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सबसे ज्यादा बच्चे देने वाली भेड़ समेत 16 पशु-पक्षियों को मिला रजिस्टर्ड टैग

राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल (NBAGR) ने 16 नई नस्लों को रजिस्टर्ड किया है. राजस्थान की अविशान भेड़ जो ज्यादा बच्चे देने के मामले में बेस्ट मानी जाती है, उसे भी रजिस्टर्ड टैग मिल गया है. साथ ही गाय की दो सिंथेटिक ब्रीड वृंदावनी और करन फ्रीज को भी रजिस्टर्ड कर दिया गया है.

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16 पशु-पक्षियों को रजिस्टर्ड टैग मिला है. (Photo: Pixabay)
16 पशु-पक्षियों को रजिस्टर्ड टैग मिला है. (Photo: Pixabay)

राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल (NBAGR) ने मुर्गी, भेड़-बकरी, गाय-भैंस और बत्तख की 16 नई नस्लें रजिस्टर्ड की हैं. इसमें शामिल बत्तखों की संख्या 6 है. ये बत्तख अंडे भी देती हैं. इनमें असम, मणिपुर और ओडिशा की बत्तखें भी शामिल की गई हैं. चार गाय और एक-एक भेड़-बकरी भी इस लिस्ट में दर्ज हैं.

रजिस्टर्ड हुए पशु-पक्षियों में इस बार झारखंड की मुर्गी भी शामिल है. इस खास देसी नस्ल की मुर्गी को खासतौर पर मीट के लिए पाला जाता है. नागालैंड के मिथुन को भी रजिस्टर्ड टैग दिया गया है. ब्यूरो की नई सूची के बाद देश में रजिस्टर्ड पशु और पक्षियों की संख्या और बढ़ गई है.

राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) देश में नई पशु नस्लों को पंजीकृत करने का कार्य करता है. गोट, शीप, बफैलो और एवियन रिसर्च सेंटर आदि भेड़-बकरी, गाय-भैंस पर अध्ययन कर रिपोर्ट ब्यूरो को भेजते हैं. इसके बाद ब्यूरो हर मानक पर जांच और मूल्यांकन करने के बाद संबंधित पशु-पक्षी को रजिस्टर्ड करता है.

जानें रजिस्टर्ड हुए गाय-भैंस और भेड़-बकरी

रोहिलखंडी गाय
रोहिलखंडी गाय यूपी के बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाली जाती है. इनका रंग ज्यादातर सफेद और ग्रे होता है. इन गाय के सींग बाहर की ओर ऊपर मुड़े हुए होते हैं और सिरे पर नुकीले होते हैं. इनकी पूंछ लंबी होती है. 

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मेदिनी बैल
मेदिनी नस्ल के बैल मूल रूप से पलामू, लातेहार और गढ़वा और झारखंड के आस-पास के जिले में पाए जाते हैं. ये मुख्य रूप से बोझा ढोने के लिए इस्तेमल किए जाते हैं. इनका रंग ज़्यादातर ग्रे होता है. मेदिनी बैल में कूबड़ कंधे के आगे होता है.

करण फ्राइज गाय (सिंथेटिक)
करण फ्राइज गाय की नस्ल ICAR-NDRI ने विकसित की है. ये एक सिंथेटिक नस्ल है. यह गाय खासतौर पर हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, कैथल, जींद और यमुना नगर जिले पाली जाती है. करण फ्राइज को होलस्टीन फ्राइजि‍यन (HF) और थारपारकर नस्लों के क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है.

वृंदावनी गाय (सिंथेटिक)
वृंदावनी सिंथेटिक गाय है. इसे ICAR-IVRI, बरेली ने विकसित किया है. इस गाय की नस्ल को यूपी के बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं जिलों में पालने के लिए दिया गया है. इस नस्ल को 4 अलग-अलग गाय के जर्मप्लाज्म की क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है. एचएफ, हरियाना, जर्सी और ब्राउन स्विस को मिक्स कर तैयार किया गया है. इस गाय का रंग मुख्य रूप से भूरा होता है. 

मेलघाटी भैंस
मेलघाटी नस्ल की भैंस महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में पाई जाती है. इस गाय रंग काला और बालदार होता है. इनका माथा चौड़ा (गुंबद के आकार का), चेहरा लंबा और पतला होता है. इनकी नाक की हड्डी नुकीली और आंखें उभरी हुई होती हैं. 

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पलामू बकरी
पलामू नस्ल की बकरियां झारखंड के पलामू, लातेहार और गढ़वा जिलों में पाई जाती हैं. ये बकरियां दिखने में लंबी होती हैं, इनका शरीर बेलनाकार और साइज मीडियम होता है. पलामू बकरियों का रंग गहरा भूरा और काला होता है. इनके कान लटके हुए होते हैं. इस बकरी को खासतौर पर मीट के लिए पाला जाता है. 

उदयपुरी बकरी
उदयपुरी बकरियों का मूल स्थान उत्तराखंड का पौड़ी गढ़वाल है. ये बकरियां मीडियम साइज़ की होती हैं, इनका शरीर कॉम्पैक्ट और बालदार होता है. टैन रंग के कोट पर ऊपरी हिस्से पर काली धारी होती हैं. इस बकरी के कान लटके हुए होते हैं और गलकंबल और दाढ़ी नहीं होती है.

अविनशान भेड़ (सिंथेटिक)
अविशान पहली सिंथेटिक भेड़ की नस्ल है. इसे ICAR-CSWRI ने विकसित किया है. यह खास नस्ल ज्यादा बच्चा देने के लिए जानी जाती है. यह ज्यादा दूध भी देती है. इस नस्ल को गारोल, मालपुरा और पाटनवाड़ी नस्ल के मिक्स से तैयार किया गया है. यह मीडियम से बड़े आकार की मटन टाइप की भेड़ है. इसका चेहरा हल्के से गहरे भूरे रंग का होता है, जो गर्दन तक फैला होता है. इसके शरीर के बालों का रंग ऑफ व्हाइट, क्रीम रंग का होता है. 

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