बिहार की पुष्पा को राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा पुरस्कार, बच्चों को अनोखे अंदाज में पढ़ाने के लिए हैं फेमस

बिहार के गोपालगंज की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने सरकारी स्कूल में पढ़ाई के तरीके में नवाचार कर अलग पहचान बनाई है. कुचायकोट के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में बच्चों को खेल और गतिविधियों के जरिए कठिन विषय समझाने वाली पुष्पा का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए हुआ है. देशभर के 48 शिक्षकों में शामिल पुष्पा को 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी.

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पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान.(Photo: ITG) पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान.(Photo: ITG)

विकाश कुमार दुबे

  • गोपालगंज,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:46 PM IST

बिहार के गोपालगंज की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के अपने अनोखे अंदाज से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. राजकीय कन्या मध्य विद्यालय (कुचायकोट) की शिक्षिका पुष्पा का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए हुआ है. देशभर से चुने गए 48 स्कूली शिक्षकों में उनका नाम शामिल है. 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें सम्मानित करेंगी. इस खबर के सामने आने के बाद उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

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आजतक से खास बातचीत में पुष्पा प्रसाद ने कहा कि जब उन्हें अपने चयन की जानकारी मिली तो वह उस पल को शब्दों में बयान नहीं कर सकीं. उन्होंने इसे स्वर्णिम अवसर बताते हुए कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे बिहार का है. ग्रामीण क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन बच्चों की क्षमता पर उनका भरोसा कभी कम नहीं हुआ.

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पुष्पा का मानना है कि ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों को कमतर समझना गलत है. उन्होंने कहा कि इसी क्षेत्र के बच्चे पढ़-लिखकर डीएम बने हैं. उनका अपना परिवार भी ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है. पुष्पा ने बताया कि उनके पिता भी ग्रामीण इलाके से निकलकर सेना में अधिकारी बने थे और वह उनके पदचिह्नों पर चलते हुए यहां तक पहुंची हैं.

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खेल-खेल में पढ़ाई और नए प्रयोग

पुष्पा प्रसाद की पहचान उनके शिक्षण में किए जाने वाले नवाचारों से बनी है. उनका मानना है कि शिक्षक यदि बच्चों की प्रतिभा को नहीं पहचानेंगे तो फिर कौन पहचानेगा. एक ही कक्षा में अलग-अलग क्षमता और रुचि वाले विद्यार्थी होते हैं. इसलिए वह हर बच्चे की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पढ़ाने का तरीका बदलती रहती हैं.

वह रोजाना नई गतिविधियों को पढ़ाई का हिस्सा बनाती हैं और खेल-खेल में बच्चों को विषय के कॉन्सेप्ट तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं. कठिन लगने वाले विषयों को सरल तरीके से समझाना उनके शिक्षण की खासियत है. उनका मकसद सिर्फ पाठ पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों को विषय को समझने और उसका इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना है.

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पुष्पा ने बिहार के शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा कि संसाधन सीमित होने के बावजूद बच्चों को आगे बढ़ाया जा सकता है. उनका कहना है कि अच्छे को बेहतर बनाना आसान हो सकता है, लेकिन किसी कमजोर स्थिति को सुधारकर बेहतर बनाना ही असली परिवर्तन है. इसी सोच के साथ वह सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए लगातार नए प्रयोग करती रही हैं.

विशेष जरूरत वाले बच्चों पर भी फोकस

शिक्षिका ने समावेशी शिक्षा को भी अपने काम का अहम हिस्सा बनाया है. विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए ब्रेल लिपि में शिक्षण सामग्री तैयार की गई. जिन बच्चों को अतिरिक्त सहयोग की जरूरत होती है, उन पर अलग से ध्यान दिया जाता है. प्रयास रहता है कि ऐसे विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय आएं और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि बनी रहे.

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पुष्पा के काम में पढ़ाई के साथ बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझने पर भी जोर दिया जाता है. यही वजह है कि उनके प्रयासों को सरकारी स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की भागीदारी बढ़ाने वाले उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए उनका चयन भी इसी नवाचार, संवेदनशीलता और निरंतर प्रयास की पहचान माना जा रहा है.

सीमित संसाधनों वाले सरकारी विद्यालय में शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने के उनके प्रयासों ने उन्हें जिला और राज्य स्तर पर भी पहचान दिलाई है. उनके काम का फोकस इस बात पर रहा है कि कोई बच्चा सीखने की प्रक्रिया से पीछे न रह जाए. इसके लिए वह अलग-अलग गतिविधियों और जरूरत के मुताबिक शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल करती हैं.

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान

पुष्पा प्रसाद को इससे पहले भी उनके शिक्षण कार्य के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं. उन्हें राजकीय शिक्षक सम्मान-2024, ‘टीचर ऑफ द मंथ’, निपुण शिक्षक सम्मान और जिला स्तर पर उत्कृष्ट सेवा सम्मान से नवाजा जा चुका है. इन उपलब्धियों के अलावा बिहार दिवस 2026 के ‘अप्पन बिहार, निपुण बिहार’ स्टॉल में बेहतर प्रदर्शन के लिए भी उन्हें प्रशस्ति-पत्र मिला था.

अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन उनके शिक्षण सफर की बड़ी उपलब्धि बन गया है. देशभर से चुने गए 48 स्कूली शिक्षकों में शामिल होने के बाद उनके विद्यालय और क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है. पुष्पा का कहना है कि यह सम्मान उन्हें बच्चों के लिए और बेहतर काम करने की प्रेरणा देगा.

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5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु देशभर से चयनित शिक्षकों को सम्मानित करेंगी. इसी समारोह में गोपालगंज की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को भी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 प्रदान किया जाएगा. ग्रामीण बच्चों को नवाचार के जरिए पढ़ाने और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को साथ लेकर चलने के उनके प्रयासों को इस राष्ट्रीय सम्मान के जरिए पहचान मिलेगी.

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