जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के बॉर्डर इलाके डूंगी ब्लॉक के गावों में खेती में बड़ा बदलाव हो रहा है. यहां के किसान पारंपरिक खेती के इतर ऑर्गेनिक यानी जैविक सब्जियों के उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं. किसानों को सरकारी योजनाओं की भी पूरी मदद मिल रही है. बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से किसानों की मदद के लिए कई ऐसी योजनाएं चल रही हैं, जिनका उद्देश्य है कि किसान रासायनिक खेती की जगह प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं. जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े और उत्पादों की बाजार में अच्छी कीमत मिले.
बहु-फसली खेती और ऑर्गेनिक सब्जियों से मिला लाभ
राजौरी जिले के डूंगी ब्लॉक के सीमावर्ती गांवों के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर शुद्ध जैविक (ऑर्गेनिक) सब्जियां उगा रहे हैं. छोटे-छोटे खेतों को अब वे बहुत उत्पादक और बहु-फसली खेती के खेतों में बदल रहे हैं. सरकार की होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (HADP) जैसी योजनाओं से भी किसानों को मदद मिल रही है. जिसमें किसानों को ट्रेनिंग, बीज, खाद और बाजार की सुविधा मिल रही है. इससे उनकी कमाई बढ़ रही है और जीवन बेहतर हो रहा है.
पॉलीहाउस से सालभर सब्ज़ियों की खेती संभव
केरी इलाके के रहने वाले एक किसान ने बताया कि हम मौसम के हिसाब से हर फसल बोते हैं. अभी फूलगोभी, पत्ता गोभी, शलजम, मूली जैसी कई सब्जियां लगी हुई हैं. खेती से ही जीवनयापन के लिए आमदनी होती है. सरकार की योजनाओं के तहत हाई-टेक पॉलीहाउस भी दिए जा रहे हैं, जिससे किसान पूरे साल सब्जियां उगा सकते हैं. ये पॉलीहाउस सब्ज़ियों को ठंड, बारिश और खराब मौसम से बचाते हैं. इससे किसानों को सीजन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती और आय नियमित बनी रहती है.
वहीं, एक महिला किसान ने बताया कि खेत में हमने अपना खुद का खाद इस्तेमाल किया और प्याज के पौधे बोए. हम हाइब्रिड बीज बोते हैं, जिन्हें खरीदने लोग आते हैं. मूली, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पत्ता गोभी, पालक समेत अन्य सब्जियों की खेती से ही जीविका चलती है. मोदी सरकार की योजनाएं भी मददगार साबित हो रही हैं.
बता दें कि रसायनमुक्त सब्जियां स्वस्थ के लिए अच्छी होती हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती हैं. सीमावर्ती इलाके में यह बदलाव न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि इलाके की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है. सरकार की मदद और किसानों की मेहनत से राजौरी के सीमावर्ती गांव अब जैविक खेती के मॉडल बन रहे हैं.