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उत्तर भारत में ‘राहत’ की बारिश किसानों के लिए बनी आफत, रबी फसल कटाई पर गहराया संकट

एक तरफ तेज होती गर्मी से राहत देने वाली बारिश, तो दूसरी तरफ वही बारिश पकी फसलों के लिए खतरा बनकर सामने आ रही है. गेहूं, सरसों और दलहनों की कटाई के अहम समय में मौसम का यह उतार-चढ़ाव न केवल उत्पादन बल्कि गुणवत्ता और बाजार कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

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किसानों के लिए चुनौती बनी मौसम की मार
किसानों के लिए चुनौती बनी मौसम की मार

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों की श्रृंखला इस सप्ताह उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को अस्थिर बनाए रखेगी. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश, आंधी और 30–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है. यह बारिश जहां बढ़ती गर्मी से अस्थायी राहत देगी, वहीं इसका समय किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है.

रबी फसलों पर असर

अनियमित बारिश और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा खतरा गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों पर है. इस समय ये फसलें पकने या कटाई के चरण में हैं.

  • गेहूं: तेज हवा और बारिश से फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा, जिससे कटाई मुश्किल और उत्पादन व गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.
  • सरसों: दाने झड़ने और तेल की मात्रा घटने का जोखिम.
  • चना व अन्य दलहन: अधिक नमी से फसल खराब होने और उत्पादन घटने की आशंका. इसके अलावा, अधिक नमी से फंगल संक्रमण बढ़ सकता है और दानों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है.

खरीद और गुणवत्ता पर असर

कटाई से ठीक पहले होने वाली बारिश अनाज की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. इससे फसल सरकारी खरीद के फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों से नीचे जा सकती है, जिससे मंडियों में फसल अस्वीकृत होने या किसानों को कम कीमत मिलने का खतरा है.

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मौसम प्रणाली की स्थिति

वर्तमान में जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है. इसके अलावा 26 और 28 मार्च से दो और पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेंगे. साथ ही, मध्य पाकिस्तान, उत्तर-पूर्वी राजस्थान में चक्रवाती परिसंचरण और मन्नार की खाड़ी से पश्चिम विदर्भ तक फैली द्रोणी भी मौसम को सक्रिय बनाए हुए है.

हालिया मौसम गतिविधि

पिछले 24 घंटों में असम के कुछ हिस्सों में 7–11 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई. उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में गरज के साथ तेज हवाएं भी देखी गईं.

किसानों के लिए सलाह

विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पकी हुई फसलों की जल्द कटाई, खेतों में जल निकासी की व्यवस्था, कटाई के बाद फसल को सूखी और सुरक्षित जगह पर रखना और स्थानीय मौसम अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखने को कहा गया है.

मौसम का पूर्वानुमान

मार्च के अंत तक लगातार पश्चिमी विक्षोभों के चलते उत्तर-पश्चिम भारत में रुक-रुक कर बारिश और आंधी-तूफान जारी रह सकते हैं. जहां इससे गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं रबी फसलों पर खतरा बना रहेगा, जिससे यह समय किसानों के लिए बेहद संवेदनशील हो गया है.

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