अब नोएल टाटा के खिलाफ वेणु श्रीनिवासन ने खोला मोर्चा, कहा- टाटा ट्रस्ट्स में भारी गड़बड़ी, कमिश्नर से शिकायत

Tatas boardroom tussle: श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से अपील की है कि टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन की तुरंत जांच शुरू की जाए और आवश्यकता पड़ने पर दोषी ट्रस्टियों को निलंबित या बर्खास्त किया जाए.

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अब वेणु श्रीनिवासन नोएल टाटा के खिलाफ खोर्चा मोर्चा. (Photo: ITG) अब वेणु श्रीनिवासन नोएल टाटा के खिलाफ खोर्चा मोर्चा. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

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  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

टाटा ग्रुप (Tata Group) में विवाद के बीच सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन और गवर्नेंस की तत्काल जांच की मांग की है. श्रीनिवासन टाटा संस के बोर्ड में SDTT और SRTT के संयुक्त नामांकित निदेशक भी हैं, शिकायत में श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट्स के कामकाज में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है.

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नोएल टाटा की भूमिका पर आपत्ति 
वेणु श्रीनिवासन ने नोएल टाटा की शाश्वत ट्रस्टी के रूप में नियुक्ति और टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष के रूप में उनके बने रहने के आधार पर सवाल उठाए हैं. साथ ही, उन्होंने नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई है.

इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से शिकायत में आरोप लगाया कि उन्हें महत्वपूर्ण फैसले लेने की प्रक्रियाओं से बाहर रखा गया है. उन्होंने 16 सितंबर के एक सर्कुलर प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसका उद्देश्य उन्हें टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग पर मतदान करने या हिस्सा लेने से रोकना था. उन्होंने इसे निष्पक्ष फैसले क्षमता को बाधित करने और SDTT में शक्ति हथियाने का प्रयास करार दिया. 

श्रीनिवासन ने टाटा संस के रणनीतिक और व्यावसायिक मामलों में टाटा ट्रस्ट्स के बढ़ते हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने 17 सितंबर के ट्रस्ट्स के बयान, जिसमें टाटा संस को लिस्ट न करने के विकल्पों पर चर्चा की गई थी, और शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप को लिक्विडिटी प्रदान करने के नोएल टाटा के प्रस्ताव का उदाहरण दिया.

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उनका तर्क है कि व्यावसायिक सौदों में सीधे तौर पर बातचीत करना SDTT के चैरिटेबल उद्देश्यों के अनुकूल नहीं है. इससे ट्रस्ट के चैरिटेबल कॉर्पस और टैक्स-छूट की स्थिति को खतरा हो सकता है. 

कानूनी और प्रशासनिक स्थिति
बता दें, टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की कुल 66% हिस्सेदारी है, जिसमें SDTT की 27.98% और SRTT की 23.56% हिस्सेदारी शामिल है. श्रीनिवासन ने चेतावनी दी कि गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा व्यावसायिक गतिविधियों में भाग लेने के नियमों के उल्लंघन से ट्रस्ट का टैक्स रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है. इससे पहले, मई में महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने लाइफ ट्रस्टियों के गवर्नेंस उल्लंघन के आरोपों के बाद SRTT को बैठकों में भाग लेने या निर्णय लेने से रोक दिया था. 

श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से अपील की है कि टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन की तुरंत जांच शुरू की जाए और आवश्यकता पड़ने पर दोषी ट्रस्टियों को निलंबित या बर्खास्त किया जाए. जांच पूरी होने तक SDTT और टाटा संस के कुछ निर्णयों में नोएल टाटा की भागीदारी पर प्रतिबंध लगाया जाए. SDTT बोर्ड की वर्तमान संरचना में स्थिति यथावत बनाए रखी जाए. 

बता दें, इसी टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस की लिस्टिंग रोकने के लिए एक बड़ा दांव चला है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा सन्स (TSPL) के बोर्ड को एक पुनर्गठन प्रस्ताव सौंपा है, जिसके तहत ग्रुप की दो गैर-लिस्टेड कंपनियों का विलय सीधे टाटा संस में किया जाएगा. आरबीआई के सख्त लिस्टिंग निर्देशों और अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के दायरे से बाहर निकलने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने एक रणनीतिक कदम उठाया है. 

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क्या है रीस्ट्रक्चरिंग का पूरा प्लान?
इस प्रस्ताव के तहत समूह की दो कंपनियां टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का विलय टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में किया जाएगा. इस विलय के बाद बनने वाली संयुक्त इकाई का ऑपरेटिंग रेवेन्यू (31 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार) बढ़कर 1,05,043 करोड़ रुपये हो जाएगा, जो कि कंपनी की कुल आय का 64.3% हिस्सा होगा. वहीं इसके विपरीत वित्तीय संपत्तियों से होने वाली आय 40,072 करोड़ रुपये ही रह जाएगी.

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