लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU में 26-27 सितंबर की रात से शुरू हुआ घटनाक्रम कई सवाल छोड़ गया. सोशल मीडिया पर एक छात्रा के साथ कथित रेप की खबर तेजी से फैलने लगी. दावा किया गया कि गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 में किसी बाहरी व्यक्ति ने वारदात को अंजाम दिया है. किसी ने आरोपी को प्लंबर बताया तो किसी ने इलेक्ट्रिशियन. इसी बीच यह अफवाह भी फैल गई कि पीड़ित छात्रा ने आत्महत्या कर ली है और उसे घर भेज दिया गया है. यूनिवर्सिटी की तरफ से शुरुआती दौर में साफ और समय पर जानकारी सामने नहीं आने से अफवाहों ने और जोर पकड़ लिया.
इसके बाद बड़ी संख्या में छात्राएं और छात्र गर्ल्स हॉस्टल के पास जुटने लगे और देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई. प्रदर्शन के दौरान खिड़कियों के शीशे तोड़े गए, फूलों के गमले और बैरिकेड्स क्षतिग्रस्त किए गए और कुर्सियां पलट दी गईं. कैंपस के मॉल के अंदर मौजूद कुछ दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की बात सामने आई. कुछ जगहों पर सामान और इमारत के हिस्सों में आग भी लगाई गई. इसी दौरान एक छात्र को कैंपस में रखे पुराने MiG-23 विमान के ऊपर चढ़ते हुए देखा गया. इस घटना और कैंपस के हंगामे के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए.
प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसके बाद जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे यानी NH-44 को भी जाम कर दिया. इस वजह से दिल्ली-अमृतसर के बीच आने-जाने वाला यह अहम रास्ता 18 घंटे से ज्यादा समय तक प्रभावित रहा. सुबह तक प्रदर्शनकारियों की संख्या काफी ज्यादा थी, हालांकि दोपहर तक यह संख्या घटकर करीब 300 रह गई थी. पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत शुरू की, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांगें लगातार बदलती रहीं. पहले FIR दर्ज करने की मांग हुई, फिर SIT बनाने और आरोपी की गिरफ्तारी की. बाद में चांसलर रश्मि मित्तल से मुलाकात की मांग सामने आई.
यूनिवर्सिटी लगातार किसी ऐसी घटना से इनकार करती रही, जिससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ता गया. पुलिस ने कम से कम पांच छात्रों को अंदर ले जाकर CCTV फुटेज दिखाया. इसके बाद कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ. छात्र नारे लगाते रहे और हाथों में पोस्टर लेकर कार्रवाई की मांग करते रहे. आखिरकार सतनामपुरा पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 64 के तहत FIR दर्ज की गई. पुलिस ने मामले की जांच के लिए SIT भी गठित कर दी.
FIR और SIT के बावजूद स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई और पुलिस के साथ फिर झड़प हो गई. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और कम से कम एक पुलिस जीप को आग के हवाले कर दिया. कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया. इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस के मुताबिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कम से कम बल का इस्तेमाल किया गया. बाद में जालंधर और होशियारपुर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और जरूरत पड़ने पर तरन तारन तथा गुरदासपुर जैसे सीमावर्ती जिलों से भी फोर्स मंगाई गई.
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने कहा कि 26-27 सितंबर की रात छात्रों ने एक घटना की शिकायत की थी और इसके बाद कैंपस में नुकसान हुआ. उनके मुताबिक एक गेट के हिस्से में भी आग लगाई गई थी. पुलिस ने छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोनों से बातचीत की, FIR दर्ज की और SIT बनाई. DGP ने कहा कि पुलिस ने अधिकतम संयम बरता क्योंकि छात्र उनके लिए अपने बच्चों की तरह हैं.
अगले दिन पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसके बाद भी न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. साथ ही उन्होंने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की.
यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में हंगामे के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया. LPU ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों और करीब 50 देशों से छात्र यहां पढ़ते हैं और उनकी सुरक्षा, सम्मान और कल्याण उसकी प्राथमिकता है. यूनिवर्सिटी के मुताबिक कुछ असामाजिक तत्वों ने छात्रों की भावनाओं का फायदा उठाकर कैंपस में अशांति और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.
LPU ने कहा कि बाहर से आए लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि बिहार अपने घर लौट रहे दो छात्रों डेनिश और सौम्या ने कहा कि छात्र एक वास्तविक मुद्दे के लिए खड़े हुए थे, लेकिन बाद में आंदोलन को उपद्रवी तत्वों ने अपने कब्जे में ले लिया. उनका कहना था कि जिस सवाल का जवाब छात्र मांग रहे थे, उस पर अभी भी पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है.
घटनाक्रम को समझने के लिए छात्रों के बीच मौजूद पुराने असंतोष को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इंटेलिजेंस ग्रिड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे अचानक पैदा हुई स्थिति के बजाय लंबे समय से जमा होती नाराजगी का नतीजा बताया. उनके मुताबिक यौन उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े पहले के कुछ कथित मामलों ने कई छात्रों को यह महसूस कराया कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है.
एक छात्रा ने आजतक/इंडिया टुडे से कहा कि निजी यूनिवर्सिटी में शिकायतों को दबा दिया जाता है और बहुत कुछ सामने नहीं आने दिया जाता. हालांकि गर्ल्स हॉस्टल के कमरा नंबर 504 में रहने वाली तीन छात्राओं ने इंडिया टुडे को बताया कि उनके कमरे में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी. उनके मुताबिक पुलिस रविवार सुबह वहां पहुंची, उनके बयान दर्ज किए और चली गई.
LPU का विशाल कैंपस और छात्रों की बड़ी संख्या भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कैंपस में करीब 40 हजार छात्र हैं और लगभग 25 हजार छात्र करीब दो दर्जन हॉस्टलों में रहते हैं. इनमें प्रत्येक हॉस्टल में करीब 900 से 1,000 छात्र रहते हैं. अधिकारियों के अनुसार करीब 2,000 प्रदर्शनकारी धरने में शामिल थे और बस, ट्रक तथा कार समेत बड़ी संख्या में वाहन 18 घंटे से ज्यादा समय तक फंसे रहे.
एक प्रोफेसर ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या के मुकाबले कैंपस में करीब 100 गार्ड ही मौजूद थे. एक अन्य प्रोफेसर ने प्रवेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि विभागों में क्षमता से ज्यादा दाखिले किए जा रहे हैं.
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही टीम कुछ ही मिनटों में कैंपस पहुंच गई थी, लेकिन उस समय यूनिवर्सिटी का प्रबंधन मौके पर मौजूद नहीं था. VC और डीन फॉर स्टूडेंट वैलफेयर अगले दिन सुबह पहुंचे. कुछ शिक्षकों का कहना था कि उन्हें अपने छात्रों की पहचान कर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन मौके पर ऐसा पर्याप्त रूप से नहीं हुआ.
वहीं, एक प्रोफेसर ने कहा कि छात्र उस समय बेकाबू भीड़ में बदल चुके थे और उन्हें संभालना आसान नहीं था. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच भरोसे की कमी ने हालात सामान्य करने की कोशिश को और मुश्किल बना दिया.
हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दीं और मिड-टर्म परीक्षाएं भी टाल दीं. अधिकारियों के मुताबिक कैंपस की संपत्ति को कई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. तीन पुलिस वाहनों को आग के हवाले किए जाने और कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई है. रात में पुलिस ने फ्लैग मार्च किया, जिसके बाद छात्र अपने हॉस्टलों में लौट गए और स्थिति पर नियंत्रण पाया गया.
NH-44 को दोबारा खोल दिया गया है, जबकि मामले की जांच जारी है। हिंसा और सरकारी या यूनिवर्सिटी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात कही गई है.
पंजाब की निजी यूनिवर्सिटियों में अफवाहों के तेजी से फैलने का यह मामला अकेला नहीं है. हाल के दिनों में गर्ल्स हॉस्टल और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ी अपुष्ट खबरें WhatsApp ग्रुप, इंस्टाग्राम रील्स और कैंपस चैट के जरिए कुछ ही मिनटों में फैलती देखी गई हैं. सितंबर 2026 में राजपुरा के पास चितकारा यूनिवर्सिटी में भी हॉस्टल को लेकर 'भूत', लड़कियों के गायब होने या मौत और चीखों से जुड़े दावे सोशल मीडिया पर फैले थे.
पटियाला पुलिस ने कहा था कि कोई लड़की लापता नहीं थी. इससे पहले सितंबर 2022 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में कथित 'लीक वीडियो' को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था. उस मामले में भी सोशल मीडिया पर छात्राओं के आत्महत्या करने या गायब होने जैसी अफवाहें फैली थीं, जिन्हें पुलिस और यूनिवर्सिटी ने खारिज किया था.
LPU की घटना ने एक बार फिर निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद, पारदर्शिता और भरोसे को लेकर सवाल खड़े किए हैं. सोशल मीडिया के दौर में किसी भी अपुष्ट दावे को कैंपस के हजारों छात्रों तक पहुंचने में कुछ ही समय लगता है. ऐसे में शुरुआती घंटों में आधिकारिक और स्पष्ट जानकारी की कमी स्थिति को और जटिल बना सकती है.
दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासन के लिए हजारों छात्रों के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है. LPU में अब FIR, SIT जांच, CCTV और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है.
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने DGP को मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया. राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल में विपक्ष को राज्य सरकार और आम आदमी पार्टी पर सवाल उठाने का एक और मुद्दा मिला है.
हालांकि, इस पूरे मामले में सामने आए दावों, अफवाहों और आरोपों को जांच के निष्कर्षों से अलग रखना जरूरी है. फिलहाल पुलिस की SIT जांच यह साफ करने की कोशिश कर रही है कि शुरुआती दावा क्या था, वास्तविक घटना क्या हुई और हिंसा में कौन-कौन लोग शामिल थे.
कमलजीत संधू