भारत ने उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा सुविधा केंद्र पर पूरी तरह स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल 'शेर' का पहला सफल परीक्षण किया है. यह राइफल इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) द्वारा बनाई गई है. यह कंपनी 2019 में भारत और रूस के संयुक्त उद्यम के रूप में स्थापित हुई थी, जिसका मकसद भारत में एके-203 राइफलों का निर्माण करना था.
IRRPL के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर मेजर जनरल एस के शर्मा के अनुसार, पहला 100 प्रतिशत स्वदेशी प्रोटोटाइप सफलतापूर्वक फायर किया गया, जिसमें बर्स्ट मोड भी शामिल था. प्रारंभिक नतीजे उत्साहजनक बताए गए हैं. इस उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रोटोटाइप में इस्तेमाल हर घटक और कच्चा माल भारतीय उद्योग से लिया गया है.
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यह सिर्फ कुछ हिस्सों का स्थानीयकरण नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वदेशी कॉन्फ़िगरेशन है. पहले यह कार्यक्रम लाइसेंस उत्पादन के रूप में चल रहा था, लेकिन अब यह पूर्ण घरेलू निर्माण की दिशा में आगे बढ़ चुका है. इससे भारतीय औद्योगिक आधार का विस्तार हुआ है और आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम हुई है.
सेना के ट्रायल सितंबर में
IRRPL अब और 100 प्रतिशत स्वदेशी प्रोटोटाइप बनाने पर काम कर रहा है. इन्हें सितंबर 2026 में भारतीय सेना को ट्रायल के लिए सौंपने की योजना है. सेना का मूल्यांकन व्यापक रूप से स्वदेशी कॉन्फ़िगरेशन को अपनाने से पहले का महत्वपूर्ण कदम होगा.
कंपनी वर्तमान में सशस्त्र बलों को 6,01,427 राइफलें आपूर्ति करने के अनुबंध पर काम कर रही है. इस करीब 5,200 करोड़ रुपये के अनुबंध की मूल समयसीमा अक्टूबर 2032 थी, लेकिन कंपनी दिसंबर 2030 तक कार्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य रख रही है, जो अनुबंध से लगभग 22 महीने पहले है.
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IRRPL उत्पादन दर को एक राइफल हर 100 सेकंड में बनाने के स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रहा है. क्षमता और विनिर्माण प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाकर वार्षिक उत्पादन को काफी बढ़ाने की योजना है, ताकि सेना के आदेश को समय से पहले पूरा किया जा सके.
‘शेर’ की यह उपलब्धि सिर्फ एक राइफल तक सीमित नहीं है. यह दिखाती है कि भारत एक वैश्विक रूप से स्थापित असॉल्ट राइफल डिजाइन के इर्द-गिर्द पूरा घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर सकता है.
इससे रक्षा उत्पादन में आयात निर्भरता घटती है और आत्मानिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलती है. लंबे समय में यह भारतीय सेना की जरूरतों को तेजी से पूरा करने के साथ-साथ रक्षा निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ा सकता है. कुल मिलाकर यह भारत की रक्षा निर्माण क्षमता में एक महत्वपूर्ण प्रगति है.
शिवानी शर्मा