अगर आप इस साल अपना मकान या जमीन बेचने की सोच रहे हैं, तो यह मानकर मत चलिए कि 12.5% का नया कैपिटल गेंस टैक्स नियम हमेशा आपका फायदा ही कराएगा. सच यह है कि अगर आपने अपनी प्रॉपर्टी 22 जुलाई 2024 या उससे पहले खरीदी थी, तो आपके पास पुराना नियम चुनने का भी मौका है.
फाइनेंस (नंबर 2) एक्ट, 2024 ने इमूवेबल प्रॉपर्टी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस के टैक्सेशन में बदलाव किया है. हालांकि सरकार ने बिना इंडेक्सेशन के LTCG टैक्स की दर घटाकर 12.5% कर दी है, लेकिन इसके साथ ही एक राहत प्रावधान भी पेश किया है, जो कुछ करदाताओं को पिछली व्यवस्था का लाभ उठाने की अनुमति देता है, यदि वह उनके लिए अधिक फायदेमंद साबित होती है.
अगर आपने अपनी प्रॉपर्टी 22 जुलाई 2024 या उससे पहले खरीदी थी, तो आपके पास दो विकल्प हैं. आप चाहें तो महंगाई का फायदा लेकर 20% टैक्स का हिसाब लगाएं, या फिर बिना इंडेक्सेशन के सीधे 12.5% टैक्स दें. सरकार आपको यह आजादी देती है कि दोनों तरीकों से हिसाब जोड़कर देख लें, जिसमें आपका टैक्स कम बने, वही तरीका चुन लें!
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इंडेक्सेशन अभी भी क्यों मायने रखता है?
इंडेक्सेशन सरकार के कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) का उपयोग करके मुद्रास्फीति के हिसाब से संपत्ति की खरीद लागत को एडजस्ट करता है. संपत्ति की खरीद लागत को बढ़ाकर, यह कर योग्य कैपिटल गेन को कम कर देता है, जिससे देय टैक्स में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. विशेष रूप से उन संपत्तियों के लिए जो कई सालों से आपके पास हैं.
यही कारण है कि उच्च टैक्स दर का मतलब हमेशा अधिक टैक्स बिल नहीं होता है. उदाहरण के लिए 2010 में 50 लाख रुपये में खरीदी गई और 2026 में 1.5 करोड़ रुपये में बेची गई एक संपत्ति पर विचार करें. मान लीजिए कि इंडेक्स्ड कॉस्ट बढ़कर 90 लाख रुपये हो जाती है, तो पुरानी व्यवस्था के तहत कर योग्य कैपिटल गेन 60 लाख रुपये बनता है.
20% की टैक्स दर लागू करने पर कुल टैक्स देनदारी 12 लाख रुपये होती है. हालांकि, नई व्यवस्था के तहत इंडेक्सेशन की अनुमति नहीं है, कर योग्य लाभ की गणना मूल खरीद मूल्य (50 लाख रुपये) का उपयोग करके की जाती है, जिससे 1 करोड़ रुपये का कैपिटल गेन होता है. 12.5% की नई टैक्स दर पर, देय टैक्स 12.5 लाख रुपये बनता है. कम टैक्स दर होने के बावजूद, करदाता को 50,000 रुपये अधिक चुकाने पड़ते हैं क्योंकि इंडेक्सेशन का लाभ खत्म हो जाता है.
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दोनों विकल्पों में से चुनने का अधिकार किसे है?
यह विकल्प केवल उन निवासी व्यक्तियों और HUFs के लिए उपलब्ध है जो जमीन या इमारतों के रूप में लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट्स बेच रहे हैं, जिन्हें 22 जुलाई 2024 को या उससे पहले अधिग्रहित गया था. अगर संपत्ति 23 जुलाई 2024 को या उसके बाद खरीदी गई थी, तो पुरानी इंडेक्सेशन व्यवस्था अब उपलब्ध नहीं है. ऐसे सौदों पर आयकर अधिनियम के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन, बिना इंडेक्सेशन के 12.5% की दर से टैक्स लगाया जाएगा.
लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट के रूप में योग्य होने के लिए, संपत्ति को आम तौर पर बेचने से पहले 24 महीने से अधिक समय तक पास रखा गया होना चाहिए.
कैपिटल गेंस छूट अभी भी उपलब्ध हैं
टैक्स दरों में बदलाव से आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली छूट प्रभावित नहीं होती है. पात्र करदाता निर्धारित शर्तों और समय सीमा को पूरा करते हुए, कैपिटल गेंस को दूसरे आवासीय घर में फिर से निवेश करके धारा 54 (Section 54) के तहत, या निर्दिष्ट कैपिटल गेंस बॉन्ड में निवेश करके धारा 54EC (Section 54EC) के तहत राहत का दावा जारी रख सकते हैं.
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अपना ITR फाइल करने से पहले तुलना अवश्य करें
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति विक्रेताओं को अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने से पहले दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत अपनी देनदारी की गणना कर लेनी चाहिए. हालांकि 12.5% की नई दर से हाल ही में खरीदने वाले कई खरीदारों को फायदा हो सकता है, लेकिन सालों पहले संपत्ति खरीदने वाले मालिकों को लग सकता है कि इंडेक्सेशन के साथ 20% टैक्स से कुल टैक्स बिल कम बनता है, क्योंकि महंगाई खरीद की इंडेक्स्ड लागत को काफी बढ़ा देती है.
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