संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को भारत दौरे पर पहुंचे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव करने खुद पहुंच गए. इस दौरान दोनों नेता गर्मजोशी से एक-दूसरे के गले मिले और एक ही कार में सवार होकर एयरपोर्ट से निकले.
शेख नाहयान के 2 घंटे के भारत दौरे की टाइमिंग को लेकर काफी चर्चा हो रही है. उनका भारत दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा टला है और गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए भारत को न्योता मिला है.
विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि यूएई के राष्ट्रपति का भारत दौरा पीएम मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है. बयान में कहा गया, 'यूएई का राष्ट्रपति बनने के बाद महामहिम की यह भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है और पिछले एक दशक में यह उनकी पांचवीं भारत यात्रा है.'
विदेश मंत्रालय ने कहा सोमवार शाम दोनों देशों के बीच मुलाकात तय है. मंत्रालय के अनुसार, यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा दोनों नेताओं को भारत–यूएई स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और आगे ले जाने का मौका देगी. इस यात्रा के दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर बात करेंगे.
यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा से परिचित लोगों के अनुसार, पीएम मोदी और शेख नाहयान की बातचीत के एजेंडे में व्यापार और निवेश, रक्षा उद्योग में सहयोग तथा ऊर्जा से जुड़ी पहल प्रमुख रूप से शामिल रहने की उम्मीद है. यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में दी गई है.
शेख अल नहयान शाम 4.30 बजे के आसपास दिल्ली पहुंचे. बताया जा रहा है कि वो 4.45 बजे से पीएम मोदी से उनकी बातचीत शुरू हुई और लगभग शाम 6 बजे वो नई दिल्ली से रवाना हो जाएंगे. इस तरह यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा करीब दो घंटे का होगा.
यूएई के राष्ट्रपति की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और यूएई नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों में अपने आपसी सहयोग को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. इसी महीने की शुरुआत में 4 जनवरी को थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधों को मजबूत करने के मकसद से यूएई की यात्रा की थी. इस दौरान उन्हें यूएई थल सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
जनरल द्विवेदी ने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व से भी बातचीत की, जिसमें यूएई थल सेना के कमांडर शामिल थे. उन्होंने यूएई के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया, अधिकारियों और सैनिकों से बातचीत की.
इससे एक महीने पहले, 15 दिसंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएई की यात्रा की थी, जहां उन्होंने 16वीं भारत-यूएई संयुक्त आयोग बैठक और भारत-यूएई रणनीतिक संवाद के पांचवें दौर में हिस्सा लिया. इन बैठकों की सह-अध्यक्षता जयशंकर और यूएई के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने की थी.
भारत और यूएई के बीच बहुआयामी संबंध हैं. दोनों देश एक-दूसरे के टॉप ट्रेड पार्टनर्स में शामिल हैं, जिन्हें व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) से मजबूती मिली है.
CEPA के अलावा स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (LCS) और द्विपक्षीय निवेश संधि ने भी व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ावा दिया है.
यूएई भारत में सातवां सबसे बड़ा निवेशक है. साल 2000 से अब तक भारत में यूएई से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 22 अरब डॉलर से अधिक रहा है. ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के रिश्तों का एक प्रमुख आधार बना हुआ है. यूएई भारत को कच्चे तेल के अलावा लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई करता है.