बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकारी योजनाओं के जरिए रोजगार और स्वरोजगार दिलाने का झांसा देकर करीब 2.67 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है. पुलिस ने इस मामले में आरोपी आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार किया है. गुरुवार को ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने पूरे मामले का खुलासा किया.
पुलिस के मुताबिक, आशुतोष अपनी बहन के साथ मिलकर संस्था और कंपनी के जरिए लोगों को सरकारी योजना के तहत मशरूम उत्पादन, स्मार्ट हट, तकनीकी सहायता और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का भरोसा देता था. इसके साथ ही लाभुकों को बैंक से लोन दिलाने का भी आश्वासन दिया जाता था.
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आरोप है कि कर्ज स्वीकृत होने के बाद उसकी रकम लाभुकों को देने के बजाय कंपनी या संस्था के बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी. इसके बाद न तो तय परियोजना शुरू कराई गई और न ही लोगों को योजना का अपेक्षित लाभ मिला. जब पीड़ितों ने पैसे वापस मांगे तो उन्हें चेक दिए गए, लेकिन बाद में वे भी बाउंस हो गए.
तीन थानों में दर्ज मामलों से सामने आया 2.67 करोड़ का आंकड़ा
पुलिस के अनुसार, सरैया, बोचहां और मुशहरी थानों में दर्ज मामलों को मिलाकर अब तक करीब 2.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप सामने आया है. सरैया थाना कांड संख्या 52/26 में करीब 21 लाख रुपये, बोचहां थाना कांड संख्या 225/25 में करीब 1 करोड़ 18 लाख 58 हजार 727 रुपये और मुशहरी थाना कांड संख्या 219/25 में करीब 72 लाख रुपये की रकम का मामला दर्ज है.
ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने बताया कि आरोपी सरकारी योजनाओं के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने का भरोसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था. पुलिस की जांच में लाभुकों तक पहुंचने के लिए जीविका संगठन से जुड़े लोगों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है.
जांच एजेंसी अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि योजना के नाम पर कितने लोगों को जोड़ा गया और उनके नाम से कितनी रकम स्वीकृत कराई गई. बैंक खातों में हुए लेन-देन और संस्था से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है.
110 जीविका दीदियों के नाम पर 3.63 करोड़ के लोन का आरोप
पुलिस की जांच में एक और बड़ा मामला सामने आया है. आरोपी की एजेंसी पर 110 जीविका दीदियों के नाम पर करीब 3.63 करोड़ रुपये का लोन लिए जाने का आरोप है. दीदियों का कहना है कि उनके नाम पर करीब 3.30 लाख रुपये तक का कर्ज कराया गया, लेकिन उन्हें उस परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिला.
आरोप है कि लोन की किस्तें नहीं चुकाई गईं. इसके चलते कई मामलों में ब्याज जुड़ने के बाद कर्ज की रकम और बढ़ गई. जीविका दीदियां अब इस मामले में कार्रवाई के साथ-साथ अपने नाम पर लिए गए कर्ज से राहत की मांग कर रही हैं.
यह मामला एसडीएम पूर्वी के न्यायालय में भी विचाराधीन है. मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होनी है. इस कार्रवाई के बीच पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कर्ज की रकम कहां गई और लाभुकों को योजना का लाभ क्यों नहीं मिला.
बड़े अधिकारी की पत्नी को भी बनाया निशाना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सरकारी योजना के तहत मशरूम उत्पादन शुरू करने के इच्छुक लोगों को निशाना बनाता था. इसी क्रम में एक बड़े अधिकारी की पत्नी को भी योजना के जरिए कथित तौर पर ठगे जाने की बात सामने आई है.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आशुतोष ने कितने लोगों से रकम ली और ठगी के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई. साथ ही इस पूरे नेटवर्क में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे, इसकी भी जांच की जा रही है.
पुलिस को सीतामढ़ी और गोपालगंज में भी आरोपी के खिलाफ मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है. इन दोनों जगहों से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है, ताकि कथित धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके.
आशुतोष गिरफ्तार, बहन अब भी फरार
इस मामले में आशुतोष मंगलम की बहन भी नामजद आरोपी है और फिलहाल फरार चल रही है. उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. पुलिस का कहना है कि मामले में अब तक पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं.
ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है. इसके साथ ही बैंक खातों, रकम के लेन-देन और संस्था से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित धोखाधड़ी में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है.
अब जांच का फोकस पूरे नेटवर्क, लाभुकों के नाम पर लिए गए कर्ज, कंपनी के खातों में ट्रांसफर हुई रकम और अन्य राज्यों में सामने आए मामलों के बीच संबंध तलाशने पर है. पुलिस फरार बहन की गिरफ्तारी के लिए भी कार्रवाई कर रही है.
मणि भूषण शर्मा