कम लागत में जबरदस्त मुनाफे के चलते किसानों के बीच बांस की खेती काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. बढ़िया मुनाफे के चलते इसे खेती-किसानी का हरा सोना भी बोला जाता है. मध्य प्रदेश के नीमच के रहने वाले कमलाशंकर विश्वकर्मा ने अब इसी हरे सोने की खेती से अपनी तकदीर बदल रहे हैं. कमलाशंकर ने अपने खेत में 1100 बांस के पौधे लगाए थे. इन्हें लगे 2 साल हो गए हैं.तीसरे साल से इसकी कटाई शुरू हो जाएगी. वह उम्मीद जता रहे हैं कि कटाई शुरू होते ही उन्हें लाखों का मुनाफा मिलना शुरू हो जाएगा.
बांस की ये है खासियत
बंजर जमीन को भी बांस की खेती से सही बनाया जा सकता है. यह किसी भी मौसम में खराब नहीं होती. बांस की एक बार खेती करके कई साल तक इससे उपज लिया जा सकता है. मध्यप्रदेश के नीमच जिले के भाटखेडी गांव के कमलाशंकर विश्वकर्मा बताते हैं कि खेती-किसानी में आमदनी बढ़ाने के लिए वर्ष 2020-21 में इस योजना का लाभ लिया.
इन फसलों की भी साथ में कर रहे हैं खेती
किसान कमलाशंकर विश्वकर्मा बांस के साथ पहले साल में सह-फसल के रूप में अश्वगंधा एवं शतावरी की फसल लगाकर मुनाफा कमा रहे हैं. वह अपने खेत खेत में लगभग 30 से 40 प्रकार की औषधियों को भी प्राकृतिक रूप से संरक्षित कर रहे हैं. इसके अलावा तीसरे साल बांस की कटाई के बाद बेम्बू फर्नीचर एंड हैंडीक्राफ्ट उद्योग स्थापित करने का प्लान है.
बांस की मांग की निरंतर बनी रहती है
बांस उन कुछ उत्पादों में से एक है जिनकी निरंतर मांग बनी रहती है. कागज निर्माताओं के अलावा बांस का उपयोग कार्बनिक कपड़े बनाने के लिए किया जाता है जो कपास की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं. बांस की खेती अत्यधिक ठंडी जगह पर नहीं की जाती. इसके लिए गर्म जलवायु परिस्थितियों की जरूरत होती है, लेकिन 15 डिग्री से नीचे का मौसम बांस के लिए उपयुक्त नहीं होता है. इसकी खेती से किसान आराम से लाखों रुपये सालाना कमा सकता है.