्षा जरूरतें और क्षेत्रीय चुनौतियां

संयुक्त अरब अमीरात हाल के वर्षों में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है. पश्चिम एशिया में हाल के संघर्षों, ईरान के साथ तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए यूएई नए डिफेंस सिस्टम हासिल करना चाहता है. 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है. यूएई इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है. ब्रह्मोस जैसी लंबी रेंज वाली मिसाइल और आकाशतीर जैसा कमांड सिस्टम यूएई को मजबूत एयर और कोस्टल डिफेंस देने में सक्षम होंगे. खाड़ी देशों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच UAE भारत जैसे विश्वसनीय पार्टनर के साथ सहयोग बढ़ा रहा है.

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भारत का रक्षा निर्यात: आत्मनिर्भरता से वैश्विक बाजार तक

भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा निर्यात को बढ़ावा दे रहा है. 2014 में जहां रक्षा निर्यात मात्र 800-900 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह 20,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है. ब्रह्मोस, आकाश, तेजस, अकाश मिसाइल आदि सिस्टम अब विदेशी बाजार में दिलचस्पी पैदा कर रहे हैं.

यूएई के अलावा आर्मेनिया, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, मिस्र, सऊदी अरब, कतर, ओमान, ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना और वेनेजुएला जैसे देश भी ब्रह्मोस में रुचि दिखा चुके हैं. यह भारत की आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता दर्शाता है. स्वदेशी प्रणालियां सस्ती, विश्वसनीय और जरूरत के अनुसार कस्टमाइज की जा सकती हैं.

रूस की मंजूरी और चुनौतियां

ब्रह्मोस निर्यात के लिए सबसे बड़ी चुनौती रूस की सहमति है. क्योंकि मिसाइल का विकास दोनों देशों के संयुक्त प्रयास से हुआ है, इसलिए कोई भी निर्यात तीनों पक्षों (भारत, रूस और खरीदार) की सहमति से ही संभव है. 
भारत और रूस के बीच अच्छे संबंध हैं, इसलिए मंजूरी मिलने की संभावना ज्यादा है. लेकिन भू-राजनीतिक परिस्थितियां (जैसे यूक्रेन संकट) इसका असर डाल सकती हैं. आकाशतीर पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण इसमें ऐसी कोई बाधा नहीं है.

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भारत-यूएई रक्षा सौदा सिर्फ व्यापार नहीं है. यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करेगा. UAE भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा साझेदार है. रक्षा सहयोग बढ़ने से हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में सुरक्षा सहयोग भी मजबूत होगा.

भारत के लिए यह खाड़ी क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने का मौका भी है. मजबूत रक्षा निर्यात से भारतीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार बढ़ेगा और तकनीकी क्षमता का विकास होगा.

भारत और यूएई के बीच ब्रह्मोस और आकाशतीर पर चल रही चर्चा भारत के रक्षा निर्यात और वैश्विक साझेदारियों के नए दौर की शुरुआत हो सकती है. अगर डील सफल हुई तो यह न सिर्फ दोनों देशों की सुरक्षा मजबूत करेगी बल्कि मेड इन इंडिया हथियारों की विश्वसनीयता को भी दुनिया के सामने स्थापित करेगी.  
 

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