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आम की बढ़ेगी मिठास, फसल की होगी बंपर पैदावार...किसान फरवरी-मार्च में करें ये काम

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फरवरी-मार्च में किसान सिंचाई, खाद, कीट नियंत्रण और सही देखभाल पर ध्यान दें तो आम की पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है. आइए जानते हैं किसान कैसे करें देखभाल और किन बातों का रखें ध्यान.

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सही देखभाल से बंपर होगी आम की पैदावार (Photo-Pixabay)
सही देखभाल से बंपर होगी आम की पैदावार (Photo-Pixabay)

आम को फलों का राजा कहा जाता है और भारत में आम की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. लेकिन अच्छी फसल पाने के लिए सही समय पर सही देखभाल बहुत जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फरवरी और मार्च का महीना आम के पेड़ों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान पेड़ों पर बौर (फूल) आते हैं और फल बनने की शुरुआत होती है. अगर इस समय थोड़ी सी लापरवाही हुई तो फूल झड़ सकते हैं. जिससे फल कम हो सकते हैं. ऐसे में समय पर सही उपाय अपनाने से आम की पैदावार 2 गुना तक बढ़ सकती है.

फरवरी-मार्च में आम के पेड़ों की देखभाल
कृषि वैज्ञानिक और अनुभवी किसान बताते हैं कि फरवरी-मार्च में आम की बंपर पैदावार के लिए निम्नलिखित काम जरूर करें:

सिंचाई (पानी) का सही प्रबंधन
फरवरी में जब पेड़ों पर बौर (फूल) निकल रहे हों, तो पानी बिल्कुल कम दें या बिल्कुल न दें. ज्यादा पानी देने से नई पत्तियां निकल आती हैं. फूलों की जगह पत्तियां बढ़ जाती हैं, जिससे फल कम लगते हैं. जब फूल झड़कर छोटे फल (मटर के दाने जितने) बन जाएं, तब हल्की सिंचाई शुरू करें. मार्च में फल बढ़ने के समय नियमित लेकिन ज्यादा पानी ना दें. ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी रहती है, क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और जड़ों तक सही नमी पहुंचती है.

खाद और पोषक तत्व का रखें ध्यान

  • इस समय पेड़ को मजबूत बनाने के लिए संतुलित खाद जरूरी है. जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें.  
  • सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम का छिड़काव करें.
  • पोटैशियम युक्त उर्वरक (जैसे NPK 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट) का स्प्रे करें. 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से फल अच्छा होता है और 1 मंजर से 8-10 आम तक लग सकते हैं. 
  • फरवरी में हल्की खाद डालें ताकि बौर मजबूत रहें और फूल झड़ने की समस्या कम हो.

कीट और रोग से बचाव

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  • फरवरी-मार्च में मुख्य कीट जैसे मधुआ कीट, गुझिया कीट, हॉपर (चूसने वाले कीट) रोग जैसे झुलसा रोग (एंथ्रेक्नोज) बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. ये फूल और छोटे फल झाड़ देते हैं. इसलिए पहला और दूसरा स्प्रे फरवरी में ही कर लें. 
  • अगर कीट ज्यादा हों तो विशेषज्ञ की सलाह से रासायनिक दवा का छिड़काव करें, लेकिन फूल आने के समय सावधानी बरतें.  
  • पेड़ के नीचे मल्चिंग (सूखी घास या प्लास्टिक शीट) करें ताकि खरपतवार कम हों और नमी बनी रहे.

छंटाई (प्रूनिंग)
अगर जरूरी हो तो हल्की छंटाई करें. पुरानी, सूखी या बीमार टहनियां हटा दें ताकि पेड़ में धूप और हवा अच्छे से पहुंचे. ज्यादा घनी शाखाएं हटाने से फूल और फल अच्छे लगते हैं. लेकिन भारी छंटाई न करें, क्योंकि फरवरी-मार्च में पेड़ फूलों के दौर में होता है.


 

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