प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशभर में फैले साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. ED के पणजी जोनल ऑफिस ने मुंबई के वकील रशेश भारतकुमार उपाध्याय उर्फ रशेश शाह को 24 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया. आरोपी पर साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के उन बैंक खातों को दोबारा चालू कराने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है, जिन्हें जांच एजेंसियों ने फ्रीज कर दिया था.
ED के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर रिश्वत देकर इन खातों को अनफ्रीज कराने का काम करता था. इस मामले में यह सातवीं गिरफ्तारी है. ED के अफसरों, रशेश उपाध्याय मुंबई से दिल्ली जाने वाली सुबह की कनेक्टिंग फ्लाइट से रवाना होने की कोशिश कर रहा था. उसके पास वापसी की कोई टिकट बुकिंग नहीं थी. इसी दौरान मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बोर्डिंग गेट के पास उसे रोक लिया गया.
इस कार्रवाई में मुंबई कस्टम्स और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने समय पर सहयोग किया. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को गोवा के उत्तरी गोवा स्थित विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 29 अक्टूबर 2026 तक ED की हिरासत में भेज दिया गया.
ED ने इस मामले में जांच गोवा पुलिस की ओर से दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी. यह मामला डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई साइबर ठगी से जुड़ा है. आरोप है कि ठगों ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी बनकर गोवा की एक महिला और उसके पति को निशाना बनाया.
आरोपियों ने दोनों को लगातार वीडियो निगरानी में रखा और डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक फर्जी आदेश का इस्तेमाल किया. इसके बाद दंपति पर दबाव बनाकर करीब 2.6 करोड़ रुपये ऐसे बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए, जिन्हें कथित तौर पर 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स' बताया गया था.
ED की जांच में सामने आया कि ठगी से हासिल रकम को 400 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया गया. इसके बाद रकम ऐसे नेटवर्क तक पहुंची, जिसमें कमोडिटी, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा से जुड़ी कंपनियां शामिल थीं.
ED के मुताबिक, इन कंपनियों को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सय्यद कथित तौर पर डमी डायरेक्टरों के जरिए नियंत्रित करते थे. जांच एजेंसी ने इस नेटवर्क के बैंकिंग लेनदेन का कुल आंकड़ा करीब 28,000 करोड़ रुपये बताया है. इसके अलावा, इस नेटवर्क में करीब 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने की बात भी सामने आई है.
जांच के दौरान नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों का संबंध देशभर में साइबर ठगी की कई शिकायतों और आपराधिक मामलों से सामने आया. ED के मुताबिक, इन खातों का जिक्र 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 300 से ज्यादा पीड़ितों की शिकायतों और 160 से अधिक FIR में मिला है.
इन मामलों में कुल 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान की सूचना है. जांच एजेंसी के मुताबिक, यह नेटवर्क अलग-अलग बैंक खातों और कंपनियों के जरिए रकम का लेनदेन करता था. अब ED इस पूरे नेटवर्क की भूमिका और साइबर ठगी से हासिल रकम के प्रवाह की जांच कर रही है.
ED के मुताबिक, रशेश उपाध्याय इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी था. जब साइबर ठगी की शिकायतों के बाद जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर देती थीं, तब आरोपी कथित तौर पर उन्हें दोबारा चालू कराने की व्यवस्था करता था. इसके लिए वह संबंधित एजेंसियों के कुछ संदिग्ध अधिकारियों को नकद रिश्वत देने का इंतजाम करता था.
ED का आरोप है कि रिश्वत की रकम अंगड़ियों के जरिए पहुंचाई जाती थी. आरोपी कथित तौर पर यह तय करता था कि कितनी रकम देनी है, पैसा कहां से इकट्ठा करना है और उसे आगे किस तरह पहुंचाना है. ED के अनुसार, पूछताछ के दौरान रशेश उपाध्याय ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने अलग-अलग एजेंटों के लिए करीब 100 बैंक खातों को अनफ्रीज कराने की व्यवस्था की थी.
इनमें एक मामले में 60 लाख रुपये से ज्यादा के भुगतान का भी जिक्र है. जांच एजेंसी अब इस कथित रिश्वतखोरी में शामिल लोगों, रकम के लेनदेन और बैंक खातों को दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया की जांच कर रही है. इस मामले में अब तक सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. ED की जांच का मुख्य फोकस साइबर ठगी से हासिल रकम को ठिकाने लगाने और बैंकिंग व्यवस्था के कथित दुरुपयोग में शामिल पूरे नेटवर्क का पता लगाना है.
दिव्येश सिंह