भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों की श्रृंखला इस सप्ताह उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को अस्थिर बनाए रखेगी. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश, आंधी और 30–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है. यह बारिश जहां बढ़ती गर्मी से अस्थायी राहत देगी, वहीं इसका समय किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है.
रबी फसलों पर असर
अनियमित बारिश और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा खतरा गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों पर है. इस समय ये फसलें पकने या कटाई के चरण में हैं.
खरीद और गुणवत्ता पर असर
कटाई से ठीक पहले होने वाली बारिश अनाज की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. इससे फसल सरकारी खरीद के फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों से नीचे जा सकती है, जिससे मंडियों में फसल अस्वीकृत होने या किसानों को कम कीमत मिलने का खतरा है.
मौसम प्रणाली की स्थिति
वर्तमान में जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है. इसके अलावा 26 और 28 मार्च से दो और पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेंगे. साथ ही, मध्य पाकिस्तान, उत्तर-पूर्वी राजस्थान में चक्रवाती परिसंचरण और मन्नार की खाड़ी से पश्चिम विदर्भ तक फैली द्रोणी भी मौसम को सक्रिय बनाए हुए है.
हालिया मौसम गतिविधि
पिछले 24 घंटों में असम के कुछ हिस्सों में 7–11 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई. उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में गरज के साथ तेज हवाएं भी देखी गईं.
किसानों के लिए सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पकी हुई फसलों की जल्द कटाई, खेतों में जल निकासी की व्यवस्था, कटाई के बाद फसल को सूखी और सुरक्षित जगह पर रखना और स्थानीय मौसम अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखने को कहा गया है.
मौसम का पूर्वानुमान
मार्च के अंत तक लगातार पश्चिमी विक्षोभों के चलते उत्तर-पश्चिम भारत में रुक-रुक कर बारिश और आंधी-तूफान जारी रह सकते हैं. जहां इससे गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं रबी फसलों पर खतरा बना रहेगा, जिससे यह समय किसानों के लिए बेहद संवेदनशील हो गया है.