
यमन के दूरदराज सोकोत्रा द्वीप पर सैकड़ों विदेशी पर्यटक फंस गए हैं. वजह है यमन में हालात बिगड़ना और सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बढ़ता तनाव, जिसके चलते अचानक उड़ानें रोक दी गईं.
ये परेशानी तब शुरू हुई जब पिछले हफ्ते सऊदी अरब की तय समय-सीमा के बाद UAE ने यमन से अपनी सेना वापस बुला ली. इसके साथ ही सोकोत्रा के मुख्य एयरपोर्ट पर UAE का नियंत्रण भी खत्म हो गया. उड़ानें रुकते ही वहां पहुंचे करीब 400 से 600 पर्यटक, जो नए साल का जश्न मनाने आए थे, द्वीप से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं.
सोकोत्रा द्वीप पर फंसी लिथुआनिया की पर्यटक ऑरेलिजा क्रिकस्टापोनिएने ने रॉयटर्स से कहा, 'किसी को कुछ पता नहीं, बस घर लौटना चाहते हैं. किसी के पास कोई जानकारी नहीं है और हर कोई बस अपनी सामान्य ज़िंदगी में लौटना चाहता है.' वे अबू धाबी लौटने वाली थीं, लेकिन हालात के चलते उन्हें जेद्दा के रास्ते जाने की संभावना पर विचार करना पड़ रहा है.

पैसे खत्म हो रहे हैं, चिंता बढ़ रही है
कई पर्यटकों के लिए हालात और मुश्किल हो गए हैं. करीब 100 लोगों के समूह के साथ यात्रा कर रहे पोलैंड के पर्यटक मैचेज ने कहा, 'हमारे पास सीमित नकद है. दो-तीन दिन में ज़्यादातर लोगों के पैसे खत्म हो जाएंगे. यहां न ATM हैं, न कार्ड मशीनें. पैसे खत्म हुए तो खुले में सोना पड़ेगा और स्थानीय लोगों के खाने पर निर्भर रहना होगा.'
पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनके नागरिक भी फंसे हुए हैं. मंत्रालय के मुताबिक सुरक्षा हालात बिगड़ने की वजह से एक UAE एयरलाइन ने उड़ानें रोक दी हैं. एक पश्चिमी राजनयिक ने अल जजीरा को बताया कि सोकोत्रा में ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका के नागरिक भी मौजूद हैं. स्थानीय अधिकारी के अनुसार अलग-अलग देशों के कम से कम 416 लोग, जिनमें 60 से ज्यादा रूसी नागरिक शामिल हैं, अब भी द्वीप पर फंसे हैं.
शांत टूरिस्ट जगह से भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र
यमन के लंबे और खूनी गृहयुद्ध से काफी हद तक दूर रहा सोकोत्रा द्वीप, देश के तट से 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर, अदन की खाड़ी में स्थित है. ये अपनी साफ-सुथरी समुद्री तटरेखाओं और अनोखी वनस्पतियों, खासकर ड्रैगन ब्लड ट्री के लिए मशहूर है. लेकिन बाब-अल मंदब जलडमरूमध्य के पास होने के कारण ये इलाका रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है. ये दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है.
किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एंड्रियास क्रिग के मुताबिक सोकोत्रा एक ऐसे विमानवाहक पोत जैसा है जो कभी डूबता नहीं. इस पर नियंत्रण रखने से क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार मार्गों पर दबदबा बनता है.
2020 से इस द्वीप पर UAE समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) का शासन है, जो दक्षिण यमन को अलग देश बनाने की मांग करता है. हाल ही में STC और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच झड़पें बढ़ीं, जिससे हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा और सोकोत्रा की उड़ानें रोक दी गईं.
दूतावास निकासी के रास्ते ढूंढ रहे हैं
फंसे हुए पर्यटक अब अपने-अपने दूतावासों से मदद मांग रहे हैं लेकिन विकल्प सीमित हैं. एक पश्चिमी राजनयिक के मुताबिक, 'संबंधित दूतावास सऊदी और यमनी सरकारों से संपर्क कर निकासी के विकल्प तलाश रहे हैं.' अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि उसे सोकोत्रा आने-जाने वाली उड़ानों के रद्द होने और रास्ता बदलने की जानकारी मिली है. अमेरिका ने दोहराया कि वो यमन की यात्रा से बचने की सलाह देता है और वहां नियमित कांसुलर सेवाएं नहीं दे सकता.
कुछ पर्यटकों को ओमान तक नाव से जाने और वहां से आगे उड़ान लेने की सलाह दी गई है, लेकिन कई लोग समुद्री यात्रा को जोखिम भरा मान रहे हैं.
इंतजार में बीत रहे हैं दिन
हालात के बावजूद कुछ पर्यटक धैर्य बनाए हुए हैं. रोमानिया की पर्यटक बियांका कुस कहती हैं, 'मुझे यहां हर दिन उतना ही अच्छा लग रहा है, जितना पहले लगता था, लेकिनतब तक जब तक हमें पता नहीं चला कि हमें ज्यादा दिन रुकना पड़ेगा.'

अधिकारियों का कहना है कि हालात सुधरते ही उड़ानें शुरू हो सकती हैं, लेकिन अभी कोई तय समयसीमा नहीं बताई गई है. तब तक, रोमांच और सुकून की तलाश में आए ये सैलानी, एक खूबसूरत द्वीप और बढ़ते क्षेत्रीय संघर्ष के बीच फंसे हुए हैं.
सोकोत्रा कैसे बना सऊदी-UAE की ताकत की लड़ाई का शिकार?
सोकोत्रा में यात्रा बाधित होने की असली वजह सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ती दूरी है. दोनों कभी यमन के गृहयुद्ध में करीबी सहयोगी थे, लेकिन अब ज़मीन पर अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं. दोनों देशों ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हस्तक्षेप किया था लेकिन वक्त के साथ उनके हित अलग हो गए. सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है. वहीं UAE दक्षिणी अलगाववादी संगठन STC के साथ खड़ा है
हाल के हफ्तों में तनाव तब और बढ़ा जब UAE समर्थित STC ने दक्षिण यमन में अपना नियंत्रण बढ़ाया. इसके जवाब में सऊदी अरब ने STC के ठिकानों पर हवाई हमले किए. इसी टकराव के चलते UAE ने यमन से अपनी सेना वापस बुला ली, जिसमें सोकोत्रा भी शामिल था.
UAE के हटते ही एयरपोर्ट का नियंत्रण खत्म हुआ, सुरक्षा हालात बिगड़े और उड़ानें रोक दी गईं. इस तरह सऊदी-UAE की ताकत की लड़ाई का असर युद्ध के मैदान से निकलकर एक शांत टूरिस्ट द्वीप तक पहुंच गया जहां सैकड़ों विदेशी नागरिक फंस गए.