बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेट हेल्थ मिनिस्टर निशांत कुमार सोमवार को मुख्यमंत्री आवास के पास स्थित एक बड़े सरकारी बंगले में शिफ्ट हो गए. यह वही बंगला है जो उनके पिता नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने तक उनका घर था. 44 साल के निशांत कुमार धार्मिक समारोह के बाद 5, देश रत्न मार्ग स्थित बंगले में पहुंचे.
JD(U) प्रेसिडेंट नीतीश कुमार भी इस गृह प्रवेश समारोह में शामिल हुए. निशांत ने कहा कि उन्हें गृह प्रवेश पूजा और सत्यनारायण कथा के दौरान अपने पिता और परिवार के करीबी सदस्यों के साथ रहने में खुशी हुई. उन्होंने कहा कि वो हमेशा अपने पिता के साथ रहे हैं. अब भी उनके घर और अपने सरकारी बंगले के बीच आते-जाते रहेंगे.
नीतीश कुमार ने अप्रैल में राज्यसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था. इसके बाद BJP नेता सम्राट चौधरी की नई सरकार बनी. सम्राट चौधरी, जो इससे पहले नीतीश कुमार के डिप्टी थे, मुख्यमंत्री बनने तक 5, देश रत्न मार्ग वाले बंगले में रह रहे थे. इसके बाद JD(U) सुप्रीमो नीतीश कुमार को नया बंगला 7, सर्कुलर रोड दिया गया.
निशांत कुमार ने अपने पिता के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के एक महीने बाद सम्राट कैबिनेट में शामिल होने के लिए हामी भरी थी. इससे पहले उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया था, जिसने पार्टी नेताओं को भी चौंका दिया था. माना जाता है कि बाद में पार्टी के नेताओं के दबाव पर वो सरकार में शामिल होने के लिए तैयार हुए.
पार्टी के कई नेता नीतीश कुमार के सत्ता छोड़ने के बाद JD(U) के भविष्य को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे. हाल के लेजिस्लेटिव काउंसिल चुनाव के बाद निशांत कुमार का सरकारी बंगले में शिफ्ट होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. इसे नीतीश कुमार के बेटे की बढ़ती राजनीतिक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है.
राजनीतिक जानकार बिहार में सरकारी बंगलों को लेकर हुई पुरानी सियासी लड़ाइयों को भी याद कर रहे हैं. खासकर RJD के वर्किंग प्रेसिडेंट तेजस्वी यादव और दिवंगत BJP नेता सुशील कुमार मोदी के बीच बंगले को लेकर विवाद काफी चर्चा में रहा था. तेजस्वी यादव को साल 2015 में यह बड़ा बंगला अलॉट किया गया था.
उस समय उन्होंने राघोपुर विधानसभा सीट जीतकर राजनीति में शानदार शुरुआत की थी. इसके बाद नीतीश कुमार ने उन्हें डिप्टी CM बनाया था, जब JD(U) और RJD कुछ समय के लिए गठबंधन में थे. सुशील कुमार मोदी, जो साल 2013 में नीतीश कुमार के NDA छोड़ने तक उनके डिप्टी थे, उन्हें 1, पोलो रोड का बंगला दिया गया था.
यह जगह 1, ऐनी मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास से कुछ सौ मीटर की दूरी पर है. साल 2017 में जब JD(U) दोबारा NDA में लौटी, तो कहा जाता है कि नीतीश कुमार इस बात से नाराज थे कि विपक्ष के नेता बनने के बावजूद तेजस्वी यादव उनके घर के इतने करीब रह रहे थे. इसके बाद तेजस्वी यादव को बंगला बदलने का आदेश दिया गया.
हालांकि, उन्होंने इसे चुनौती दी. साल 2019 तक मामला चला. इसके बाद में पटना हाई कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने डिप्टी CM रहते हुए मिले बंगले में रहने की अनुमति मांगी थी. बंगला खाली होने के बाद सुशील मोदी ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी ने बंगले में काफी सुविधाओं का इस्तेमाल किया था.
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