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करोड़पति पशुपालक: ऊपर बकरियां और नीचे मुर्गियां, एक ही जगह से दोहरी कमाई, तकनीक देख सब हैरान

Goat Farming Subsidy: छिंदवाड़ा के नवीन रघुवंशी ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 1 करोड़ का आधुनिक बकरी फार्म बनाया है. उनके बेटे मंथन को 'एग्री इंफ्लूएंसर' अवॉर्ड मिला है, वहीं जिले की महिला किसानों ने प्राकृतिक खेती में प्रदेश स्तर पर सम्मान पाया है.

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एक ही फार्म में बकरी और मुर्गी पालन का अनूठा मॉडल.(Photo:ITG)
एक ही फार्म में बकरी और मुर्गी पालन का अनूठा मॉडल.(Photo:ITG)

National Livestock Mission: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के शासन के प्रयास अब जमीन पर रंग ला रहे हैं. चौरई विकासखंड के ग्राम बांकानागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के जरिए बकरी पालन को एक हाई-टेक उद्योग में बदल दिया है. उनका यह फार्म अब पूरे क्षेत्र के लिए एक रिसर्च सेंटर जैसा बन गया है.

फार्म में उन्नत सिरोही नस्ल की 175 बकरियां और बकरे हैं. बीमार बकरियों के लिए अलग क्वारंटाइन शेड और बैठने के लिए 4 फीट ऊंचा प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है. प्लेटफॉर्म के ऊपर बकरियां रहती हैं, तो ठीक उसके नीचे कड़कनाथ मुर्गियों का पालन हो रहा है.

यानी एक ही जगह से दोहरी कमाई. फार्म की कुल लागत 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये का अनुदान (सब्सिडी) स्वीकृत है. 

मंथन रघुवंशी बने 'एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर'
नवीन रघुवंशी के पुत्र मंथन रघुवंशी ने अपनी जड़ों से जुड़कर खेती को डिजिटल पहचान दी है. वे यूट्यूब और इंस्टाग्राम के जरिए हज़ारों युवाओं को उन्नत कृषि और मक्का उत्पादन सिखा रहे हैं. इसी प्रभावी योगदान के लिए उन्हें 'एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026' पुरस्कार से नवाजा गया है. 

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प्राकृतिक खेती में छिंदवाड़ा की महिलाओं का डंका

उधर, छिंदवाड़ा जिले के ही मोहखेड़ ब्लॉक की महिला किसान ज्योति सोमकुंवर ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने नवाचार, अनुभव और जमीनी प्रयासों से प्रदेश स्तर पर पहचान बनाने में सफलता पाई है.

सोमकुंवर ने हकदर्शिका संस्था से जुड़कर किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के अपने अनुभव साझा किए. नव गठित पांढुर्णा जिले के विकासखंड सौंसर से महिला किसान मीता धुर्वे और कविता सिरसाम ने भी बड़ादेव जैविक उत्पादक समूह के माध्यम से ग्राम जोबनढाना में सृजन संस्था के सहयोग से संचालित जैविक उत्पाद केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाल. 

उन्होंने बताया कि किस प्रकार जैविक उत्पाद बनाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है और इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं. मोहखेड़ और सौंसर ब्लॉक की जैविक उत्पाद केंद्र से जुड़ी महिला किसानों के प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के किए का रहे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सराहा गया. 

प्राकृतिक खेती में छिंदवाड़ा की महिलाओं का डंका

महिला किसानों की यह पहल न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है, बल्कि प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दे रही है.

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