वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के मामले में अमेरिकी न्याय विभाग, FBI और ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) की ओर से जारी संयुक्त बयान जारी किया गया है. बयान में कहा गया है कि यह एक बेहद जटिल और हाई-रिस्क कानून प्रवर्तन अभियान था. इस ऑपरेशन में अमेरिकी युद्ध विभाग, विदेश विभाग, खुफिया समुदाय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने मिलकर काम किया.
DOJ के मुताबिक, इस मिशन के लिए महीनों तक समन्वय, बारीक रणनीति और फेडरल एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल की जरूरत पड़ी. ऑपरेशन की अगुवाई अमेरिकी युद्ध विभाग ने की और इसमें सेना की विशेष यूनिट्स को तैनात किया गया. यह ऑपरेशन महीनों की गुप्त प्लानिंग के बाद अंजाम दिया गया, जिसकी अगुवाई सीधे अमेरिकी युद्ध विभाग ने की. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मादुरो को शांतिपूर्ण तरीके से हिरासत में लेने के कई मौके दिए गए, लेकिन उन्हें ठुकरा दिया गया.
बयान में कहा गया है कि FBI और DEA की स्पेशल टैक्टिकल और ट्रांसपोर्ट टीमें भी इस मिशन का हिस्सा थीं. इन टीमों ने दो हाई-रिस्क आरोपियों की सुरक्षित आवाजाही, नियंत्रण और अमेरिकी हिरासत में ट्रांसफर सुनिश्चित किया. सभी अधिकारियों ने अमेरिकी कानून और तय प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई की.
अमेरिका का कहना है कि यह ऑपरेशन बड़े पैमाने पर ड्रग तस्करी, हिंसा और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़े मामलों में चल रही आपराधिक जांच का हिस्सा था. DOJ के मुताबिक, यही ड्रग नेटवर्क अमेरिका में जानलेवा ड्रग संकट की बड़ी वजह बना.
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए हर कानूनी रास्ता अपनाया, लेकिन सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया गया. अमेरिका का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी उन लोगों पर है जिन्होंने आपराधिक गतिविधियां जारी रखीं.
न्याय विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई कानून के शासन, जवाबदेही और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए की गई है. बयान के अंत में ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों की तारीफ करते हुए कहा गया कि यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम के बीच भरोसे और सहयोग का नतीजा है.