नोटबंदी के बाद विधानसभा चुनावों से फंसा 7वें वेतन आयोग का फायदा

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को केन्द्र सरकार की मंजूरी मिले 7 महीने से ज्य़ादा समय बीत चुका है और केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को इसका पूरी तरह से फायदा पहुंचने में अभी भी देरी है. केन्द्र सरकार के सामने चुनौती 47 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी और 53 लाख पेंशनधारकों को बढ़ी हुई पेंशन देने की है.

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नोटबंदी के बाद चुनावों में फंसा सातवां वेतन आयोग नोटबंदी के बाद चुनावों में फंसा सातवां वेतन आयोग

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को केन्द्र सरकार की मंजूरी मिले 7 महीने से ज्य़ादा समय बीत चुका है और केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को इसका पूरी तरह से फायदा पहुंचने में अभी भी देरी है. केन्द्र सरकार के सामने चुनौती 47 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी और 53 लाख पेंशनधारकों को बढ़ी हुई पेंशन देने की है.

1. 2016 के वार्षक बजट में केन्द्र सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये की रकम का प्रावधान सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए किया था. वहीं वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने के लिए केन्द्र सरकार को 1.02 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है. लेकिन बीते 14 महीनों की बढ़ी हुई सैलरी बतौर एरियर इंतजार करते कर्मचारियों की मांग को पूरा करने में सबसे बड़ी दिक्कत केन्द्र सरकार के नोटबंदी के फैसले से बाद पैदा हुई है.

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2. की सिफारिशों को मंजूरी देने के बाद केन्द्र सरकार ने घोषणा की थी कि सभी कर्मचारियों को जनवरी 1, 2016 से बढ़ी हुई सैलरी और भत्ता मिलेगा लेकिन नोटबंदी लागू होने के बाद केन्द्र सरकार इस मुद्दे पर आखिरी फैसला लेने से कतरा रही है.

3. नोटबंदी का फैसला लेने के बाद मोदी सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के भत्ते पर वेतन आयोग की सिफारिशों को देखने के लिए एक कमेटी गठित कर दी. इस कमेटी को वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का रास्ता तय करने के लिए भी कहा गया है.

4. सूत्रों के मुताबिक अशोक लवासा के नेतृत्व में बनी कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है लेकिन केन्द्र सरकार कर्मचारियों को भत्ता देने में सक्षम नहीं है क्योंकि .

5. सातवें वेतन आयोग ने एचआरए में 138.71 फीसदी इजाफा किया है और अन्य भत्ते में 49.79 फीसदी की इजाफा करने का प्रस्ताव दिया है.

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6. पिछले कुछ महीनों के दौरान केन्द्र सरकार के कर्मचारियों की यूनियन वित्त मंत्रालय पर जल्द से जल्द भुगतान करने के लिए दबाव बना रही है. कर्मचारी यूनियन अपनी मांग को लेकर स्ट्राइक पर जाने की बात कर रही है.

7. चुनाव आयोग के निर्देश और 5 राज्यों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब केन्द्र सरकार कर्मचारियों के भत्ते पर कोई फैसले नहीं ले सकती. लिहाजा उम्मीद की जा रही है कि अब केन्द्रीय कर्मचारियों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.

8. चुनाव के चलते केन्द्र सरकार सातवें वेतन आयोग से संबंधित किसी तरह की घोषणा आने वाले बजट में भी करने से बचेगी. लिहाजा, चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद केन्द्र सरकार को अलग से सातवें वेतन आयोग का फायदा कर्मचारियों तक पहुंचाने के लिए फंड का इंतजाम करना होगा.

 

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