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पंजाब: पराली ना जलाने पर मुआवजे की मांग, किसानों ने खेतों में ही अवशेष जलाने की दी धमकी

Paddy Stubble: बठिंडा में किसानों ने खेतों में अवशेष ना जलाने पर मुआवजा देने में राज्य सरकार की विफलता के खिलाफ सोमवार को जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने एक ट्रैक्टर पराली फेंक अपना विरोध जताया है. वहीं रूपनगर में भी किसानों ने खेतों में पराली नहीं जलाने को लेकर मुआवजे की मांग के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है.

Paddy Stubble Burning Paddy Stubble Burning
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पराली न जलाने पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन
  • मुआवजा ना मिलने पर खेतों में ही अवशेष जलाने की धमकी

Paddy Stubble Burning: खरीफ फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है. इसी के साथ ही दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में प्रदूषण की समस्या खड़ी हो गई है. उधर पंजाब में किसानों ने सरकार से जल्द से खेतों में अवशेषों को ना जलाने को लेकर मुआवजे की मांग की है. मांग नहीं पूरा होने की स्थिति में किसानों ने पराली जलाने की धमकी दी है.

किसानों की पराली ना जलाने पर मुआवजे की मांग

बठिंडा में किसानों ने खेतों में अवशेष ना जलाने पर मुआवजा देने में राज्य सरकार की विफलता के खिलाफ सोमवार को जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने एक ट्रैक्टर पराली फेंक अपना विरोध जताया है. वहीं रूपनगर में भी किसानों ने मुआवजे की मांग के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है.

मोहाली के गुरमिंदर सिह कहते हैं कि राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे दावे झूठे हैं. हमें धान की पराली को बंडल करने के लिए कोई वित्तीय मदद नहीं दी गई है. हमने पिछली बार धान के पुआल को बंडल को तैयार करने के लिए 6000 रुपये प्रति एकड़ तक खर्च किया था, लेकिन इस बार हमें धान के अवशेषों को जलाना होगा.

राज्य सरकार ने सब्सिडरी मशीनों पर मूर्ख बनाया: किसान

गुरमिंदर आगे कहते हैं कि राज्य सरकार ने सब्सिडी वाली मशीनरी के नाम पर भी किसानों को बेवकूफ बनाया.न इस बार हमारे पास अगली फसल बोने के लिए केवल 15 दिन बचे हैं. हमसे कहा जा रहा है कि पराली को खेतों में ना जलाए. हमने सब्सिडी वाली मशीनों की मांग की थी. बाजार में पराली बांधने की मशीन की कीमत 1.25 लाख है लेकिन सरकार हमें इसके लिए दो लाख रुपये का भुगतान करने के लिए कह रही है. सब्सिडी के नाम पर ये किसानों के साथ धोखा है.

मोहाली के पालदेई इलाके रहने दिलबाग सिंह का कहना है उनके लिए  धान की पराली जलाना एक मजबूरी है. उनकी आय भी बेहद कम है. वे आगे कहते हैं कि हम नमी और पराली (पराली) के नाम पर शिकार हो रहे हैं. अगर पराली जलाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो हम इस खतरे का सामना करने वाले पहले व्यक्ति हैं. सरकार भी हमें मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है.

धान की फसल की कटाई में देरी की वजह से इस बार किसानों के पास अगली फसल बोने के लिए बेहद कम समय है. आसान शब्दों में कहें कि इस साल अधिक किसान धान की पराली जलाएंगे. पंजाब में पिछले वर्ष के दौरान पराली जलाने के मामलों में 44.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. परिस्थितियों को देखते हुए इस साल ये आंकड़ें और अधिक हो सकते हैं.

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