चीनी के दाम में तेजी के पीछे 'मौसम और जमाखोरी', अगले साल तक के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों के लिए राहत की खबर है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. हाल में कीमतों में इजाफा सप्लाई संकट के कारण नहीं है. त्योहारी मांग, बाजार सेंटीमेंट और बड़े खरीदारों की जमाखरीद ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है.

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इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. (File Photo) इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. (File Photo)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:11 AM IST

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि अगले 7 दिनों में चीनी के दाम नरम पड़ना शुरू हो सकते हैं. एसोसिएशन के मुताबिक, देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है.

हाल के दिनों में चीनी की कीमत करीब ₹42 से बढ़कर ₹55 प्रति किलो तक पहुंच गई है. ISMA के मुताबिक, चीनी की कीमतों में करीब 16% की तेजी आई है. हालांकि, एसोसिएशन का कहना है कि कीमतों में यह उछाल किसी वास्तविक सप्लाई क्राइसिस की वजह से नहीं है. इसके पीछे बाजार का सेंटीमेंट, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग और खरीदारी का बदलता व्यवहार प्रमुख कारण हैं.

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मौसम और उत्पादन का भी पड़ा असर

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम की स्थिति का भी असर रहा है. खराब मौसम ने गन्ने की पैदावार को प्रभावित किया है. ISMA के अनुसार, महाराष्ट्र में ज्यादा क्रशिंग रेट और उत्तर प्रदेश में गन्ने की कुछ वैरायटी से जुड़ी दिक्कतों ने भी बाजार को प्रभावित किया. हालांकि, एसोसिएशन इन वजहों को चीनी की वास्तविक कमी नहीं मानता.

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बड़े खरीदारों की जमाखोरी से बढ़े दाम

ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ चीनी की मांग में बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा ब्राजील में सप्लाई की स्थिति ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ाया है. ISMA के मुताबिक, बड़े खरीदारों ने हाल के दिनों में चीनी का अतिरिक्त स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया. इससे बाजार में नियमित सप्लाई का सर्कुलेशन प्रभावित हुआ और आर्टिफिशियल शॉर्टेज जैसा माहौल बना. एसोसिएशन का मानना है कि जमाखरीद ने कीमतों में आई तेजी को और बढ़ा दिया.

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एथनॉल को जिम्मेदार नहीं मानता ISMA

चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी को लेकर एथनॉल को जिम्मेदार ठहराए जाने पर भी ISMA ने स्थिति स्पष्ट की है. एसोसिएशन का कहना है कि ₹42 से ₹55 तक की बढ़ोतरी को चीनी की कमी से जोड़ना सही नहीं है. उसके मुताबिक, देश में मौजूदा चीनी स्टॉक अब भी आरामदायक स्तर पर है.

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अगले साल भी पर्याप्त स्टॉक की उम्मीद

ISMA के अनुसार, अगले साल के लिए करीब 35 लाख टन चीनी का ओपनिंग स्टॉक रहने की उम्मीद है. एसोसिएशन ने इसे पर्याप्त सप्लाई का संकेत बताया है. यानी फिलहाल उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं जताई गई है. अगर आप घर के इस्तेमाल के लिए चीनी खरीदते हैं, तो फिलहाल घबराकर ज्यादा स्टॉक जमा करने की जरूरत नहीं है. ISMA के मुताबिक, बाजार में वास्तविक कमी नहीं है और मौजूदा तेजी मुख्य रूप से बाजार के सेंटीमेंट, त्योहारी मांग और बड़े खरीदारों की अतिरिक्त खरीद से जुड़ी है.

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