गुजरात के नवसारी जिले में इस मानसून सीजन में कुदरत का भीषण प्रकोप देखने को मिला है, जिले में अब तक औसतन 2,200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि पूरे सीजन की सामान्य बारिश का लगभग 115 प्रतिशत है. इस अप्रत्याशित और मूसलाधार बारिश ने सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय किसानों पर किया है, जिससे धान और गन्ने की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई है.
जिले के जलालपुर तालुका स्थित तवड़ी गांव के खेतों का दृश्य बेहद चिंताजनक है, यहां चारों तरफ केवल जलजमाव और सड़ी-गली फसलें ही नजर आ रही हैं. बीती 23 और 24 जुलाई को इलाके में महज 48 घंटों के भीतर 35 इंच से अधिक बारिश हुई थी. इस प्राकृतिक आपदा को 10 दिन बीत जाने के बाद भी खेतों में तबाही के स्पष्ट निशान मौजूद हैं. नजर जहां तक जाती है, वहां धान और गन्ने की फसलें 100 प्रतिशत तक नष्ट हो चुकी हैं.
'50 वर्षों में ऐसी तबाही नहीं देखी'
तवड़ी गांव के पीड़ित किसान जयदीप ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, "पिछले 50 सालों में हमने न तो कभी ऐसी बारिश देखी है और न ही सुनी. 23 जुलाई को हुई बारिश के बाद तो खेतों की तरफ जाने लायक स्थिति ही नहीं बची. अधिकांश खेतों में 5 से 10 फीट तक पानी भर गया, जिसने धान और गन्ने की पूरी फसल को जलमग्न कर दिया."
जयदीप के अनुसार, किसानों ने 15 जुलाई के आसपास ही बड़ी उम्मीदों के साथ धान की रोपाई की थी, जिसमें प्रति बीघा 8,000 से 10,000 रुपये तक का खर्च आया था, लेकिन हफ्ते भर बाद आई इस आपदा ने उनकी पूरी पूंजी और मेहनत पानी में बहा दी. अब किसानों के पास दोबारा बुआई करने की न तो हिम्मत बची है और न ही आर्थिक संबल. हालांकि कुछ किसानों ने जोखिम उठाकर दोबारा रोपाई का प्रयास किया है, लेकिन उसकी सफलता पूरी तरह मौसम के मिजाज पर निर्भर करेगी.
अब केवल सरकारी सहायता का सहारा
अपनी मेहनत और पूंजी गंवा चुके किसान अब राहत पैकेज के लिए सरकार की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं. किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष सरकार की ओर से प्रति हेक्टेयर 13,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई थी.
अतुल तिवारी