RBI On GDP Growth: चुनौतियां बहुत... लेकिन भारत में दम, इकोनॉमी को लेकर क्या बोले RBI गवर्नर?

RBI Governor On India GDP: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए जहां रेपो रेट स्थिर रखे जाने की जानकारी शेयर की, तो वही इंडियन इकोनॉमी के ग्रोथ रेट अनुमान में भी इजाफा किया है.

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आरबीआई ने बढ़ाया भारत के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान. (Photo: ITG) आरबीआई ने बढ़ाया भारत के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST

मिडिल ईस्ट युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट टेंशन समेत तमाम कारणों से ग्लोबल टेंशन बीते कुछ समय से हाई पर रही है. इस बीच दुनिया के तमाम देशों में सप्लाई चेन नेटवर्क पर बेहद बुरा असर पड़ा है. भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी इसका जिक्र किया और कहा कि वैश्विक स्तर पर इकोनॉमिक ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है और तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था शानदार प्रदर्शन कर रही है. RBI ने FY27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में इजाफा भी किया है. 

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उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि भारतीय इकोनॉमी (Indian Economy) ने पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और घरेलू इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत बनी हुई हैं. लगातार मजबूत हो रही डिमांड से जीडीपी ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है. खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर एक्टिविटीज में लगातार विस्तार दिख रहा है. RBI गवर्नर ने आगे कहा कि हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा से पता चलता है कि Q1 में घरेलू इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत रही, खपत बढ़ी है.

इस रफ्तार से दौड़ेगी इकोनॉमी
केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने RBI MPC Results का ऐलान करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ का अपडेटेड अनुमान शेयर किया. संजय मल्होत्रा के मुताबिक, FY27 के लिए GDP Growth अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है. पहली तिमाही में ये 7% रहने का अनुमान, जबकि दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.3% से 6.4% किया गया है. 

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हालांकि, इस बीच आरबीआई ने माना कि मॉनसून को लेकर अनिश्चितता के चलते ग्रोथ का आउटलुक धुंधला है. इसके बाद भी Indian Economic Growth मजबूत है, लेकिन FY27 में कुछ कम हो सकती है. 

SBI ने भी जताया था ऐसा अनुमान
बीते सप्ताह जारी की गई SBI रिसर्च रिपोर्ट पर नजर डालें, तो उसमें भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर जाहिर किया गया अनुमान भी ठीक RBI द्वारा जताए गए अनुमान के जैसा ही था. रिपोर्ट में जहां एनालिस्ट्स ने आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट को अनचेंज रखने की संभावना पर जोर दिया था, तो इसके साथ ही इस बात के भी संकेत मिलने की बात कही थी कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से बढ़ी है.

SBI रिसर्च की इस रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7% से अधिक होने की उम्मीद है, लेकिन स्थिर महंगाई, बाहरी अनिश्चितताओं और मुद्रा दबावों के कारण केंद्रीय बैंक के लिए सबसे संभावित परिणाम स्थिर हैं.

Repo Rate में कोई बदलाव नहीं
यहां बता दें कि रिजर्व बैंक ने 3 से 5 अगस्त तक हुई MPC बैठक में 'न्यूट्रल' पॉलिसी रुख बनाए रखने का फैसला किया. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ऐलान किया कि रेपो रेट में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं (Repo Rate Unchanged) किया गया है और इसे 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा गया है.  

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केंद्रीय बैंक के मुताबिक, वेस्ट एशिया में युद्ध से मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है और सेंटीमेंट कमजोर हो रहा है. इसका असर ग्लोबल ग्रोथ पर भी पड़ेगा और इसके धीमे होने की उम्मीद है. इसके साथ ही गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अमेरिकी टैरिफ (US Tariff) को लेकर ट्रेड अनिश्चितता की बात भी कही. 

इंडस्ट्रीज एक्सपर्ट्स की राय

बेसिक होम लोन के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि आरबीआई का रेपो रेट को स्थिर रखना वित्त क्षेत्र में नीतिगत निरंतरता और निश्चितता प्रदान करता है. इससे खासकर किफायती और मध्यम आय वर्ग के घर खरीदारों को आत्मविश्वास के साथ अपने लोन की योजना बनाने में मदद मिलेगी. हालांकि महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता पर सतर्कता जरूरी है, फिलहाल नीति विकास और आर्थिक स्थिरता के बीच बेहतरीन संतुलन बनाती है. 

वहीं बीवाईएसटी की संस्थापक और प्रबंधन ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन का कहना है कि रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखना आर्थिक मजबूती और महंगाई पर सतर्कता को दर्शाता है. इससे सूक्ष्म और लघु उद्यमियों (MSME) को ब्याज दरों और कार्यशील पूंजी के प्रबंधन में स्थिरता मिलेगी. हालांकि, इसका असली लाभ बैंकों द्वारा समय पर और किफायती ऋण देने और MSME को समय पर भुगतान मिलने पर निर्भर करता है. सशक्त उद्यम, वित्तीय अनुशासन और नए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए स्थिर वित्त, समयबद्ध भुगतान और मेंटरशिप-आधारित मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं. 

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नारेडको के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन ने कहा कि मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई का यह एक संतुलित और समझदारी भरा फैसला है. इस समय रियल एस्टेट सेक्टर को पॉलिसी में स्थिरता की जरूरत थी, और सेंट्रल बैंक के इस कदम से डेवलपर्स और घर खरीदने वालों, दोनों का भरोसा बढ़ेगा. उम्मीद है कि ब्याज दरों में स्थिरता से घरों की मांग बनी रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर में तेज़ी जारी रहेगी. 

जबकि लोहिया वर्ल्डस्पेस के मैनेजिंग डायरेक्टर पीयूष लोहिया का मानना है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला आर्थिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ महंगाई पर सतर्क निगरानी बनाए रखने की संतुलित सोच को दर्शाता है. खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण महंगाई का दबाव फिलहाल बना हुआ है, लेकिन आरबीआई का यह विश्वास कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में नरमी आएगी, रियल एस्टेट डेवलपर्स और घर खरीदने वालों, दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है. 

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