मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (MAHSR Project) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. देश की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना में अब सिर्फ ट्रैक और स्टेशन ही नहीं, बल्कि ट्रेन से जुड़े काम में भी घरेलू कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है. इसी कड़ी में सरकारी कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को एक ऐसा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जो उसके रेल कारोबार के लिए कई साल तक काम और कमाई का रास्ता खोल सकता है. यह डील हाई स्पीड ट्रेन की सप्लाई से लेकर लंबे समय तक उसके मेंटेनेंस से जुड़ी है.
BEML को मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर के लिए ₹5,400 करोड़ से ज्यादा का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. यह ऑर्डर नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिया है. कॉन्ट्रैक्ट में हाई स्पीड रोलिंग स्टॉक की सप्लाई के साथ लंबे समय तक मेंटेनेंस का काम भी शामिल है. यानी BEML को सिर्फ ट्रेन बनाने और सप्लाई करने तक सीमित काम नहीं मिला है, बल्कि आगे कई साल तक मेंटेनेंस से जुड़े काम भी कंपनी के पास रहेंगे. इससे कंपनी को लंबे समय की रेवेन्यू विजिबिलिटी मिलने की उम्मीद है.
508 KM लंबा है बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर करीब 508 किलोमीटर लंबा है. NHSRCL इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है. परियोजना की शुरुआती योजना जापान की शिकांनसेन (Shinkansen) टेक्नोलॉजी पर आधारित थी. हालांकि, लागत और भारतीय जरूरतों के मुताबिक अलग स्पेसिफिकेशन की जरूरत को देखते हुए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ा. मेक इन इंडिया (Make in India) के तहत BEML और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने स्टैंडर्ड-गेज हाई स्पीड रोलिंग स्टॉक डेवलप करने पर काम किया है. इसका मकसद भारत में ही हाई स्पीड ट्रेन की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी तैयार करना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है.
BEML की ऑर्डर बुक में बड़ा इजाफा
BEML की बकाया ऑर्डर बुक जुलाई 2026 तक करीब ₹16,285 करोड़ थी. ऐसे में ₹5,400 करोड़ से ज्यादा का नया कॉन्ट्रैक्ट कंपनी की ऑर्डर बुक के लिए काफी अहम है. कंपनी की ऑर्डर बुक में Rail & Metro वर्टिकल की बड़ी हिस्सेदारी पहले से है. नया हाई स्पीड रेल कॉन्ट्रैक्ट इस बैकलॉग को और मजबूत करता है. खास बात यह है कि इसमें सप्लाई के साथ लॉन्ग टर्म मेंटेनेंस भी शामिल है, जिससे आने वाले वर्षों में काम का प्रवाह बना रह सकता है.
280 Kmph की स्पीड वाली स्वदेशी ट्रेन
BEML और ICF मिलकर 'B28' कोडनेम की हाई स्पीड ट्रेन डेवलप करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. इस ट्रेन को 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए बनाया जा रहा है. स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन बनाने का मकसद भारत की रोलिंग स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को मजबूत करना है. इससे विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने, लागत कम करने और भविष्य में हाई स्पीड रेल से जुड़े बड़े सप्लाई व मेंटेनेंस ऑर्डर हासिल करने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में घरेलू खरीद पर जोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में बड़ा इजाफा होने के बाद परियोजना में किफायती घरेलू खरीद और स्थानीय निर्माण पर फोकस बढ़ा है. ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए हाई स्पीड रेल से जुड़े बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के मौके भी बढ़े हैं. BEML को मिला मौजूदा ऑर्डर इसी बदलाव के लिहाज से अहम है. कंपनी अब हाई स्पीड रेल के साथ-साथ रेलवे के दूसरे सेगमेंट में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है.
वंदे भारत स्लीपर का भी मिला ऑर्डर
BEML को हाल में रेलवे से एक और बड़ा ऑर्डर मिला था. सितंबर की शुरुआत में ICF ने कंपनी को करीब ₹180.60 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया था. यह वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण और सप्लाई से जुड़ा था. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के रेल कारोबार में लगातार नए ऑर्डर जुड़ रहे हैं. हाई स्पीड ट्रेन, वंदे भारत और दूसरे रेल प्रोजेक्ट्स कंपनी के Rail & Metro कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
कंपनी की फाइनेंशियल हालत कैसी है?
BEML के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में कंपनी का रेवेन्यू 29.3 फीसदी बढ़कर ₹820 करोड़ हो गया. इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस घटकर ₹27.01 करोड़ रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह ₹64.11 करोड़ था. यानी कंपनी की कमाई बढ़ने के साथ घाटे में भी कमी आई है.
आजतक बिजनेस डेस्क