तुर्किए, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बने रणनीतिक रक्षा गठबंधन में शामिल होने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर तीनों देशों के बीच बातचीत लगभग अंतिम चरण में है और समझौते की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है. अगर तुर्किए इस द्विपक्षीय रक्षा समझौते का हिस्सा बनता है तो यह मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है.
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने वर्ष 2025 में एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत किसी एक देश पर किया गया "किसी भी तरह का हमला" सभी साझेदार देशों पर हमला माना जाएगा. अब तुर्किए की संभावित एंट्री से यह गठबंधन त्रिपक्षीय रूप ले सकता है, जिसे ब्लूमबर्ग ने "नया सुरक्षा संरेखण" बताया है.
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तुर्किए पहले ही कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है. मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सीमित सैन्य टकराव के दौरान तुर्किए ने पाकिस्तान को 350 से अधिक सैन्य ड्रोन उपलब्ध कराए थे. इसके साथ ही ड्रोन ऑपरेटर्स भी भेजे गए थे. पाकिस्तान ने उस दौरान तुर्की के बैराक्तर TB2 और YIHA ड्रोन का इस्तेमाल किया था.
तुर्किए और पाकिस्तान के बीच मजबूत होते संबंध
हाल के वर्षों में तुर्किए और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है. तुर्किए पाकिस्तान के लिए कॉर्वेट युद्धपोतों के निर्माण में मदद कर रहा है और उसके F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े को अपग्रेड करने में भी शामिल है. इसके अलावा पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.
किस देश के पास क्या है?
अंकारा स्थित थिंक टैंक TEPAV के रणनीतिकार निहात अली ओजकान ने ब्लूमबर्ग से कहा कि तुर्किए के पास सैन्य अनुभव और विकसित रक्षा उद्योग है, पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जबकि सऊदी अरब वित्तीय ताकत जोड़ता है. तीनों मिलकर एक प्रभावी सुरक्षा ब्लॉक बना सकते हैं.
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नाटो का सदस्य भी है तुर्किए
तुर्किए नाटो का सदस्य है और उसके पास अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा सैन्य बल है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाटो की अहमियत कम आंकने के बाद अंकारा वैकल्पिक रक्षा गठबंधनों पर भी विचार कर रहा है.