सावन के पावन महीने में बिहार के समस्तीपुर में महिलाओं ने पारंपरिक उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ सावन महोत्सव मनाया. शहर के एक हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया. हरे रंग के परिधानों, मेहंदी और झूलों के बीच पूरे आयोजन में सावन की उमंग और शिव भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला.
महोत्सव की शुरुआत सुहागन महिलाओं को पारंपरिक सुहाग सामग्री वितरित कर की गई. इसके बाद महिलाओं ने सावन के गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया और पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. हरे रंग की साड़ियों में सजी प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से सावन के महत्व को जीवंत कर दिया.
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कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकगीतों और नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. महिलाओं ने कजरी और सावन के पारंपरिक गीतों पर सामूहिक नृत्य कर माहौल को उल्लास से भर दिया. पूरे आयोजन के दौरान भगवान भोलेनाथ से परिवार, समाज और देश में सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की गई.
मेहंदी, झूले और फैशन शो बने आकर्षण
महोत्सव में महिलाओं ने हाथों में मेहंदी रचाई और पारंपरिक झूलों का आनंद लिया. सावन के लोकगीत गाते हुए महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ उत्सव की खुशियां साझा कीं. पूरे कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला.
कार्यक्रम के दौरान रंग-बिरंगी छतरियां हाथों में लेकर महिलाओं ने फैशन शो में भी हिस्सा लिया. पारंपरिक वेशभूषा और सावन की थीम पर आधारित प्रस्तुतियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया. उपस्थित महिलाओं ने तालियों के बीच प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया.
भगवान भोलेनाथ और प्रकृति की आराधना के साथ महिलाओं ने सावन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया. आयोजन में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का भी प्रतीक है.
'सावन सिर्फ ऋतु नहीं, नई उम्मीदों का उत्सव'
आयोजन में शामिल मीनाक्षी सिंह ने कहा कि सावन भगवान शिव की भक्ति में लीन होने का सबसे पावन समय है. उन्होंने कहा कि शिव और माता पार्वती की तरह परिवारों में भी प्रेम, सौहार्द और खुशहाली बनी रहे, इसी भावना के साथ सभी महिलाएं एकत्रित हुई हैं.
उन्होंने कहा कि सावन केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि हरियाली, उमंग, उत्सव और नई उम्मीदों का प्रतीक है. उन्होंने कामना की कि हर वर्ष इसी तरह समस्तीपुर में सावन महोत्सव का आयोजन हो और भगवान भोलेनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे.
कार्यक्रम के दौरान पूजा बंसल ने भी सावन और भगवान शिव को समर्पित गीत प्रस्तुत किए. उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से सावन, शिव भक्ति, सातों श्रृंगार और दांपत्य जीवन की खुशियों का भावपूर्ण चित्रण किया. उनकी प्रस्तुति पर महिलाओं ने तालियों के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की.
शिव भक्ति और सांस्कृतिक रंग में सराबोर रहा आयोजन
पूरे महोत्सव में महिलाओं ने नृत्य, संगीत, लोकगीत और पारंपरिक गतिविधियों के माध्यम से सावन की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया. आयोजन में धार्मिक आस्था और सामाजिक मेलजोल का सुंदर समन्वय देखने को मिला.
महिलाओं ने भगवान भोलेनाथ से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, हरियाली और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की. सावन महोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर पारंपरिक लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा के साथ सामने रखा.
जहांगीर आलम