स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप को ईएमआई (EMI) पर खरीदने वालों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए नियम जारी किए हैं. अगर लोन का बकाया चुकाने के बाद भी फाइनेंस किया गया डिवाइस समय पर अनलॉक नहीं किया जाता है, तो बैंक या रेगुलेटेड एंटिटी को हर घंटे ₹250 का मुआवजा देना पड़ सकता है. यह नया फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से लागू होगा.
आरबीआई ने यह कदम ईएमआई डिफॉल्ट के बाद फाइनेंस किए गए डिवाइस को रिमोट तरीके से लॉक करने की बढ़ती घटनाओं के बीच उठाया है. रिजर्व बैंक का कहना है कि लेंडर्स को बकाया रकम की वसूली का अधिकार है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल कस्टमर्स पर अनुचित दबाव बनाने या गलत रिकवरी के तरीके के तौर पर नहीं किया जा सकता.
किन डिवाइस पर लागू होंगे नए नियम?
आरबीआई के मुताबिक, रिमोट बैन सिर्फ उसी डिवाइस पर लगाया जा सकता है, जिसकी खरीद के लिए खास तौर पर लोन लिया गया हो. यानी अगर आपने पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन या कोई अन्य लोन लिया है और वह सीधे किसी स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप की खरीद से जुड़ा नहीं है, तो उस डिवाइस को लोन रिकवरी के लिए रिमोट तरीके से लॉक नहीं किया जा सकता.
EMI चूकते ही लॉक नहीं होगा डिवाइस
आरबीआई ने डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रक्रिया तय की है. सिर्फ ईएमआई डिफॉल्ट होते ही डिवाइस को रिमोट तरीके से बंद नहीं किया जा सकेगा. बैन की शुरुआत तभी की जा सकती है, जब संबंधित लोन अकाउंट कम से कम 30 दिन से ओवरड्यू हो. वहीं, डिवाइस को पूरी तरह लॉक करने की अनुमति 60 दिन के ओवरड्यू के बाद ही होगी. आरबीआई ने लेंडर्स को शुरुआत से ही पूरा डिवाइस बंद करने के बजाय फेजवाइज तरीके से बैन लागू करने का निर्देश दिया है.
डिवाइस की जरूरी सुविधाएं चालू रहेंगी
रिमोट बैन लगाए जाने के बाद भी डिवाइस की कुछ जरूरी सुविधाएं चालू रखनी होंगी. इनमें इनकमिंग कॉल, SMS और SOS जैसी इमरजेंसी कम्युनिकेशन सेवाएं शामिल हैं. इसके अलावा, वर्क या जॉब के लिए जरूरी फीचर्स को भी बंद नहीं किया जा सकेगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईएमआई भुगतान में देरी होने पर भी लोन लेने वाले कस्टमर पूरी तरह कम्युनिकेशन और जरूरी कामकाज से कट न जाएं.
प्राइवेट डेटा तक नहीं होगा एक्सेस
आरबीआई के नए फ्रेमवर्क में लोन लेने वाले की प्राइवेसी पर भी जोर दिया गया है. बैंक या लेंडर डिवाइस पर बैन लगाने के दौरान कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो, वीडियो, मैसेज, कॉल लॉग, लोकेशन हिस्ट्री या किसी अन्य निजी डेटा तक पहुंच नहीं बना सकेंगे. यानी डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लोन रिकवरी तक सीमित रहेगा और इसके जरिए ग्राहक के निजी डेटा तक पहुंच बनाने की अनुमति नहीं होगी.
लोन लेते समय देनी होगी जानकारी
लेंडर को लोन मंजूर करते समय ही कस्टमर को यह स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि ईएमआई नहीं भरने की स्थिति में डिवाइस पर रिमोट बैन लगाया जा सकता है. बैन लागू करने से पहले लोन लेने वाले को इसकी सूचना पहले ही देनी होगी. इससे कस्टमर को पहले से पता रहेगा कि डिफॉल्ट की स्थिति में डिवाइस पर किस तरह की कार्रवाई हो सकती है.
ईएमआई भरते ही हटाना होगा बैन
अगर लोन लेने वाला पूरा बकाया चुका देता है, तो लेंडर को डिवाइस पर लगाया गया बैन हटाना होगा. यदि भुगतान के बाद भी डिवाइस समय पर अनलॉक नहीं किया जाता है, तो नए आरबीआई फ्रेमवर्क के तहत बैंक या रेगुलेटेड एंटिटी पर मुआवजे की जिम्मेदारी बन सकती है. नए नियमों का मकसद लोन रिकवरी के अधिकार और ग्राहक के हितों के बीच संतुलन बनाना है.
आजतक बिजनेस डेस्क