एक वक्त बाद दुधारू पशु दूध देना बंद कर देते हैं. ऐसे में कई किसान उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं. कई राज्यों में गाय और भैंसों को लावारिस छोड़ देने पर सजा का भी प्रावधान है. हालांकि, दूध देना बंद करने के बाद भी गाय और भैंसों को पालकर किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. सरकार भी ऐसे गायों के पालन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है.
जैविक खेती में गाय-भैसों का अहम रोल
केंद्र सरकार की तरफ से जैविक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है. किसानों को इसके लिए सब्सिडी दी जाती है. जैविक खेती में गाय और भैंसों का सबसे ज्यादा अहम रोल है. गौ आधारित खेती कर किसान बढ़िया मुनाफा हासिल कर सकते हैं. गाय से मिलने वाले गोबर और मूत्र से तैयार होने वाली खाद 'जीवामृत' बनाकर अपनी फसलों की उपज भी बढ़ा सकते हैं. साथ ही इसे अन्य किसानों को बेच बढ़िया मुनाफा भी कमा सकते हैं.
जीवामृत से कमा सकते हैं मुनाफा
जीवामृत बनाने के लिए एक ड्रम में 200 लीटर पानी डालें. 10 किलोग्राम ताजा गाय का गोबर, 10 लीटर गाय का मूत्र, 1 किलोग्राम बेसन, 1 किग्रा पुराना गुड़ और 1 किग्रा मिट्टी को मिला लें. इस प्रकिया को पूरा करने के बाद इसे 48 घंटे के लिए छाया में रख दें. 2 से 4 दिन बाद यह मिश्रण इस्तेमाल के लिये तैयार हो जायेगा.
वर्मीकंपोस्ट बेच बढ़िया आमदनी
इसके अलावा किसान गाय के गोबर से वर्मीकंपोस्ट भी बना सकते हैं. बाजार में ये कंपोस्ट अच्छे रेट पर बिकते हैं. सबसे पहले मिट्टी की मोटी परत के ऊपर पानी छिड़ककर मिट्टी को 50 से 60 प्रतिशत नम कर लें. फिर 1000 केंचुआ प्रति वर्ग मीटर की दर से मिट्टी में छोड़ दें. इसके बाद मिट्टी की मोटी परत के ऊपर गोबर या उपले थोड़ी-थोड़ी दूर 8 से 10 जगह पर डाल दें तथा फिर उसके ऊपर तीन से चार इंच के सूखे पत्ते, घास या पुआल की मोटी तह बिछा दें. तीस दिन के बाद ढकने वाले टाट के बोरों, ताड़ या नारियल के पत्तों को हटाकर इसमें वानस्पतिक कचरे को या सूखे वानस्पतिक पदार्थों के साथ 60:40 के अनुपात में हरा वानस्पतिक पदार्थ मिलाकर दो से तीन इंच मोटी परत फैलाई जाती है . इसके ऊपर 8 से 10 गोबर के छोटे-छोटे ढेर रख दिये जाते हैं. गड्ढा भर जाने के 45 दिन बाद केंचुआ खाद तैयार हो जाती है.
छत्तीसगढ़ में खरीदी जा रही है गोमूत्र
छत्तीसगढ़ सरकार गौमूत्र की खरीद प्रति लीटर 4 रुपये है. गोधन न्याय मिशन योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूह गौमूत्र से जीवामृत और कीट नियंत्रण उत्पाद तैयार कराया जा रहा है. इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से ट्रेनिंग भी दी जा रही है. इसके अलावा अन्य राज्यों की सरकारें भी कुछ इस तरह के प्लान के साथ सामने आ रही हैं.