बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सियासी गेम हर रोज बदल रहा है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई बांकीपुर सीट पर जन सुराज के नेता प्रंशात किशार के बाद अब आरजेडी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. आरजेडी ने रेखा गुप्ता को एक बार फिर से उम्मीदवार बनाया है, जिसके बाद सत्ता और विपक्ष की सीधी लड़ाई को त्रिकोणीय दिया है. अब वोट बिखराव से एनडीए की लड़ाई थोड़ी आसान होगी तो प्रशांत किशोर की राह काफी मुश्किलों भरी हो सकती है.
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण ही बीजेपी के अजेय बनने का अहम वजह है. इसके चलते ही नितिन नवीन पांच बार और उनके पिता चार बार विधायक रहे. अब नितिन नवीन के सीट छोड़ने के बाद प्रशांत किशोर अपने जीवन में पहला चुनाव बांकीपुर सीट से लड़ने का फैसला किया.
प्रशांत किशोर के उतरने के बाद कांग्रेस चाहती थी कि विपक्ष बांकीपुर सीट पर कोई उम्मीदवार न उतारे, लेकिन आरजेडी ने सोमवार शाम रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है. आरजेडी के दांव खेलने के बाद प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर सीट पर बीजेपी को मात देना आसान नहीं होगा?
बांकीपुर से पीके का चुनाव डेब्यू
राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी पहला चुनाव बांकीपुर विधानसभा सीट से लड़ रहे हैं. बांकीपुर सीट को बीजेपी 1995 से लगातार ही जीत रही है. इस तरह पीके ने बीजेपी के सबसे मजबूत दुर्ग से चुनाव लड़ने का ऐलान कर सियासी हलचल मचा दी है. प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के कामकाज पर 'जनमत संग्रह' करार देकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है.
बीजेपी ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री ने बीजेपी के रणनीतिकारों को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर कर दिया है. प्रशांत किशोर ने बिहार के ज्वलंत मुद्दे जैसे भोजपुर मुठभेड़, नीट छात्र मामला, कथित टेंडर घोटाला, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शासन जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं. उन्होंने कहा है कि बांकीपुर उपचुनाव लोगों के लिए इन मुद्दों पर अपना फैसला सुनाने का अवसर है. प्रशांत किशोर के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है, जिसके चलते उनके प्रदर्शन का असर उनकी राजनीति दशा और दिशा पर पड़ेगी.
कांग्रेस चाहती थी कि बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर के खिलाफ आरजेडी भी अपना उम्मीदवार न उतारे, लेकिन तेजस्वी यादव इस पर राजी नहीं हुई. कांग्रेस चाहती थी कि बीजेपी के खिलाफ पीके को विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार बनाया जाए, लेकिन आरजेडी तैयार नहीं हुई. आरजेडी ने 2025 में मजबूती से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी रेखा गुप्ता को उतारा है.
RJD के दांव से बिगड़ेगा पीके का गेम
राष्ट्रीय जनता दल ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाकर प्रशांत किशोर का सियासी गेम बिगाड़ दिया है. 2025 में रेखा गुप्ता बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, उस समय उन्हें 46363 वोट मिले थे. अब दोबारा से रेखा गुप्ता फिर से चुनावी मैदान में किस्मत आजमाएंगी. कांग्रेस इस सीट पर 2020 में चुनाव लड़ी थी, उस समय शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे यश सिन्हा को चुनाव लड़ाया था, जो दूसरे नंबर पर रहे थे. 2025 में यह सीट आरजेडी के खाते में चली गई थी.
रेखा गुप्ता पहले कांग्रेस में रही है, जो 2025 के चुनाव से पहले आरजेडी का दामन थाम लिया था. रेखा गुप्ता वैश्य समाज से आती हैं. बांकीपुर में कायस्थ के बाद वैश्य समाज के वोटों की संख्या अच्छी खासी है. आरजेडी ने वैश्य वोटों की सियासी ताकत को समझते हुए ही रेखा गुप्ता पर दांव खेला है. आरजेडी की रणनीति मुस्लिम-यादव और वैश्य वोटों के समीकरण बनाकर बांकीपुर को जीतने का प्लान बनाया है, जो पीके के सारे गणित को बिगाड़ सकता है.
बांकीपुर सीट का जातीय समीकरण
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण ही बीजेपी के लिए जीत की संजीवनी बना हुआ है. यहां पर कुल कुल मतदाताओं की संख्या करीब 3 लाख 91 हजार है. यहां पर सबसे ज्यादा मतदाता कायस्थ समुदाय के हैं. माना जाता है कि 14 फीसदी कायस्थ वोटर हैं, जो 60 से 65 हजार है. कायस्थ वोटों के चलते ही नितिन नवीन और उनके पिता 1995 से लगातार जीतते रहे हैं.
कायस्थ समुदाय के बाद दूसरे नंबर पर यादव वोटर हैं, जो 12 फीसदी (55 से 60 हजार) है. इसके अलावा मुस्लिम वोटर 10 फीसदी, चंद्रवंशी 9 फीसदी, वैश्य समुदाय 9 फीसदी, दलित 8 फीसदी, भूमिहार 7 फीसदी, ब्राह्मण 7 फीसदी, राजपूत 5 फीसदी, कुर्मी 5 फीसदी और कुशवाहा समाज का 3 फीसदी वोट है. इस सीट पर सबसे निर्णायक भूमिका कायस्थ समाज की है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा का कोर वोटर माना जाता रहा है.
आरजेडी से दांव से क्या बढ़ेगी मुश्किल
कायस्थों के साथ वैश्य, राजपूत और ब्राह्मण वोटर्स बीजेपी की जीत का आधार है. वहीं, मुस्लिम, यादव और दलित वोटर भी काफी अहम माने जाते हैं. मुस्लिम और यादव आरजेडी का कोर वोटबैंक माने जाते हैं. बांकीपुर सीट पर कुर्मी, चंद्रवंशी और कोइरी मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है. ऐसे में प्रशांत किशोर सवर्ण और अतिपिछडे समाज के वोटबैंक के सहारे अपनी जीत का तानाबाना बुन रहे थे.
आरजेडी ने वैश्य समाज की रेखा गुप्ता को प्रत्याशी बनाकर नया समीकरण गढ़ने का दांव चल दिया है, जिससे बीजेपी के कोर वोटबैंक के छिटकने का खतरा पैदा हो गया तो प्रशांत किशोर के लिए भी सियासी टेंशन बन गया है. वैश्य समाज अगर आरजेडी के पक्ष में मतदान करेगी तो बीजेपी उम्मीदवार को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है तो पीके की चाल भी बिगाडेगा?
कुबूल अहमद