वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया गया है. जिसे लेकर कई रिपोर्ट्स में दावे किए जा रहे हैं कि इस बिल के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो सकता है. यह चार्ज 2000 रुपये के ऊपर लगाया जा सकता है.
हालांकि ये चार्ज आम कस्टमर्स के लिए नहीं होगा, बल्कि छोटे व्यापारी से लेकर बड़े व्यापारियों तक पर लागू होगा. जिसका असर आम कस्टमर्स पर नहीं पड़ेगा. इसका मतलब है कि अगर आप सब्जी, टैक्सी या अन्य कोई भी सामान खरीदने या सर्विस यूज करते हैं तो आपको ये चार्ज नहीं देना होगा. साथ ही किसी को पैसा ट्रांसफर करने पर भी यह चार्ज नहीं वसूला जाएगा.
RBI ने यूपीआई पर क्या कहा?
वहीं आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के मुद्दे पर अभी जल्दबाजी में कुछ नहीं कहा जा सकता है. अभी ये सिस्टम विचार-विमर्श के तहत है. जिसने कई छोटे-मोटे लेन-देनों के लिए कैश की जरूरत को कम करने में मदद की है. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का फोकस UPI को अधिक से अधिक अपनाने पर है. सरकार अभी भी संशोधन कर रही है.
UPI से हट सकते हैं यूजर्स
अब इसे लेकर लोकल सर्किल सर्वे में बड़े खुलासे किए गए हैं. मंगलवार को जारी लोकलसर्कल्स के एक सर्वे में भारत के 322 जिलों से 45,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, पाया गया कि अगर बड़े व्यापारियों पर मासिक दर (एमडीआर) लागू की जाती है, तो 53% से ज्यादा यूजर्स ₹3,000 से अधिक के लेन-देन के लिए यूपीआई का उपयोग बंद कर देंगे. इनमें से 27% ने कहा कि वे क्रेडिट कार्ड का उपयोग करेंगे, 14% डेबिट कार्ड का और 12% बैंक ट्रांसफर या नकद भुगतान का.
व्यापारी पर लगेगा चार्ज तो ही यूज होगा UPI
सर्वे के अनुसार, 18% लोगों ने कहा कि वे यूपीआई का उपयोग तभी जारी रखेंगे जब व्यापारी शुल्क वहन करेगा, जबकि 12% ने कहा कि शुल्क का भुगतान करना पड़े तब भी वे UPI का उपयोग जारी रखेंगे. 14% लोगों ने कहा कि उनका फैसला चार्ज के अमाउंट पर निर्भर करेगा.
केंद्र सरकार को होगा अधिकार
यह सर्वे सरकार के भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन के प्रस्ताव के बाद किया गया है. अभी वर्तमान में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को नोटिफाई डिजिटल भुगतान माध्यमों पर मासिक दर (एमडीआर) वसूलने से रोकती है. प्रस्तावित संशोधन के तहत, केंद्र सरकार को यह अधिसूचित करने का अधिकार होगा कि किन भुगतान माध्यमों को ऐसे शुल्कों से छूट दी जाएगी.