सुबह 8 बजे मकान मालिक ने मांगा किराया, Gen Z ने रात 11:58 बजे दिया रेंट, बोला- तारीख अभी खत्म नहीं हुई

रात 11:58 बजे किराया देने वाला यह मामला भले ही सोशल मीडिया पर मजाक और बहस का विषय बन गया हो, लेकिन इसके पीछे बदलती पीढ़ी की सोच भी दिखाई देती है.

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24 घंटे खत्म होने के 2 मिनट पहले जेन जी ने दिया किराया (Photro-ITG)   24 घंटे खत्म होने के 2 मिनट पहले जेन जी ने दिया किराया (Photro-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

किराये के घर में रहने वाले Gen Z किरायेदार और मकान मालिक के बीच किराया देने की तारीख को लेकर हुआ एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. मकान मालिक ने किरायेदार को साफ कहा था कि हर महीने की 5 तारीख को किराया देना है. किरायेदार ने भी कहा कि वह बात समझ गया है. लेकिन 5 तारीख की सुबह 8 बजे जब मकान मालिक ने फोन कर किराया मांगा तो किरायेदार ने कहा कि दिन में अभी 24 घंटे होते हैं.

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मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, किरायेदार ने आखिरकार उसी दिन रात 11:58 बजे किराया चुका दिया, यानी 5 तारीख खत्म होने से महज दो मिनट पहले. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर मकान मालिक और किरायेदार दोनों के पक्ष में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं.

किसकी गलती, मकान मालिक या किरायेदार?

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना था कि अगर मकान मालिक किसी खास समय तक किराया चाहता है तो इसकी जानकारी किराये के समझौते में साफ तौर पर लिखी होनी चाहिए. सिर्फ यह कहना कि किराया 5 तारीख को देना है, इसका मतलब यह भी हो सकता है कि किरायेदार के पास पूरे दिन का समय है.

वहीं, कुछ लोगों ने किरायेदार के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया, उनका कहना था कि अगर किराया हर महीने एक तय तारीख को देना है तो आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय पहले ही भुगतान कर देना बेहतर है. कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किरायेदार दिन में किराया देने की योजना बना रहा हो और इसी दौरान बैंकिंग सेवा बंद हो जाए, नेटवर्क की समस्या आ जाए या कोई तकनीकी दिक्कत हो जाए तो क्या होगा? ऐसे में पहले भुगतान करना दोनों पक्षों के लिए बेहतर हो सकता है.

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मामला सिर्फ किराये का नहीं, Gen Z के बदलते रवैये का भी है

इस घटना ने Gen Z को लेकर बहस भी छेड़ दी, कुछ यूजर्स ने मजाक में कहा कि Gen Z की सोच बाकी पीढ़ियों से बिल्कुल अलग है, वहीं, कुछ लोगों ने इसे नियमों और समझौतों को लेकर नई पीढ़ी के ज्यादा स्पष्ट और शाब्दिक रवैये का उदाहरण बताया. एक यूजर ने कहा कि अगर वह मकान मालिक होता तो किरायेदार को घर खाली करने का नोटिस दे देता और आगे से किराया देने की तारीख और समय दोनों साफ तौर पर तय करता.

प्रॉपर्टी मार्केट में भी बढ़ रही Gen Z की मौजूदगी

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब Gen Z की प्रॉपर्टी और किराये के बाजार में मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है, एक विश्लेषण के मुताबिक, Gen Z मिलेनियल्स की तुलना में करीब 5-6 साल पहले प्रॉपर्टी मार्केट में प्रवेश कर रही है. इस पीढ़ी के लिए घर या किराये की तलाश में डिजिटल माध्यम, पारदर्शिता और भरोसेमंद जानकारी काफी महत्वपूर्ण हैं.

दिलचस्प बात यह है कि आर्थिक रूप से मजबूत Gen Z के कई युवा ऐसे हैं जो घर खरीदने की क्षमता रखते हैं, लेकिन फिर भी किराये पर रहना पसंद करते हैं, इसकी बड़ी वजह नौकरी और शहर बदलने की आजादी, बेहतर जीवनशैली और सुविधाओं तक आसान पहुंच है.

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