क्‍यों खास है जियो प्‍लेटफॉर्म का IPO? दुनियाभर के निवेशको में दिखा क्रेज

एंकर निवेशकों के बीच जियो आईपीओ का क्रेज दिखाई दिया है, जिन्‍होंने इस आईपीओ को 30 गुना सब्‍सक्राइब किया है. इसके अलावा, दुनियाभर के निवेशक फर्मों द्वारा इसमें निवेश किया गया है.

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जियो प्‍लेटफॉर्म आईपीओ. (Photo: ITG) जियो प्‍लेटफॉर्म आईपीओ. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:53 PM IST

भारतीय बाजार में जियो प्‍लेटफॉर्म की एंट्री होने जा रही है. सोमवार को एंकर निवेशकों ने इसे 30 गुना बुक किया. सिर्फ 8110 करोड़ रुपये के शेयर के बदले एंकर निवेशकों ने 2.5 लाख करोड़ रुपये की बोली लगाई. इसके अलावा, दुनिया भर के निवेशकों के बीच भी इस आईपीओ को लेकर क्रेज दिखाई दे रहा है. आइए समझते हैं क्‍यों खास है जियो प्‍लेटफॉर्म का IPO...

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क्‍यों खास है जियो प्लेटफॉर्म्स IPO? 

1. जियो प्लेटफॉर्म्स को संस्थागत निवेशकों से लगभग ₹2,50,000 करोड़ की कुल बोली प्राप्‍त हुई है. पहली बार है जब किसी भारतीय IPO ने इस बड़े आंकड़े को पार किया है. यह भारतीय प्राथमिक पूंजी बाज़ार के लिए एक नया स्‍टैंडर्ड सेट करती है और जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी को दिखाती है.

2. जियो प्लेटफॉर्म्स की ₹8,110 करोड़ की एंकर बुक के लिए इसके आकार से 30 गुना से ज्‍यादा डिमांड मिली है. यह शानदार प्रतिक्रिया दिखाती है कि प्रमुख संस्थागत निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस, विकास की संभावनाओं, लंबे समय में वैल्यू बनाने की क्षमता और IPO की आकर्षक कीमत पर पूरा भरोसा है.

3. एंकर बुक में दुनिया के प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंड (सरकारी निवेश फंड), घरेलू म्यूचुअल फंड, विदेशी संस्थागत निवेशक और बीमा कंपनियां शामिल हैं. इनकी भागीदारी यह दिखाती है कि जियो प्लेटफॉर्म्स और इसके भविष्य के विकास को लेकर संस्थागत निवेशकों का भरोसा कितना गहरा और व्यापक है. 

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4. दुनिया के सबसे बड़े एसेट मैनेजरों में से कई, जैसे कि ब्लैकरॉक (BlackRock), कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी, टी. रो प्राइस, श्रोडर्स, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेम्पलटन, इनवेस्को और जानूस हेंडरसन, इस एंकर बुक का हिस्सा हैं. इनकी भागीदारी जियो प्लेटफॉर्म्स को भारतीय पूंजी बाजार के सबसे बेहतरीन निवेश अवसरों में से एक बनाती है.

5. एंकर बुक में सिंगापुर का GIC, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट जैसे प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंड शामिल हैं. गौरतलब है कि ADIA पहले से ही जियो प्लेटफॉर्म्स में एक शेयरधारक है (IPO से पहले की इक्विटी में 1.16% हिस्सेदारी) और अब IPO में हिस्सा लेकर वे कंपनी में अपना निवेश और बढ़ाना चाहते हैं. 

6. भारत के शीर्ष 10 म्यूचुअल फंडों ने एंकर निवेशक के तौर पर निवेश किया है, जिनमें SBI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड और कोटक म्यूचुअल फंड शामिल हैं. 

7. प्रमुख बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों जैसे LIC, HDFC लाइफ, SBI लाइफ, SBI पेंशन, HDFC पेंशन और ICICI प्रूडेंशियल ने भी 'एंकर बुक' में हिस्सा लिया है. इनकी मौजूदगी संस्थागत निवेशकों के आधार को और मजबूत बनाती है और कई तरह के वित्तीय संस्थानों के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता को उजागर करती है. 

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8. विदेशी 'लॉन्ग-ओनली' फंड (जो केवल लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं), सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंडों की कुल मांग में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इन दीर्घकालिक निवेशकों की मजबूत भागीदारी संस्थागत स्वामित्व के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है, और जियो प्लेटफॉर्म्स की निरंतर वृद्धि और लंबी अवधि में वैल्‍यू किएशन की क्षमता पर उनके भरोसे को दिखाती है. 

9. 'एंकर बुक' में ग्‍लोबल निवेश दिग्गज और भारत के प्रमुख वित्तीय संस्थान एक साथ आए हैं, जो इसमें शामिल होने वालों की व्यापकता और गहराई को दिखाता है. भारत के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ प्रमुख वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी, जियो प्लेटफॉर्म्स के निवेश प्रस्ताव की इंटरनेशनल पहुंच और पब्लिक मार्केट में इसके डेब्‍यू को लेकर मौजूद दिलचस्पी को दिखाता है. 

10. एंकर बुक का 30 गुना से अधिक सब्सक्राइब होना और दुनिया के प्रमुख निवेशकों की भागीदारी, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक घटना बनाती है. 'एंकर बुक' की यह जबरदस्त मांग, जियो प्लेटफॉर्म्स के लिस्ट होने के बाद व्यापक इक्विटी बाजारों तक भी फैल सकती है, जिससे निवेशकों का ध्यान कंपनी की ओर और अधिक आकर्षित होगा और संभवतः बाजार में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा. यह लिस्टिंग जियो की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी और बड़े पैमाने पर पूंजी निर्माण के केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी.

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