कनाडा (Canada) के प्रधानमंत्री (Prime Minister) जस्टि ट्रुडो (Justin Trudeau) ने रविवार को कनाडा में चुनाव (Election) की घोषणा की. कनाडा के विश्व में सबसे ज्यादा वैक्सीनेटेड देशों में से होने की बदौलत वह दोबारा से सत्ता में लौटने की जुगत में हैं. गवर्नर जनरल से मुलाकात के बाद उन्होंने ऐलान किया कि कनाडा में 20 सितंबर को वोटिंग होगी.
ट्रुडो ने कनाडा की जनता से कहा कि हमने आपका साथ दिया अब बारी आपकी आवाज सुनने की है. कनाडा के लोगों के चुनने की बारी है कि हम कोरोना के खिलाफ लड़ाई कैसे खत्म करें. बता दें कि ट्रुडो बहुमत हासिल करने की ताक में हैं. उनकी लिबरल पार्टी दो साल पहले अल्पमत में आ गई थी और कोई भी बिल पास कराने के लिए उनकी पार्टी विपक्ष पर निर्भर थी.
कनाडा में चुनावों का ऐलान ऐसे में हुआ है जब वहां डेल्टा वैरिएंट के चलते कोरोना की एक और लहर देखी जा रही है. ट्रुडो ने इसे वैक्सीन नहीं लगावने वालों के लिए चौथी लहर कहा है. ट्रुडो इतने ज्यादा मशहूर नहीं रहे हैं लेकिन उनकी सरकार ने कोरोना महामारी में जिस तरह से इस संकट को संभाला है, उसे बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
कनाडा में धीमी शुरुआत के बाद अब यहां के प्रत्येक नागरिक के लिए पर्याप्त वैक्सीन है. यहां 71 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है. 82 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें कम से कम कोरोना की एक डोज दी जा चुकी है. लॉकडाउन खत्म होने के बाद यहां कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए करो़ड़ों खर्च किया है.
यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के प्रोफेसर रॉबर्ट बोथवेल ने कहा कि अगर चुनाव में ट्रुडो को बहुमत नहीं मिलता है तो पीएम पर उंगलिया उठनीं शुरू हो जाएंगी. ट्रुडो को बहुत ज्यादा पसंद नहीं किया जाता है लेकिन ट्रुडो में वो है जो लिबरल्स चाहते हैं, इसलिए वो उनके पीछे जाएंगे लेकिन अगर वो हार जाते हैं तो लोग उनपर निशाना साधेंगे.
दिवंगत लिबरल प्रधान मंत्री पियरे ट्रूडो के बेटे जस्टिन ट्रूडो कनाडा के इतिहास में दूसरे सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे जब उन्हें पहली बार 2015 में संसद में बहुमत की सीटों के साथ चुना गया था. लिबरल की जीत ने कनाडा में 10 वर्षों से चली आ रही कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार का अंत किया था लेकिन घोटालों ने ट्रूडो की स्थिति को नुकसान पहुंचाया है. विपक्षी वामपंथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह ने कहा कि ट्रूडो का महामारी के बीच चुनाव कराने का फैसला स्वार्थ से भरा है. बता दें कि कनाडा के सबसे बड़े प्रांत ओंटारियो ने लगातार चौथे दिन 500 से अधिक मामले दर्ज किए गए.