दुनिया बदल रही है, लोगों की लाइफस्टाइल भी बदल रही है. कई शहर नए कॉन्सेप्ट पर बसाए जा रहे हैं. हम आज एक ऐसे ही शहर के बारे में जानेंगे जहां की सड़कों पर आपको बिजली का एक भी खंभा नहीं मिलेगा. जहां किसी के घर में बिजली का बिल नहीं आता, बल्कि उल्टा बिजली कंपनी से बोनस ही मिलता है. जिस शहर में ढाई सौ किलोमीटर के चक्रवाती तूफान के बावजूद एक भी बत्ती गुल नहीं हुई. जहां लोग अपनी गाड़ियां कम ही निकालते हैं, उसकी बजाय शहर प्रशासन की ओर से चलाई जा रही इलेक्ट्रिक शटल का इस्तेमाल लोगों को ज्यादा पसंद है.)
...यहां कभी चरवाहों और शिकारियों की भीड़ हुआ करती थी. जंगली जानवरों के डर से आम लोग जाने से डरते थे. जहां देखो वहां चारागाह और जंगल. फिर अचानक एक दिन एक फुटबॉलर से रियल स्टेट बिजनेसमैन बने शख्स के दिमाग में एक आइडिया आया. फिर उस इलाके की तस्वीर बदलती चली गई.
उस जगह पर खड़ा हुआ एक ऐसा मॉडर्न शहर जिसकी लाइफस्टाइल देखकर दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाला शख्स आहें भरने लगे. इस शहर से बिजली के खंभे गायब हो गए, लोगों के पास बिजली के बिल तक आनी बंद हो गई, लेकिन घरों में रोशनी 24 घंटे उपलब्ध. सड़कों से गाड़ियों की संख्या अचानक कम हो गई. आखिर क्या किया इस शहर ने कि दुनिया के लिए मिसाल बन गया?
जादू की कहानियों में हमने ऐसी दुनिया के बारे में सुना है जहां ऊर्जा कभी खत्म नहीं होती, लेकिन असल दुनिया में भी एक ऐसी जगह है जिसे दुनिया की पहली पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित सिटी कहा जाता है. दरअसल, ये शहर उदाहरण है विकास और प्रकृति के संरक्षण के बीच बेहतरीन संतुलन का. ये कहानी है बैबकॉक रैंच शहर की. ये अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित एक नवनिर्मित शहर है. जो लगभग 18,000 एकड़ में फैला हुआ है. इस शहर की सबसे खास बात है कि यहां बिजली के खंभे नहीं हैं. पूरी तरह सोलर सिटी है और इसे 'होमटाउन ऑफ टुमॉरो' कहा जाता है.
इस शहर की नींव किसी इंजीनियर ने नहीं, बल्कि पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी सिड किट्सन ने रखी थी. 2006 में जब उन्होंने 18,000 एकड़ जमीन खरीदी और सोलर सिटी का आइडिया पेश किया, तो लोगों ने उन्हें पागल कहा. लेकिन किट्सन का विजन साफ था- हमें प्रकृति से लड़ना नहीं, उसके साथ जीना सीखना होगा.
शुरू में पर्यावरणविदों को डर था कि बिल्डर्स यहां कंक्रीट का जंगल खड़ा कर देंगे. लेकिन सिड किट्सन ने ऐसा सौदा किया जो इतिहास में दर्ज हो गया. उन्होंने पूरी जमीन खरीदी और उसका बड़ा हिस्सा वापस फ्लोरिडा सरकार को संरक्षण के लिए दे दिया ताकि वहां कभी निर्माण न हो सके. बाकी बचे 18,000 एकड़ में शहर बसा दिया. अभी भी ये शहर बन ही रहा है, जहां 7 हजार के करीब लोग रह रहे हैं. पूरी तरह तैयार होने पर यहां 50 हजार लोग रह सकेंगे. शहर में टाउनहोम्स और अपार्टमेंट हर तरह के मकान हैं. शहर को बसाते समय एक भी पेड़ अनावश्यक रूप से नहीं काटा गया. जो पेड़ हटाए गए, उन्हें उसी शहर के पार्कों में फिर से लगाया गया.
ऐसे बदली शहर की सूरत
इस शहर में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब यहां 700 एकड़ का एक विशाल सोलर फार्म बनवाया गया. इस फार्म में साढ़े 6 लाख सोलर पैनल्स लगे हुए हैं. बैबकॉक रैंच की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शहर जितनी बिजली खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा बिजली पैदा करता है. यहां का सोलर प्लांट 150 मेगावाट बिजली पैदा करता है. यहां दुनिया की सबसे बड़ी सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रणालियों में से एक है, ताकि रात में या बादल होने पर भी बिजली की कमी न हो. घरों में लगे स्मार्ट उपकरण ऊर्जा की बचत करते हैं.
यहां के लोगों का जीवन आधुनिक सुख-सुविधाओं और पर्यावरण प्रेम का एक अनूठा मिश्रण है. स्मार्ट घरों के कॉन्सेप्ट पर यहां सारा निर्माण हुआ है. हर घर सोलर एनर्जी से जुड़ा है. लोग अपनी बिजली खुद पैदा करते हैं, जिससे उनके बिजली के बिल लगभग शून्य या बहुत कम होते हैं. रात में बिजली की कमी न हो इसके लिए दिन में बनी सोलर एनर्जी को स्मार्ट ग्रिड में लगी विशाल बैटरियों में संग्रहित करके रात में सप्लाई की जाती है. बैकअप के लिए नेचुरल गैस टर्बाइन से बनी बिजली की सप्लाई की जाती है.
तूफान का सामना भी शहर ने डटकर किया
सबसे हैरान करने वाला नजारा दिखा 2022 के इयान तूफान के दौरान. 240 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाला विनाशकारी तूफान जब फ्लोरिडा से टकराया, तो हवाओं ने घरों की छतें उड़ा दीं, सड़कों को समंदर बना दिया और लाखों घरों की बिजली गुल कर दी. फ्लोरिडा के बड़े-बड़े शहर हफ्तों तक अंधेरे में डूबे रहे. लेकिन बैबकॉक रैंच की एक भी लाइट बंद नहीं हुई. यह शहर अपनी बनावट के कारण 'तूफान प्रूफ' साबित हुआ.
वहां के लोग उस तूफान को याद करते हुए कहते हैं- 'हमारे चारों ओर तबाही थी, लेकिन हमारे यहां वाई-फाई चल रहा था और टीवी पर खबरें आ रही थीं. हमें लग रहा था कि हम किसी दूसरे ग्रह पर हैं.' दरअसल, जब आसपास के शहरों का पारंपरिक इलेक्ट्रिक ग्रिड यानी खंभे और तार ताश के पत्तों की तरह गिर गए, तब बैबकॉक रैंच का स्मार्ट सोलर ग्रिड अडिग खड़ा था.
यहां के साढ़े 6 लाख सोलर पैनल इतने मजबूत हैं कि ये सबसे हाई कैटेगरी-5 के तूफान को भी झेल सकते हैं. अंडरग्राउंड बिजली लाइनें लगीं हैं यहां. एक भी खंभा नहीं दिखता. सारी बिजली की लाइनें जमीन के अंदर हैं, इसलिए तूफान हवाओं में उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाता. ज्यादातर लोगों के घरों में इतना बिजली उत्पादित होता है कि वे कंपनी से उल्टा क्रेडिट पाते हैं. शहर की सड़कें और बगीचे इस तरह बने हैं कि भारी बारिश का पानी झीलों में चला जाता है, जिससे घरों में कभी बाढ़ नहीं आती.
शहर भर में सेल्फ-ड्राइविंग शटल मुख्य ट्रांसपोर्ट साधन है. शहर के भीतर घूमने के लिए इलेक्ट्रिक शटल बसें चलती हैं जो ड्राइवर के बिना चलती हैं. लोग अपनी निजी गाड़ियां कम और इलेक्ट्रिक गाड़ियां ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. प्रकृति से जुड़ाव के लिए शहर का 50% हिस्सा केवल पार्क, झीलों और हरियाली के लिए सुरक्षित रखा गया है.
बैबकॉक रैंच आज दुनिया के लिए एक फ्यूचर सिटी का ब्लूप्रिंट है. यह साबित करता है कि आधुनिक सुविधाओं के लिए प्रकृति को नष्ट करना जरूरी नहीं है. यह शहर चीख-चीख कर कह रहा है कि भविष्य 'सोलर' है और 'स्मार्ट' है.