Blue Oyster Mushroom: बढ़िया मुनाफे के चलते किसानों के बीच मशरूम की खेती की लोकप्रियता बढ़ी है. पहले इसकी खेती के लिए पहाड़ी क्षेत्रों को ही उपयुक्त माना जाता था, लेकिन अब नई-नई खेती की तकनीकें आने से मैदानी क्षेत्रों में मशरूम की बड़े पैमाने पर खेती होने लगी है.
मशरूम की खेती बंद और अंधेरे कमरे में की जाती है. यहां बटन मशरूम, ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम, दूधिया मशरूम, पैडीस्ट्रा मशरूम और शिटाके मशरूम की किस्में उगाई जा रही हैं.
इस तरह उगाया जाता है ब्लू ऑयस्टर मशरूम
ब्लू ऑयस्टर मशरूम की खेती भी अन्य मशरूम की तरह ही होती है. इसे भी सोयाबीन की खोई, गेहूं के भूसे, धान के पुआल, मक्का के डंठल, अरहर, तिल, बाजरा, गन्ने की खोई, सरसों के पुआल, कागज के कचरे, कार्डबोर्ड, लकड़ी के बुरादे जैसे कृषि अपशिष्टों के सहारे उगा सकते हैें. इसकी खेती के लिए पुआल को पॉलीथिन बैग में भरकर बिजाई (स्पॉनिंग) की जाती है और बैग का मुंह बांधकर उसमें 10-15 छेद किए जाता है. फिर उसे अंधेरे कमरे में छोड़ दिया जाता है.
बन सकते हैं अमीर
प्लास्टिक बैग में 15-17 दिनों बाद कवक जाल पूरी तरह से फैल जाता है. तकरीबन 23-24 दिन बाद मशरूम तोड़े जा सकते हैं. ये मशरूम बाजार में 150-200 रुपये प्रति किलो किलों के आस-पास बिकते हैं. इसकी खेती से अमीर बन सकते हैं.
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
यह मशरूम हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों के खिलाफ फायदेमंद माना गया है. इस मशरूम में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है. यही वजह है कि चिकित्सक भी मशरूम के सेवन की सलाह देते नजर आते हैं.