लॉकडाउन: टेस्टिंग, वेंटिलेटर और टीका...1 साल में कोरोना से लड़ने में कई गुना ताकतवर हुआ इंडिया

25 मार्च 2020 को पीएम मोदी ने जब 21 दिनों के नेशनल लॉकडाउन की घोषणा की तो उनको पता होगा कि देश में हेल्थ के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के अभाव में कोरोना जैसी महामारी से लड़ाई मुश्किल ही नहीं असंभव है. याद करिए तबतक कोरोना के सामने दुनिया की महाशक्तियां सरेंडर कर चुकी थी.

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लॉकडाउन में भारत ने स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत की है. (फोटो- पीटीआई) लॉकडाउन में भारत ने स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत की है. (फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST
  • लॉकडाउन में भारत ने कोरोना से लड़ने की क्षमता का किया विस्तार
  • एक साल पहले कोरोना वैक्सीन सपने जैसी थी
  • 25 मार्च 2020 को भारत के पास 37,618 आइसोलेडेट बेड थे

लॉकडाउन को लागू हुए एक साल गुजर गया. आंकड़ों के आईने में देखें तो कोरोना से जंग में भारत ने लंबी दूरी तय की है. आज भारत के पास वैक्सीन है, टेस्टिंग किट है, पीपीई है, वेंटिलेटर है, अस्पतालों की तैयारी है, सरकार की तैयारी है, लेकिन बावजूद इसके कोरोना वायरस पूरी ताकत के साथ मौजूद है. आज भी हम ये कहने की हालत में नहीं हैं कि हमने कोरोना पर काबू पा लिया है. हालांकि ये दावा करने की हालत में दुनिया के विकसित देश भी नहीं हैं. दरअसल कोरोना 'म्यूटेशन', 'वैरिएशन' जैसे जैविक विशेषताओं से लैस ये बीमारी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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25 मार्च 2020 को देश में 90 नए केस सामने आए थे, आज उससे हजारों गुणा ज्यादा 50 हजार से ज्यादा नए केस देशभर में आए हैं. 25 मार्च 2020 को देशभर में कुल 681 केस थे, आज देशभर में कुल केसों की संख्या 1 करोड़ 17 लाख से ज्यादा हो गई है. 

25 मार्च 2020 को देशभर में कोविड से कुल 12 लोगों थी मृत्यु हुई थी. आज इस बीमारी ने देशभर में 1 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की बलि ले ली है. इनमें से कई डॉक्टर, नर्स, राजनेता, युवा और मजदूर शामिल हैं. 

एक साल पहले लॉकडाउन के दौरान वैक्सीन एक सपना था, एक आस थी, आज भारत 45 साल से ऊपर सभी का टीकाकरण करने को तैयार है. एक साल पहले कोरोना से लड़ाई को लेकर भारत में डर और खौफ था. आज कोरोना के खिलाफ लड़ाई की राह भारत दुनिया को दिखा रहा है. एक साल पहले टेस्ट और वैक्सीन कल्पना थी, आज कोरोना की टेस्टिंग और टीकाकरण में भारत आत्मनिर्भर है. 

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25 मार्च 2020 को पीएम मोदी ने जब 21 दिनों के नेशनल लॉकडाउन की घोषणा की तो वह बखूबी जानते थे कि देश में हेल्थ के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के अभाव में कोरोना जैसी महामारी से लड़ाई मुश्किल ही नहीं असंभव है. याद करिए तबतक कोरोना के सामने दुनिया की महाशक्तियां सरेंडर कर चुकी थीं. अमेरिका में हजारों लोग रोज मर रहे थे. ब्रिटेन की हालत बुरी थी. इटली और स्पेन में तो मरीजों के लिए जगह नहीं बची थी. इन हालात में भारत को इस बीमारी से लड़ने के लिए अपना बुनियादी ढांचा तैयार करना था. 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 25 मार्च 2020 को देश में कोविड के लिए 37,618 आइसोलेटेड बेड, 9,512 ICU बेड और 8,432 वेंटिलेटर थे. तब देश में सिर्फ 3.34 लाख पीपीई मौजूद थी तो हॉस्पिटल में 11.95 लाख मास्क मौजूद थे. 

खस्ताहाल स्वास्थ्य सुविधा को देखते हुए लॉकडाउन एक बड़ा हथियार साबित हुआ, इस दौरान कोरोना में टेस्टिंग लैब का नेटवर्क खड़ा हुआ. देश ने वेंटिलेटर से लेकर पीपीई किट बनाने में महारत हासिल की. सप्लाई चेन विकसित हुई. वहीं कुछ प्रयोगशालाएं और वैज्ञानिक गुमनामी में बिना रुके वैक्सीन विकसित करने में लगे रहे. लॉकडाउन से कोरोना की रफ्तार तो कम हुई हई ही, इस अवधि के दौरान देश ने इस महामारी से लड़ने में आत्मनिर्भरता हासिल की.

(ब्यूरो रिपोर्ट आज तक)

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