scorecardresearch
 

UK में अब नहीं दिखेंगे जंक फूड के विज्ञापन, बच्चों में बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए नई पहल शुरू

ब्रिटेन सरकार ने बचपन में मोटापे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए जंक फूड के विज्ञापनों पर सख्त पाबंदी लगा दी है. नए नियमों के तहत रात 9 बजे से पहले टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अस्वास्थ्यकर खानपान का प्रचार नहीं किया जा सकेगा, जिससे बच्चों की सेहत में सुधार की उम्मीद है.

Advertisement
X
ब्रिटेन में TV पर नहीं दिखेंगे जंक फूड के विज्ञापन. (Photo: Getty Images)
ब्रिटेन में TV पर नहीं दिखेंगे जंक फूड के विज्ञापन. (Photo: Getty Images)

ब्रिटेन ने बच्चों में लगातार बढ़ रहे मोटापे से निपटने के लिए जंक फूड और शुगर युक्त ड्रिंक्स के विज्ञापनों पर नई पाबंदियां लागू कर दी है. अब टीवी पर रात 9 बजे से पहले और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी वक्त इन उत्पादों के पेड विज्ञापन दिखाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. ये कदम सरकार की उस मुहिम का हिस्सा है, जिसमें बच्चों में बढ़ते मोटापे की दर को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है.

स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल विभाग (डीएचएससी) के अनुसार, इस प्रतिबंध से बच्चों के आहार से सालाना करीब 7.2 अरब कैलोरी कम होने की उम्मीद है. इससे मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या में 20,000 की कमी आएगी और लंबे वक्त में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) को लगभग 2 अरब पाउंड का लाभ होगा.

ऑनलाइन पेड विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध

ब्रिटेन की स्वास्थ्य मंत्री एश्ले डाल्टन ने कहा, 'रात 9 बजे से पहले जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक और ऑनलाइन पेड विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर हम बच्चों को अस्वास्थ्यकर खाद्यों के अत्यधिक संपर्क से बचाएंगे. इससे माता-पिता और बच्चों के लिए स्वस्थ विकल्प चुनना आसान हो जाएगा.'

उन्होंने आगे कहा, 'हम एनएचएस को केवल बीमारी का इलाज करने वाली संस्था बनाने के बजाय, बीमारी को रोकने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, ताकि लोग स्वास्थ्य ठीक रहे और जरूरत पड़ने पर एनएचएस उनकी मदद कर सके.'

विभाग का दावा है कि रिसर्च बताते हैं कि विज्ञापन बच्चों के खाने की आदतों और वक्त को प्रभावित करते हैं. इससे बचपन में ही उनके खाने की कुछ पसंद बन जाती हैं और मोटापे  से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

Advertisement

22.1% बच्चे मोटापे से ग्रस्त

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड में प्राथमिक स्कूल शुरू करने वाले बच्चों में से 22.1 प्रतिशत अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होते हैं जो स्कूल खत्म होने तक बढ़कर 35.8 प्रतिशत हो जाता है. साथ ही ब्रिटेन में पांच से नौ वर्ष की आयु के छोटे बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का प्रमुख कारण दांतों की सड़न है.

ब्रिटेन की ओबेसिटी हेल्थ एलायंस की कार्यकारी निदेशक कैथरीन जेनर ने कहा, 'ये नए प्रतिबंध बच्चों को सबसे ज्यादा समस्या वाले विज्ञापनों के संपर्क में आने से बचाने में मदद करेंगे और स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने की दिशा में वास्तविक प्रगति है.'

स्वस्थ पीढ़ी तैयार करना है टारगेट

उन्होंने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य सबसे स्वस्थ पीढ़ी तैयार करना है. इसके लिए ये नीति महत्वपूर्ण है, लेकिन मोटापे से जुड़ी बीमारियों को रोकने के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा होना चाहिए. समय-समय पर नियमों को और सख्त करना जरूरी होगा, ताकि ये सुरक्षा प्रभावी बनी रहे.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाद्य एवं पेय कंपनियों को इस प्रतिबंध की पहले से जानकारी थी. अक्टूबर 2025 से ये स्वैच्छिक आधार पर लागू था और अब कानूनी रूप से प्रभावी हो गया है.

पहले के उपायों जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स इंडस्ट्री लेवी से कंपनियों ने उत्पादों को स्वस्थ बनाने के लिए रिफॉर्मुलेशन किया था. मौजूदा उपायों का भी इसी तरह का प्रभाव पड़ा है, जिससे स्वस्थ विकल्पों का विकास और प्रचार बढ़ा है.

सरकार की स्वास्थ्य मुहिम के तहत सॉफ्ट ड्रिंक लेवी को अब और उत्पादों तक विस्तारित किया जाएगा, जिसमें शुगर युक्त मिल्क-बेस्ड ड्रिंक्स शामिल होंगे. साथ ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों को हाई-कैफीन एनर्जी ड्रिंक्स बेचना भी प्रतिबंधित किया जाएगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement