लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में जिला जज कोर्ट ने सोमवार को आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी की सजा का ऐलान कर दिया. कोर्ट ने उसे गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल की कैद की सजा सुनाई है. प्रशांत चौधरी को भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 304(2) के तहत दोषी ठहराया गया था. इस मामले में वह करीब आठ साल पहले ही जेल में बिता चुका है.
विवेक तिवारी हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस के दो सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप सिंह को आरोपी बनाया गया था. दोनों के खिलाफ लखनऊ की अदालत में मुकदमा चला. कोर्ट ने अपने फैसले में प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना, जबकि दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को बरी कर दिया. संदीप कुमार के बरी होने के साथ उनके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई.
यह मामला 28 सितंबर 2018 का है, जब लखनऊ के गोमती नगर विस्तार इलाके में एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी. घटना के वक्त विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी सना खान के साथ वापस जा रहे थे. एफआईआर के मुताबिक, इसी दौरान गोमती नगर विस्तार थाने में नाइट पेट्रोलिंग कर रहे पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोका और गोली चल गई.
घटना के बाद मामले ने काफी चर्चा बटोरी थी और दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया था. मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. जांच और उसके बाद चली न्यायिक प्रक्रिया में करीब आठ साल का समय लगा. इस दौरान प्रशांत चौधरी जेल में भी रहा और अब अदालत ने उसे गैर इरादतन हत्या के मामले में 10 साल की सजा सुनाई है.
कोर्ट ने इससे पहले प्रशांत चौधरी को IPC की धारा 304(2) के तहत दोषी करार दिया था. इसी के आधार पर सोमवार को उसकी सजा की अवधि तय की गई. वहीं, दूसरे आरोपी संदीप कुमार को अदालत पहले ही आरोपों से बरी कर चुकी है. इस तरह करीब आठ साल पहले शुरू हुआ यह चर्चित मामला अब प्रशांत चौधरी को सुनाई गई सजा के साथ एक अहम पड़ाव पर पहुंचा है.
संतोष शर्मा