क्या नंबर प्लेट छिपाना अपराध है? सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने बता दिया क्या है कानून

Number plate Rule: पुलिस का आरोप था कि होंडा एक्टिवा चालक ने चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट छिपाई थी. जिसके बाद पुलिस न केवल चालान काटा बल्कि IPC की धारा 420 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 80(A) के तहत FIR दर्ज की. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

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सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नंबर छुपाने की दशा में जुर्माना लग सकता है, लेकिन अपराध नहीं माना जा सकता. Photo: ITG सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नंबर छुपाने की दशा में जुर्माना लग सकता है, लेकिन अपराध नहीं माना जा सकता. Photo: ITG

आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

Supreme Court verdict on number plate: अगर किसी वाहन की नंबर प्लेट ढकी हुई मिलती है, तो क्या इसे धोखाधड़ी माना जाएगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि वाहन की नंबर प्लेट छिपाना मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) का उल्लंघन हो सकता है और इसके लिए जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन इसे धोखाधड़ी यानी IPC की धारा 420 का अपराध नहीं माना जा सकता. अदालत ने कहा कि बिना ठोस सबूत के केवल अनुमान के आधार पर किसी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता.

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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया. मामला तेलंगाना के रहने वाले मोहम्मद अब्दुल अहद शाकिर से जुड़ा था, जो अपनी होंडा एक्टिवा चला रहे थे. उनकी स्कूटर की पीछे वाली नंबर प्लेट पर ब्लैक मास्क लगा हुआ था. गश्त पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने उन्हें रोककर न केवल चालान काटा बल्कि IPC की धारा 420 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 80(A) के तहत FIR दर्ज की. 

पुलिस का आरोप था कि उन्होंने चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट छिपाई थी. बाद में चार्जशीट दाखिल हुई और मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान भी ले लिया. इस घटना के बाद अब्दुल ने पहले तेलंगाना हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि पहली नजर में मामला बनता है. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की यह आशंका कि नंबर प्लेट चालान से बचने के लिए छिपाई गई थी, केवल एक अनुमान है. अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी का मामला तभी बनता है जब किसी को बेईमानी से गुमराह किया जाए, उससे कोई काम कराया जाए और उसकी संपत्ति या अधिकार का नुकसान हो. इस मामले में ऐसे कुछ भी नहीं है.

आगे की नंबर प्लेट ने बदला गेम

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूटर की केवल पीछे वाली नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि आगे की नंबर प्लेट पूरी तरह साफ और पढ़ने योग्य थी. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि वाहन चालक ने अपनी पहचान छिपाने की कोई सोची-समझी कोशिश की थी. अदालत ने माना कि इस मामले की सुनवाई जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई. अदालत ने कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग की व्यवस्था लगभग न के बराबर है और यही सड़क हादसों की बड़ी वजहों में से एक है. कोर्ट ने कहा कि रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स में अनिवार्य रूप से व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन लगाए जाएं.

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