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10 दिनों से बीच समंदर में भटक रहा रूसी तेल का जहाज, भारत क्यों नहीं दे रहा उतरने की इजाजत?

रूसी तेल पर पश्चिमी प्रतिबंधों का कोई खास असर नहीं हो रहा था जिसे देखते हुए अमेरिका ने हाल ही में प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया है. इसके तहत रूस के कुछ बड़े तेल टैंकरों पर 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तेल बेचने पर प्रतिबंध लग गया है. इसी वजह से भारत की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं.

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भारत रूसी तेल टैंकर को उतरने की इजाजत नहीं दे रहा है (Photo-Reuters/File)
भारत रूसी तेल टैंकर को उतरने की इजाजत नहीं दे रहा है (Photo-Reuters/File)

रूसी तेल पर बढ़ते अमेरिकी शिकंजे ने भारत के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल से भरा रूस का एक टैंकर भारत के तट के पास पिछले 10 दिनों से भटक रहा है लेकिन उसे भारतीय तट पर ठहरने की इजाजत नहीं दी जा रही है. ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत अभी इस बात पर विचार कर रहा है कि टैंकर को भारतीय बंदरगाह पर उतरने दिया जाए या नहीं.

रिपोर्ट में कहा गया कि रूसी तेल टैंकर भारत के तट से 1,600 मील दूरी पर भटक रहा है. रूसी तेल टैंकर एनएस सेंचुरी दक्षिण कोरिया के जरिए आ रहा था और भारत के बंदरगाह पर रुकने वाला था लेकिन अब पिछले 10 दिनों से समुद्र में ही भटक रहा है. भारत के नौवहन महानिदेशालय (Directorate Generale of Shipping) ने जानकारी दी है कि भारत के अधिकारी फिलहाल यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि भारत में टैंकर से कच्चा तेल उतारने दिया जाए या नहीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी तेल टैंकर गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर उतरने वाला था जहां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का एक सेंटर है. वहां भारत और रूस की संयुक्त ऊर्जा कंपनी नायरा एनर्जी की एक रिफाइनरी भी है. 

हालांकि, नायरा के एक प्रवक्ता ने सोमवार को ब्लूमबर्ग से बातचीत में स्पष्ट कर दिया कि रूसी तेल टैंकर नायरा की तेल रिफाइनरी से संबंधित नहीं है.

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रूसी तेल टैंकर को लेकर असमंजस में क्यों भारत?

रूसी टैंकर भारतीय बंदरगाह पर माल उतार सकता है या नहीं, इस बात को लेकर असंमजस की स्थिति पश्चिमी देशों के रूसी तेल पर प्रतिबंधों को कड़ा करने के कदम के तुरंत बाद हुई है. अमेरिका के नेतृत्व में जी7 देशों ने पिछले हफ्ते एनएस सेंचुरी समेत पांच रूसी जहाजों पर 60 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप से ऊपर तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

अमेरिका इसके जरिए तेल से होने वाले रूसी राजस्व पर प्रतिबंध कड़े करने की कोशिश में है. रूस-यूक्रेन युद्ध को देखते हुए अमेरिका ने रूसी तेल का एक प्राइस कैप तय किया है जिसके मुताबिक, रूसी तेल को 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा कीमत पर नहीं बेचा जा सकता. हालांकि, रूस को इस प्राइस कैप से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है और पिछले कुछ महीनों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि रूस प्राइस कैप से ऊपर तेल बेच रहा है. इसे देखते हुए अमेरिका ने रूसी तेल पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.

अमेरिका से अच्छे संबंध बनाए रखने का दबाव

भारत रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थ रहा है लेकिन युद्ध की शुरुआत से ही रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है. रूस ने भारत को रियायती दरों पर तेल ऑफर किया था जिसका भारतीय रिफाइनरों ने भारी लाभ उठाया. 

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इधर, भारत पर अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का भी दबाव है. माना जा रहा है कि रूसी टैंकर को भारतीय बंदरगाह पर न उतरने देने की एक वजह यह हो सकती है.

साथ ही रूस अपने तेल के लिए भारत से चीनी मुद्रा युआन में भुगतान की मांग कर रहा है लेकिन चीन के साथ रिश्तों को देखते हुए भारत युआन में पेमेंट करने में असहज रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया था कि अक्टूबर तक, भारत में आने वाले कम से कम सात तेल शिपमेंट ऐसे थे जिनका भुगतान नहीं किया था.

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