अधिकतर लोगों को लगता है नींद में खर्राटे लेने की समस्या सिर्फ इंसानों के साथ है. हालांकि, ऐसा नहीं है. कई बार पशु भी खर्राटे लेते हैं. ये उनमें किसी बीमारी के होने का संकेत भी हो सकते हैं. पशुओं में खर्राटे संबंधी बीमारियों को स्नोरिंग डिसीज कहते हैं. ज्यादातर मामलों में पशुओं में स्नोरिंग की समस्या गलत पोजीशन में सोने की वजह से भी होती है.
सांस की दिक्कतों के चलते पशुओं में आती है ये समस्या
पशु चिकित्सकों की मानें तो जब जानवर को सांस लेने में दिक्कत होती है तो उनके साथ खर्राटे की समस्या आती है. अक्सर पशु जब गलत तरीके से सोता है तो उसके सांस संबंधी दिक्कतें होती हैं. बता दें पशुओं के साथ ऐसी समस्या आने पर इग्नोर ना करें, तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
नाक और मुंह के रोगों के चलते भी पनप सकती है खर्राटे की बीमारी
विशेषज्ञ कहते हैं कि पशुओं के नाक और मुंह के रोगों के चलते भी उनमें खर्राटे की बीमारी पनपती है. इन रोगों के होने के पीछे दूषित पानी का बहुत बड़ा हाथ होता है. दूषित पानी के माध्यम से लार्वा द्वारा कीटाणु पशु की नाक की चमड़ी में प्रवेश करते हैं. इनके द्वारा पशु की नाक में बहुत ज्यादा तादाद में अंडे देने से नाक के रोगों की शुरुआत होती है. पशुओं की चमड़ी में प्रवेश करके कीटाणु जिस जगह अंडे देते हैं वहां की धमनियां फूल जाती हैं. उस जगह पीप भी तैयार होता है. इस दौरान पशुओं को सांस लेने में तकलीफ होती है, जिससे उन्हें खर्राटे की समस्या आने लगती है.
पशुओं की साफ-सफाई का रखें ध्यान
पशुओं को अगर स्वस्थ रखना है तो सबसे पहले उन्हें साफ-सुथरा रखें. उनके बाड़े को साफ रखें. सर्दी हो या गर्मी बाड़े की साफ-सफाई रोज करें. पशुओं को साफ और ताजा पानी दें. टंकी की पानी पशुओं को देने से बचें. अगर गाय-भैंस या किसी भी पशु की नाक से कोई चिपचिपा पदार्थ बह रहा हो तो उसकी जांच जरूर करा लें.