धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ गहने की डिजाइन और कीमत देखकर फैसला न करें. यह जानना भी जरूरी है कि आप जो सोना खरीद रहे हैं, उसकी शुद्धता कितनी है. बाजार में सोने के गहनों में मिलावट या दूसरी धातुओं की अधिक मात्रा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में खरीदारी से पहले हॉलमार्क और HUID कोड की जांच करना बेहद जरूरी है.
सोने की असली शुद्धता का पता लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका लैब या मान्यता प्राप्त सेंटर में जांच कराना है. हालांकि, कुछ आसान घरेलू तरीके ऐसे हैं, जिनसे गहने में संभावित गड़बड़ी का शुरुआती संकेत मिल सकता है. ध्यान रहे कि ये तरीके सोने की शुद्धता की पक्की पुष्टि नहीं करते. आइए जानते हैं सोने की पहचान के पांच तरीके और एक्सपर्ट किस तरह इसकी जांच करते हैं.
1. सबसे पहले BIS हॉलमार्क और HUID कोड देखें
सोना खरीदते समय सबसे जरूरी है कि गहने पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का हॉलमार्क हो. हॉलमार्क वाले गहने पर आमतौर पर तीन अहम निशान होते हैं:
HUID यानी Hallmark Unique Identification कोड हर हॉलमार्क वाले गहने की अलग पहचान है. ग्राहक BIS Care मोबाइल ऐप के जरिए इस कोड को डालकर गहने से जुड़ी जानकारी और घोषित शुद्धता का मिलान कर सकते हैं. इससे यह जांचने में मदद मिलती है कि गहने पर दी गई हॉलमार्क की जानकारी सही है या नहीं.
अगर आपके पास पहले से खरीदा हुआ गहना है और उसकी शुद्धता पर शक है, तो BIS से मान्यता प्राप्त असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर में भी जांच कराई जा सकती है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस तरह की जांच का शुल्क 236 रुपये बताया गया है. हालांकि, सेंटर से मौजूदा फीस की पुष्टि जरूर कर लें.
2. चुंबक से करें सोने की शुरुआती जांच
सोना चुंबक से नहीं चिपकता. ऐसे में एक मजबूत चुंबक को गहने के पास लाकर देख सकते हैं कि वह उसकी तरफ खिंचता है या नहीं. अगर गहना चुंबक से तेजी से चिपकता है, तो उसमें लोहा या निकेल जैसी चुंबकीय धातु होने की आशंका हो सकती है. लेकिन इस टेस्ट की भी एक सीमा है. कई दूसरी धातुएं चुंबक से नहीं चिपकतीं. इसलिए अगर गहना चुंबक की तरफ नहीं खिंचता, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह असली सोना ही है.
3. पानी में डालकर देखें सोना डूबता है या नहीं
सोने का घनत्व कई आम धातुओं से ज्यादा होता है. इसी वजह से ठोस सोने का गहना पानी में डालने पर डूब जाता है. इसके लिए एक पारदर्शी गिलास में पानी भरें और गहने को सावधानी से उसमें डालें. अगर गहना पानी में तैरता है, तो उसके खोखले होने या किसी दूसरी सामग्री से बने होने की आशंका हो सकती है. हालांकि, यह टेस्ट भी सोने की शुद्धता नहीं बताता. सोने में दूसरी धातुओं की मिलावट और गहने की बनावट से इसका नतीजा प्रभावित हो सकता है.
4. सिरके से जांचने का तरीका
सोने पर सामान्य सिरके का आमतौर पर कोई खास असर नहीं होता. इसलिए इस तरीके में गहने पर सिरके की कुछ बूंदें डालकर रंग में बदलाव देखा जाता है. अगर रंग बदलता है, तो यह किसी दूसरी प्रतिक्रियाशील धातु या ऊपर चढ़ी किसी परत का संकेत हो सकता है. लेकिन इसे भरोसेमंद टेस्ट नहीं माना जा सकता. सोने की परत चढ़े गहने पर भी तुरंत कोई बदलाव नजर नहीं आए, ऐसा हो सकता है. इसके अलावा सिरका या दूसरे घरेलू केमिकल गहने की पॉलिश, रत्न या दूसरी सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए कीमती गहनों पर यह प्रयोग करने से बचें.
5. सिरेमिक टेस्ट से भी मिल सकता है शुरुआती संकेत
इस तरीके में बिना चमक वाली सिरेमिक सतह पर गहने को हल्के से रगड़ा जाता है. दावा किया जाता है कि असली सोना सतह पर सुनहरी लकीर छोड़ता है, जबकि कुछ दूसरी धातुएं गहरी या धूसर लकीर छोड़ सकती हैं. हालांकि, इस टेस्ट में गहने पर खरोंच आ सकती है. इससे उसकी पॉलिश और फिनिश खराब हो सकती है. इसलिए कीमती गहनों, खासकर रत्न या हीरे लगे आभूषणों पर इसे बिल्कुल न आजमाएं.
याद रखें: चुंबक, पानी, सिरका और सिरेमिक जैसे घरेलू टेस्ट सोने की शुद्धता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं. ये सिर्फ संभावित गड़बड़ी का शुरुआती संकेत दे सकते हैं.
एक्सपर्ट कैसे करते हैं सोने की शुद्धता की जांच?
घरेलू तरीके केवल शुरुआती संकेत देते हैं. सोने में कितनी मात्रा में शुद्ध धातु है, इसका सही पता लगाने के लिए जूलर्स और मान्यता प्राप्त जांच केंद्र खास मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं.
एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) टेस्ट: इस जांच में एक्स-रे की मदद से सोने और उसमें मौजूद दूसरी धातुओं की मात्रा का पता लगाया जाता है. इसमें गहने को गलाने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, यह जांच मुख्य रूप से सतह की संरचना बताती है, इसलिए अंदर की धातु में मौजूद अंतर हमेशा सामने नहीं आ पाता.
एसिड और टचस्टोन टेस्ट: इसमें गहने को एक खास पत्थर पर रगड़कर उसकी लकीर पर अलग-अलग तरह के एसिड का इस्तेमाल किया जाता है. एसिड के साथ होने वाली प्रतिक्रिया से सोने के कैरेट का अनुमान लगाया जाता है.
फायर असे टेस्ट: इसे सोने की मात्रा पता करने का बेहद सटीक तरीका माना जाता है. इसमें गहने का एक छोटा नमूना लेकर उसे प्रोसेस किया जाता है और दूसरी धातुओं को अलग करने के बाद बचे सोने का वजन किया जाता है. यह जांच सटीक होती है, लेकिन इसमें गहने का नमूना नष्ट हो जाता है.
24, 22, 18 और 14 कैरेट सोने में क्या है अंतर?
सोने की शुद्धता कैरेट में मापी जाती है. कैरेट जितना ज्यादा होगा, सोने में शुद्ध धातु की मात्रा उतनी ही अधिक होगी. बाजार में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से अलग कैरेट के गहने और सोने के उत्पाद मिलते हैं. 24 कैरेट सोने की शुद्धता (999) 99.9% होती है. सोने के सिक्के और बार 22 कैरेट के होते हैं, जिसकी शुद्धता (916) 91.6% होती है. पारंपरिक सोने के गहने 18 कैरेट गोल्ड से बनते हैं, जिसकी शुद्धता 75% (750) होती है. हीरे और रत्न जड़े सोने के गहने 14 कैरेट के होते हैं, जिसकी शुद्धता (585) 58.5% होती है.
24 कैरेट सोना सबसे ज्यादा शुद्ध होता है, जबकि गहने बनाने के लिए अक्सर दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं ताकि उन्हें मजबूती और मनचाही बनावट दी जा सके. इसलिए गहने खरीदते समय उसके कैरेट और इस्तेमाल, दोनों को ध्यान में रखना चाहिए. सोने का गहना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क और छह अंकों वाला HUID कोड देखें. BIS Care ऐप पर HUID कोड की जानकारी जरूर जांचें. भरोसेमंद ज्वैलर से ही खरीदारी करें. गहने का सही बिल लें और उसे संभालकर रखें. बिल में वजन, कैरेट और कीमत जैसी जानकारी होनी चाहिए. अगर पहले से खरीदे गए गहने की शुद्धता पर शक है, तो घरेलू टेस्ट के बजाय मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग सेंटर में जांच कराएं.
आजतक बिजनेस डेस्क