'फ्लैट मिलेगा तब तक बूढ़ा हो जाऊंगा'... 20 साल से घर का इंतजार कर रहे सबीर भाटिया

हमारे देश में फ्लैट बुक करके लाखों रुपये लगाने के बाद सालों तक पजेशन का इंतजार करना आम बात हो गई है. हॉटमेल' के सह-संस्थापक और भारतीय-अमेरिकी बिजनेसमैन सबीर भाटिया भी अपने लग्जरी फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनका गुस्सा साफ नजर आया.

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भारत में फ्लैट के लिए 20 साल का इंतजार! (Photo-ITG) भारत में फ्लैट के लिए 20 साल का इंतजार! (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

हॉटमेल' (Hotmail) के सह-संस्थापक और भारतीय-अमेरिकी बिजनेसमैन सबीर भाटिया ने खुलासा किया है कि उन्होंने साल 2012 में भारत में एक 'अल्ट्रा-लक्जरी' अपार्टमेंट बुक कराया था, लेकिन एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वे इसके पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, उनके सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, बिल्डर ने उन्हें बताया है कि अब इस फ्लैट का पजेशन साल 2032 में ही मिल पाएगा.

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आमतौर पर फ्लैट बुक करने का मतलब किसी अपार्टमेंट को खरीदने के लिए शुरुआती रकम देकर बिल्डर के साथ एग्रीमेंट करना होता है, जबकि पजेशन तब मिलता है जब बिल्डर बनकर तैयार हुआ फ्लैट खरीदार को सौंपता है. दोनों के बीच यह अंतर इसलिए आता है क्योंकि प्रॉपर्टी निर्माणाधीन होती है या फिर उसे अंतिम मंजूरियां मिलना बाकी होता है.

सबीर भाटिया का लंबा इंतजार

57 वर्षीय सबीर भाटिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर कर भारत में फ्लैट के लिए अपने लंबे इंतजार की कहानी साझा की. उन्होंने लिखा, "मैंने 2012 में भारत में एक अल्ट्रा-लग्जरी अपार्टमेंट बुक किया था, यह प्रोजेक्ट काफी विवादों और उतार-चढ़ाव से गुजरा है, अब मुझे बताया गया है कि इसका पजेशन 2032 में मिलेगा, क्या 20 साल का यह लंबा इंतजार वाजिब है?

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कमेंट सेक्शन में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए हॉटमेल के इस करोड़पति कारोबारी ने कहा कि जब तक उन्हें यह अपार्टमेंट मिलेगा, तब तक वे बुजुर्ग हो चुके होंगे, उन्होंने कहा, "जब यह मुझे मिलेगा, तब तक मैं बूढ़ा हो चुका होऊंगा, मैंने इसे एक युवा के रूप में इस उम्मीद से बुक किया था कि भारत में अपना एक शानदार ठिकाना बना सकूं."

जब X पर कुछ यूज़र्स ने उनसे कहा कि शायद उन्हें 2032 में भी पजेशन न मिले, तो भाटिया ने इसे देश की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करार दिया. उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, "यह बिल्कुल भी अच्छी खबर नहीं है. दुर्भाग्य से, भारत एक 'जीरो ट्रस्ट' वाला देश बनता जा रहा है."
 

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