पाकिस्तान की हालत बेहद खराब, आर्थिक विकास के सभी लक्ष्यों को हासिल करने से चूका

पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़ती जा रही है. जून में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 3.3 फीसदी रहने की उम्मीद है जो कि पूर्व सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 6.3 फीसदी का करीब आधा ही है.

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दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2019,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

पाकिस्तान की इमरान सरकार देश की अर्थव्यवस्था के तकरीबन सभी क्षेत्रों में विकास के लक्ष्यों को पाने में विफल रही है. देश के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, जून में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 3.3 फीसदी रहने की उम्मीद है जो कि पूर्व सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 6.3 फीसदी का करीब आधा ही है.

वित्त वर्ष 2018-19 का आर्थिक सर्वेक्षण 11 जून को अगामी बजट पेश होने के एक दिन पहले आधिकारिक रूप से जारी किया जाएगा, लेकिन इसके कुछ विवरणों को डॉन न्यूज ने प्रकाशित किया.  

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आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ पशुधन ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें निर्धारित लक्ष्य 3.8 फीसदी के मुकाबले चार फीसदी की ग्रोथ रेट दर्ज की गई है. मतलब लक्ष्य से अधिक ग्रोथ रेट दर्ज की गई है.

उद्योंगों की हालत खस्ता

वहीं, औद्योगिक क्षेत्र की विकास दर महज 1.4 फीसदी दर्ज की गई है, जो तय लक्ष्य 7.6 फीसदी से काफी कम है, हालांकि कई बिजली संयंत्रों लगाए जाने और क्षेत्र की अन्य परियोजनाओं के पूरे होने के कारण बिजली उत्पादन में इजाफा हुआ है.

सेवा क्षेत्र की ग्रोथ रेट 4.7 फीसदी रही जबकि लक्ष्य 6.5 फीसदी रखी गई थी. निर्माण क्षेत्र की ग्रोथ रेट 7.6 फीसदी रही जबकि इसमें लक्ष्य 10 फीसदी निर्धारित की गई थी.

कृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट महज 0.8 फीसदी

पाकिस्तान में कृषि क्षेत्र की विकास दर सिर्फ 0.8 फीसदी रही जबकि सरकार ने 3.8 फीसदी का लक्ष्य निर्धारित किया था.  

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जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत पैकेज लेने जैसे कई प्रमुख नीतिगत निर्णय लेने में सरकार की देरी की वजह से निवेशकों में भ्रम की स्थ‍िति बनी.

हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने कहा था कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की हालत अभी और बिगड़ेगी, और वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान उसकी GDP में विकास दर गिरकर 2.7 फीसदी ही रह जाएगी. वर्ल्ड बैंक ने यह भी चेताया है कि वित्त वर्ष 2020 में महंगाई बढ़कर 13.5 फीसदी तक पहुंच सकती है.

इसके अलावा पाकिस्‍तानी जनता महंगाई की मार से भी त्रस्त है. मार्च में महंगाई दर बढ़कर 9.41 फीसदी पर पहुंच गई, जो नवंबर 2013 के बाद से सबसे अधिक है. बेरोजगारी बढ़ती जा रही है. IMF की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का खजाना खत्‍म होने के कगार पर है.  

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