बिहार में टूटे पैर का ऐसा इलाज! अस्पताल ने प्लास्टर की जगह बांध दिया कार्टून

जहानाबाद में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. सड़क हादसे में पैर टूटने के बाद दो युवकों के पैरों पर प्लास्टर की जगह कार्टून बांधकर उन्हें रेफर कर दिया गया. सदर अस्पताल में भी उन्हें प्लास्टर नहीं लगाया गया. तस्वीर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया और संबंधित डॉक्टरों को नोटिस जारी किया.

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मामले का वीडियो वायरल होने पर तेजस्वी यादव ने सरकार पर बोला हमला. (photo: Screengrabs) मामले का वीडियो वायरल होने पर तेजस्वी यादव ने सरकार पर बोला हमला. (photo: Screengrabs)

सैयद मुशर्रफ इमाम

  • जहानाबाद,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:03 AM IST

बिहार के जहानाबाद से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. सड़क हादसे में घायल दो युवकों के पैर टूटे थे, लेकिन उनका सही से इलाज करने के बजाय पैरों पर कार्टून का टुकड़ा बांधकर अस्पताल से रेफर कर दिया गया. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मरीज को प्लास्टर क्यों नहीं लगाया गया, बल्कि सवाल यह भी है कि जिस सरकारी अस्पताल में मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचता है, वहां उसे बुनियादी चिकित्सा सुविधा तक क्यों नहीं मिल पाई?

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मामला गुरुवार का है. हुलासगंज थाना क्षेत्र के पास दो बाइक की टक्कर में चार युवक घायल हो गए थे. हादसे में दो युवकों के पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो गए. स्थानीय लोगों ने घायलों को हुलासगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. आरोप है कि यहां दोनों घायलों के टूटे पैरों को स्थिर करने के लिए प्लास्टर की जगह कार्टून का टुकड़ा बांध दिया गया. इसके बाद उन्हें जहानाबाद सदर अस्पताल रेफर किया गया. 

उम्मीद थी कि जिला अस्पताल में उनका उचित इलाज होगा, लेकिन यहां भी दोनों के पैरों पर प्लास्टर नहीं चढ़ाया गया और उन्हें पटना पीएमसीएच भेज दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो मामला अधिकारियों तक पहुंचा. स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने मामले का संज्ञान लिया. इसके बाद जिला प्रशासन ने सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के अधीक्षक और डीपीएम को तलब किया. संबंधित डॉक्टरों को शो कॉज नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है.

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एक तस्वीर, कई सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों की देखभाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर जिला अस्पताल में फ्रैक्चर मरीज को सामान्य तरीके से प्लास्टर तक नहीं मिल सकता, तो गंभीर स्थिति वाले मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था कितनी भरोसेमंद है? क्या अस्पताल में जरूरी मेडिकल सामान उपलब्ध नहीं था या फिर मामला कर्मचारियों की लापरवाही का है? प्रशासन की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी.

तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
तस्वीर सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बिहार सरकार पर हमला बोला. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो गई है कि जिला अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर पर प्लास्टर लगाने के लिए भी पैसे नहीं बचे?

अब प्रशासन ने संबंधित डॉक्टरों से जवाब तो मांग लिया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि ऐसी नौबत आई ही क्यों. मरीज के टूटे पैर पर कार्टून बांधना महज एक अस्पताल की लापरवाही है या फिर यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उस तस्वीर को सामने लाता है, जहां कागजों पर सुविधाएं और जमीन पर मरीजों की मजबूरी अलग-अलग नजर आती है.

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