कुछ कहानियां किसी एक इंसान की नहीं होतीं, वे एक परिवार की, एक सोच की और एक पूरे देश की होती हैं. रिलायंस की कहानी भी ऐसी ही है. इसकी शुरुआत गुजरात के एक छोटे-से कमरे से हुई थी. आज वह हर जेब में मौजूद नेटवर्क तक पहुंच चुकी है. इस सफ़र में हर पीढ़ी ने कुछ बनाया और अगली पीढ़ी को सौंप दिया.
जो हर पीढ़ी को मिली, और जो हर पीढ़ी से मांगी गई
रिलायंस की कहानी धीरूभाई अंबानी की उद्यमी शुरुआत से शुरू हुई, मुकेश अंबानी ने कारोबार को और बड़ा किया और अब आकाश, ईशा और अनंत परिवार के इस काम को टेक्नोलॉजी, रिटेल और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में आगे ले जा रहे हैं.
इस कहानी में स्थिरता भी है, निरंतरता भी, और नए सिरे से ख़ुद को गढ़ने का जज़्बा भी, हर पीढ़ी को एक मज़बूत नींव मिलती है, पर उससे यह उम्मीद भी की जाती है कि वह अपने दौर के भारत के लिए कुछ और बड़ा बनाए.
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तीन पीढ़ियां, एक अटूट वादा
तीनों पीढ़ियों के काम अलग हैं और दौर भी, पर वादा एक ही है: जो भारत में बने, वह पूरे भारत को ऊपर उठाए, इस सोच की जड़ में यह यक़ीन है कि जब कोई उद्यम बढ़ता है, तो देश और उसके लोग भी उसके साथ आगे बढ़ने चाहिए और किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ़ अपने लिए सफलता बनाना नहीं है, असली उपलब्धि यह है कि लाखों भारतीयों के लिए उसका हिस्सा बनने के मौक़े पैदा हों.
रिलायंस फ़ाउंडेशन: जहां कारोबार से आगे बढ़कर काम हुआ
इस वादे का एक बड़ा रूप रिलायंस फ़ाउंडेशन में दिखता है, इसके ज़रिए नीता अंबानी का काम 6.6 करोड़ (66 million) से ज़्यादा लोगों की ज़िंदगियों तक पहुंचा है और 54,000 से ज़्यादा गांवों तक फैला है.
54,000 गांव कितने होते हैं, यह सोचकर देखिए, इतने गांवों में काम हो, तो हर गांव की अपनी अलग कहानी बनती है और इस काम का दायरा उन लोगों तक जाता है जिनके बारे में अक्सर बात ही नहीं होती.
अब AI की बारी
आज दुनिया एक नई क्रांति के मुहाने पर खड़ी है, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, यानी AI। पर रिलायंस चाहता है कि यह क्रांति कुछ ही लोगों तक सीमित न रहे, इसी सोच के साथ Jio आज 12 भारतीय भाषाओं में AI का एक मुफ़्त कोर्स दे रहा है. मक़सद यह है कि अगली क्रांति का फ़ायदा हर बच्चे तक पहुंचे, सिर्फ़ चंद लोगों तक नहीं.
यानी वही पुरानी सोच, एक नए रूप में: सपना बड़ा हो, और सबका हो.
अतीत, वर्तमान, भविष्य
रिलायंस की कहानी असल में उद्यम और राष्ट्र की आकांक्षाओं के बीच बनते रिश्ते की कहानी है.
अतीत में महत्वाकांक्षा और संपत्ति बनाने की कहानी है. वर्तमान में भारत के औद्योगिक और डिजिटल बदलाव का विशाल पैमाना दिखता है. भविष्य उन मौक़ों पर टिका है जो उभरती टेक्नोलॉजी, नए कारोबारों और बदलती उपभोक्ता ज़रूरतों से बनेंगे.
रिलायंस की विरासत सिर्फ इसमें नहीं है कि उसने क्या खड़ा किया, वह इसमें है कि उसने भारतीयों को सिर्फ़ कल्पना करने नहीं, नामुमकिन को हासिल करने का हौसला भी दिया.
कहानी अभी जारी है
दुनिया में बहुत कम परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने देश को उस तरह गढ़ा हो जैसे अंबानी परिवार ने भारत को गढ़ा. गुजरात के एक छोटे-से कमरे से लेकर हर जेब में मौजूद नेटवर्क तक, हर पीढ़ी ने ख़ुद से बड़ा कुछ बनाया और उसे अगली पीढ़ी को सौंप दिया, भारत की तरक़्क़ी में उनकी छाप किसी न किसी रूप में दिखती है. और यह कहानी अभी जारी है…
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