
पशुपालक अगर बकरियों की खास नस्लों की सही जानकारी रखें और उनकी उचित देखभाल करें, तो कम लागत में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद, कुछ खास नस्लें पशुपालकों को बेहतर उत्पादन और शानदार लाभ दिला सकती हैं. आइए जानते हैं बकरियों की 7 प्रमुख नस्लों के बारे में, जिनसे पशुपालकों को फायदा मिल सकता है.
जमुनापारी बकरी
जमुनापारी बकरी भारत की फेमस स्वदेशी बकरी नस्लों में से एक है, यह उत्तर प्रदेश के यमुना नदी क्षेत्र खासकर इटावा, आगरा और मथुरा में पाई जाती है. यह नस्ल अपनी विशाल शरीर संरचना और रोमन नोज (तोते जैसी नाक) के कारण आसानी से पहचानी जा सकती है.
जमुनापारी बकरी में नर का वजन लगभग 65–90 किलोग्राम और मादा का 40–60 किलोग्राम तक होता है. पशुपालन और डेयरी विभाग के मुताबिक, यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली बकरियों में शामिल है. जो हर दिन औसतन 1.5 से 2.5 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है.

जखराना बकरी
जखराना बकरी राजस्थान की प्रमुख बकरी नस्लों में गिनी जाती है, जिसे विशेष रूप से उच्च दूध उत्पादन क्षमता के लिए जाना जाता है. इसका रंग आमतौर पर गहरा काला होता है, इसका शरीर आकार में बड़ा और मजबूत होता है, जो इसे आकर्षक बनाने में मदद करता है.
यह नस्ल गर्म और शुष्क जलवायु में भी आसानी से अनुकूलित हो जाती है. कम रख-रखाव में बेहतर उत्पादन देने की क्षमता के कारण जखराना बकरी छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए फायदेमंद मानी जाती है.
ओस्मानाबादी बकरी
ओस्मानाबादी बकरी महाराष्ट्र की फेमस देसी नस्ल है, यह अपने मजबूत शरीर, तेज बढ़ने की शक्ति और कम देखभाल में बेहतर उत्पादन के लिए जानी जाती है. इस नस्ल का पालन दूध और मांस के लिए किया जाता है. यह नस्ल गर्म और शुष्क जलवायु में भी आसानी से अनुकूलित हो जाती है. यह खास नस्ल कम चारे में अच्छा उत्पादन देने के लिए भी जानी जाती है.
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बारबरी बकरी
बारबरी बकरी उत्तर भारत में पाई जाने वाली एक लोकप्रिय देसी नस्ल है, जो औसतन प्रतिदिन लगभग 1 किलोग्राम तक दूध देने की क्षमता के लिए जानी जाती है. आकार में अपेक्षाकृत छोटी इस बकरी के शरीर पर सफेद रंग के साथ हल्के भूरे या लाल-भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जबकि इसके कान छोटे और सीधे होते हैं.
कम जगह में पालन के अनुकूल होने के कारण यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेस्ट विकल्प मानी जाती है. संतुलित आहार, स्वच्छ आवास और नियमित देखभाल की मदद से पशुपालकों को इससे शानदार फायदा मिल सकता है.
सिरोही बकरी
सिरोही बकरी का पालन दूध उत्पादन के लिए किया जाता है. यह खास नस्ल मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में पाई जाती है. अपनी मजबूत कद-काठी, तेज वृद्धि दर और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फेमस है.
यह नस्ल कम पानी और सीमित चारे की उपलब्धता में भी आसानी से रह सकती है. कम लागत में बेहतर उत्पादन देने की इसकी क्षमता छोटे और मध्यम किसानों के लिए इसे भरोसेमंद और लाभकारी विकल्प बनाती है.
गंजाम बकरी
गंजाम बकरी ओडिशा की खास स्वदेशी बकरी नस्लों में से एक है, जो अपनी मजबूत शारीरिक बनावट और स्थानीय जलवायु के अनुरूप ढलने की क्षमता के लिए जानी जाती है. यह नस्ल कठिन मौसम, खुले चरागाह और सीमित देखभाल में भी आसानी से रह सकती है, औसतन यह प्रतिदिन लगभग आधा लीटर दूध दे सकती है.
सुरती बकरी
सुरती बकरी गुजरात की पारंपरिक दूध देने वाली नस्ल है, जो मुख्य रूप से सूरत, वडोदरा और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है. स्थानीय जलवायु के अनुरूप ढलने की इसकी क्षमता इसे क्षेत्रीय पशुपालकों के लिए उपयुक्त बनाती है. इसके पालन में संतुलित आहार, साफ पानी, साफ-सुथरा आवास और नियमित स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान देना फायदेमंद माना जाता है.