'MSP की लड़ाई बाकी है', 25 नवंबर को टिकरी बॉर्डर की ओर कूच करेंगे किसान

बताया गया है कि आज फतेहाबाद के रतिया इलाके में किसानों की एक अहम बैठक हुई थी. उस बैठक में फैसला लिया गया कि पगड़ी संभाल जट्टा किसान संगठन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में वाहन 25 नवंबर को टिकरी बॉर्डर की ओर जाएंगे. किसानों का कहना है कि अभी एम एस पी, पराली और बिजली विधेयक को लेकर लड़ाई जारी है.

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किसानों की लड़ाई अभी बाकी है किसानों की लड़ाई अभी बाकी है

जितेंद्र मोंगा

  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 8:24 PM IST
  • 25 नवंबर को टिकरी बॉर्डर की ओर कूच करेंगे किसान
  • बोले- MSP की लड़ाई बाकी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जरूर तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर दिया है, लेकिन किसानों के लिए अभी ये लड़ाई खत्म नहीं हुई है. वे कहने को इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन उनकी नजरों में अभी और भी कई मुद्दों पर संघर्ष करना है. अब खबर है कि किसान 25 नवंबर को टिकरी बॉर्डर की ओर कूच करने जा रहे हैं.

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बताया गया है कि आज फतेहाबाद के रतिया इलाके में किसानों की एक अहम बैठक हुई थी. उस बैठक में फैसला लिया गया कि पगड़ी संभाल जट्टा किसान संगठन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में वाहन 25 नवंबर को टिकरी बॉर्डर की ओर जाएंगे. किसानों का कहना है कि अभी एम एस पी, पराली और बिजली विधेयक को लेकर लड़ाई जारी है और उन्हें इसमें भी जीत हासिल करनी है. ये भी स्पष्ट कर दिया गया है कि ये प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देशों पर ही किया जाएगा.

अब जानकारी के लिए बता दें कि आज ही संयुक्त किसान मोर्चा की समन्वय समिति की बैठक हुई थी. उस बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि अभी के लिए आंदोलन को खत्म नहीं किया जा रहा है और जो जिस तारीख को तय था, हर वो कार्यक्रम किया जाएगा. इसी कड़ी में 29 नवंबर को किसान संसद कूच भी करने जा रहे हैं. उसी दिन शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो रही है. 

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वैसे अभी के लिए ये आंदोलन जरूर जारी है लेकिन किसानों का रुख पहले की तुलना में नरम पड़ा है. खुद राकेश टिकैत ने आजतक से बात करते हुए कहा है कि अब उन्हें सदन में कानून वापसी की प्रक्रिया शुरू होती देखनी है. इसके बाद वे अपना आंदोलन खत्म कर देंगे. उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी है एक साल बाद सरकार ने अपनी तरफ से बातचीत का कदम बढ़ाया है. अब जल्द से जल्द किसानों को बुलाकर मसलों को सुलझा लेना चाहिए.

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