दूध तो दूध, गोबर के भी दाम! ऐसे बनाएं वर्मीकम्पोस्ट, करें डबल कमाई

गाय पालते हैं तो कमाई का हिसाब सिर्फ दूध तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है. जिस गोबर को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, वही आपकी डेयरी से अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकता है.

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गोबर से वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद तैयार करके किसानों, नर्सरी और पौधे लगाने वाले ग्राहकों को बेचा जा सकता है. (File Photo) गोबर से वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद तैयार करके किसानों, नर्सरी और पौधे लगाने वाले ग्राहकों को बेचा जा सकता है. (File Photo)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:08 AM IST

अगर आप भी गाय पालते हैं तो सिर्फ दूध से होने वाली आमदनी पर निर्भर मत रहें. कमाई सिर्फ दूध से ही हो, यह जरूरी नहीं है. जिस गोबर को अक्सर लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, वही पशुपालक के लिए कमाई का दूसरा जरिया बन सकता है. गोबर से वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद तैयार करके इसे किसानों, नर्सरी और पौधे उगाने वाले लोगों को बेचा जा सकता है.

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बड़े स्तर पर काम किया जाए तो 200 बेड (पक्का या कच्चा टैंक) से हर महीने करीब 30 टन वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने का अनुमान है. ₹5 प्रति किलो के भाव पर इसकी बिक्री करीब ₹1.50 लाख और ₹10 प्रति किलो के भाव पर ₹3 लाख तक पहुंच सकती है. हालांकि यह बिक्री का अनुमान है, इसमें लागत और दूसरे खर्च शामिल नहीं हैं.

दूध के साथ गोबर से भी कमाई

भारत में बड़े स्तर पर डेयरी फार्मिंग होती है. गांवों से लेकर शहरों के आसपास तक लोग गाय पालकर दूध बेचते हैं. लेकिन पशुओं के चारे, दवाइयों और देखभाल पर हर महीने अच्छा-खासा खर्च भी होता है. ऐसे में सिर्फ दूध की कमाई पर निर्भर रहने के बजाय डेयरी से निकलने वाली दूसरी चीजों का इस्तेमाल भी कमाई बढ़ाने में मदद कर सकता है.

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गोबर रोज निकलता है. कई जगह इसका इस्तेमाल उपले बनाने में होता है, जबकि कुछ लोग इसे खेत या आसपास डाल देते हैं. लेकिन इसी गोबर को सही तरीके से तैयार करके वर्मीकम्पोस्ट बनाई जा सकती है. जैविक खेती और पौधों के लिए इस्तेमाल होने वाली खाद की मांग के चलते इसके लिए स्थानीय बाजार तलाशा जा सकता है.

ताजा गोबर सीधे केंचुओं के हवाले न करें

वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए ताजा गोबर सीधे बेड में डालना ठीक नहीं है. ताजे गोबर में गर्मी ज्यादा होती है, जिससे केंचुओं को नुकसान पहुंच सकता है. सबसे पहले गोबर को साफ और खुली जगह पर इकट्ठा करें. जरूरत के हिसाब से इसमें पानी मिलाकर करीब 7 दिन तक छोड़ दें. इस दौरान गोबर को 1-2 बार पलटा जा सकता है. इससे इसकी गर्मी कम करने में मदद मिलती है. गोबर तैयार होने के बाद ही इसे वर्मीकम्पोस्ट बेड में इस्तेमाल करें.

ऐसे बनाएं वर्मीकम्पोस्ट बेड

इसके लिए ऐसी जगह चुनें जहां तेज धूप और बारिश सीधे न आती हो. जमीन पर मोटी प्लास्टिक शीट बिछाकर बेड तैयार किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर करीब 9 X 4 मीटर का बेड बनाया जा सकता है. जगह के हिसाब से इसका आकार छोटा-बड़ा भी रखा जा सकता है. तैयार गोबर को बेड में फैलाएं और उसमें केंचुए डालें. इसके ऊपर सूखी पराली या जूट की बोरी रखी जा सकती है. बेड में नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर हल्का पानी छिड़कें. ध्यान रखें कि बेड में पानी जमा न हो. बहुत ज्यादा पानी केंचुओं के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

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खाद 2 महीने में हो जाएगी तैयार

केंचुए, गोबर और दूसरे जैविक पदार्थ को धीरे-धीरे बारीक खाद में बदल देते हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान नमी पर देना होता है. गोबर बहुत सूख गया तो केंचुओं की गतिविधि कम हो सकती है. दूसरी तरफ लगातार पानी जमा रहने से भी खाद खराब हो सकती है. गर्मी में बेड को छाया में रखना और जरूरत के मुताबिक पानी का छिड़काव करना जरूरी है. सर्दियों में पानी का इस्तेमाल थोड़ा संभलकर करना चाहिए. आमतौर पर करीब 2 महीने में वर्मीकम्पोस्ट तैयार हो सकती है. तैयार खाद का रंग गहरा और बनावट भुरभुरी होती है.

खाद के साथ केंचुए भी हैं काम के

जब खाद तैयार हो जाए तो कुछ दिनों के लिए पानी देना रोक सकते हैं. इसके बाद खाद को एक तरफ इकट्ठा करने पर केंचुए दूसरी तरफ जा सकते हैं. इन्हें अलग करके नए बेड में इस्तेमाल किया जा सकता है. तैयार खाद को छानकर कुछ समय छाया में सुखाने के बाद पैक किया जा सकता है. जरूरत के हिसाब से 5, 10 और 25 किलो के बैग बनाए जा सकते हैं.

20 बेड से शुरुआत, फिर इसे बढ़ाएं

अगर शुरुआत में 20 बेड लगाए जाते हैं, तो करीब 3 महीने में लगभग 17 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट तैयार होने का अनुमान है. इससे शुरुआती स्तर पर करीब ₹10 हजार की बिक्री हो सकती है. जैसे-जैसे काम का अनुभव और ग्राहक बढ़ें, बेड की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है. करीब 200 बेड होने पर हर महीने लगभग 30 टन वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने का अनुमान है. अगर खाद ₹5 प्रति किलो बिकती है, तो 30 टन यानी 30,000 किलो की बिक्री करीब ₹1.50 लाख होगी.

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वहीं ₹10 प्रति किलो का भाव मिलने पर यही बिक्री ₹3 लाख तक पहुंच सकती है. यहां एक बात समझना जरूरी है कि ₹1.50 लाख या ₹3 लाख बिक्री का आंकड़ा है, सीधा मुनाफा नहीं. इसमें मजदूरी, पैकिंग, पानी, जगह, केंचुए, छंटाई और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्च घटाने होंगे. अगर पशुपालक के पास अपना गोबर और जगह पहले से है, तो लागत को कम रखने में मदद मिल सकती है.

खाद बेचने के लिए कहां मिलेंगे ग्राहक?

वर्मीकम्पोस्ट बेचने के लिए बहुत दूर का बाजार तलाशना जरूरी नहीं है. आसपास के किसान, नर्सरी, जैविक खेती करने वाले लोग और घर में पौधे लगाने वाले ग्राहक संभावित खरीदार हो सकते हैं. थोक में बड़ी मात्रा बेचने के बजाय छोटे पैकेट बनाकर रिटेल में बेचने पर कुछ मामलों में बेहतर भाव मिल सकता है. हालांकि कीमत स्थानीय मांग, खाद की गुणवत्ता, पैकिंग और बाजार के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है.

गोबर से सिर्फ खाद ही नहीं उपले भी

गोबर का इस्तेमाल सिर्फ वर्मीकम्पोस्ट बनाने में ही नहीं किया जा सकता. इससे उपले और दूसरे उपयोगी उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं. यानी डेयरी से निकलने वाला गोबर अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो वह सिर्फ कचरा नहीं रहता, बल्कि कमाई का अतिरिक्त जरिया बन सकता है. डेयरी कारोबार में दूध सबसे बड़ी कमाई का जरिया हो सकता है, लेकिन गोबर को बेकार छोड़ने के बजाय उससे खाद तैयार कर बेचने से आमदनी का एक और रास्ता बनाया जा सकता है. खासकर उन पशुपालकों के लिए, जिनके पास पहले से पशु, गोबर और काम करने की जगह मौजूद है, यह मॉडल अतिरिक्त कमाई का विकल्प बन सकता है.

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